फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   First lockdown, now rain damaged vegetable producers

दो माह लॉकडाउन अब बारिश से सब्जी उत्पादक बेहाल

Sat, 06 Jun 2020 09:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 09:06 PM IST
विज्ञापन
First lockdown, now rain damaged vegetable producers
नरही क्षेत्र में किसानों द्वारा किया गया बैगन की खेती। - फोटो : BALLIA
नरही। दो माह से अधिक समय लॉकडाउन और अब पिछले दिनों हुई लगातार बारिश से सब्जी उत्पादक किसान तबाह हो गए हैं। वे कौड़ियों के भाव सब्जी बेज रहे हैं जिससे लागत निकलना भी मुश्किल है। किसानों के सामने कर्ज लेने की नौबत आ गई है।
विज्ञापन

शाहपुर बभनौली निवासी किसान सदन साहनी ने बताया कि दो बीघे में परवल की खेती की थी। खेत 24 हजार रुपये लगान पर लिया था। परवल को तैयार करने में 70 हजार रुपये अतिरिक्त लगा। अब परवल का भाव इतना कम है कि लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। तेतारपुर निवासी सिंहासन राजभर ने बताया 17 हजार रुपये लगाकर एक बीघा बैगन की खेती की, लेकिन भाव नहीं होने के कारण 250 रुपये क्विंटल के भाव बैंगन बिक रहा है। इससे सिर्फ दो हजार रुपये मिले हैं। पूंजी तो डूबी ही अब मेहनत बेकार गया। करंजा बाबातर निवासी अशोक राजभर ने बताया कि कर्ज लेकर एक बीघा बैगन की खेती की, लेकिन एक ओर भाव नहीं है तो दूसरी ओर से कीटों ने बैगन को बर्बाद कर दिया। बिलरिया गांव निवासी मनोज यादव ने बताया कि 25000 खर्च करके डेढ़ बीघा बैगन की खेती की लेकिन 250 से 300 रुपये क्विंटल के भाग बिक रहा है जिससे रखवाली एवं तोड़ाई का भी खर्च नहीं निकला। नरही गांव निवासी प्रवीण कुमार राय मुन्ना ने बताया कि पांच बीघा बैगन की खेती की है। इसमें एक लाख रुपये से अधिक खर्च आया है। लेकिन इस साल सब्जियों के भाव कम होने के कारण औने पौने दाम पर बैगन बेचने को मजबूर हैं। इस साल लागत निकलना भी मुश्किल नजर आ रहा है। नरही के किसान अवनीश कुमार राय ने बताया कि दो बीघा बैगन, तीन बीघा परवल की खेती की है। इस साल सब्जी की खेती का धंधा पूरी तरह घाटे का हो गया है। पिछले साल पांच बीघा खेती में पांच लाख का लाभ हुआ था। लॉकडाउन से तबाही आ गई। नरही के किसान शशि भूषण राय ने बताया कि दो बीघा लौकी की खेती की थी। भाव गिरने के कारण कोई इसे पूछ नहीं रहा। एक रुपये में दो लौकी तक बिक रही है। पूंजी निकलना मुश्किल हो गया है। भरौली के अजय ने बताया कि 12 हजार रुपए देकर लगान पर दो बीघा भिंडी की खेती की थी। इस साल भिंडी तीन से पांच रुपए किलो के भाव में बिकी, जिससे लगान भी नहीं जमा हो पाया है और खर्च की तो बात ही दूर है। अब हम कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं।
विज्ञापन

-
बैगन पर हो गया है टिड्डियों का हमला
बारिश तो सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचा ही था कि बैंगन की फसल पर टिड्डियों का हमला भी हो गया है। इससे किसान परेशान हैं। किसानों ने कहा कि बचाव के लिए उन्हें फिर अच्छी खासी रकम कीटनाशक पर खर्च करनी होगी। ऐसे में उन्होंने खेत को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। किसानों का कहना है कि अब जो भी उपज होगी, उसी में गुजारा किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
लौकी रुपये में दो तो भिंडी ढाई रुपये किलो
गत वर्ष मुनाफे को देखते हुए इस वर्ष किसानों ने सब्जी की खेती प्रमुखता से की थी। लेकिन लाकडाउन और बारिश के चलते धंधा मंदा रहा जिससे नुकसान हुआ है। लौटी एक रुपये में दो किलो तो भिंडी ढाई से तीन रुपये किलो के भाव से बिक रही है। सोचा था कि पिछले साल से भी अधिक खेत लगान पर लेकर खेती करेंगे। पैसे का इंतजाम न होने से ऐसा नहीं कर सके। अगर अधिक खेती की होती तो इतना कर्ज चढ़ गया होता कि उसे उतारना मुश्किल होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed