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आखिरकार खुला स्कूल, पहुंचे 17 बच्चे
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 27 Mar 2015 10:24 PM IST
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सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी के विधानसभा क्षेत्र बांसडीह के दियारा भांगड़ गांव में तीन साल से बंद प्राथमिक विद्यालय आखिरकार शुक्रवार को खुला। स्कूल बंद होने के चलते गांव के लोग इसमें भैंस बांधते थे।
अमर उजाला में गुरुवार को इस मामले का खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा महकमा जागा। गुरुवार को ही प्रभारी डीएम के बालाजी ने मामले में बीएसए के नेतृत्व में जांच बैठा दी और स्कूल से भैंसें निकालकर कर सफाई की गई।
यह खबर जब शुक्रवार के अंक में छपी तो इस दिन स्कूल में 17 बच्चे भी पहुंचे। शिक्षा मित्र और प्रेरक ने कक्षाएं भी ली। मिड-डे मील नहीं बन रहा था। प्रधानाध्यापक भी नहीं थे। शुक्रवार को बीईओ भी पहुंचे और एक-एक बिंदुओं की रिपोर्ट बीएसए को भेजी।
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बता दें कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय से मिली सूची के मुताबिक डा. विनोद सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम मंगलवार को दियारा भागड़ स्थित प्राथमिक विद्यालय पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर टीम भौचक रह गई।
विद्यालय के सभी कमरों में भैंसें बंधी थीं। इस मामले को अमर उजाला ने 26 मार्च के अंक में ‘शिक्षा मंत्री के इलाके में तबेला बना स्कूल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की।
इसके बाद बाद अधिकारियों के कान खडे़ हुए। जिला प्रशासन के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी हरकत में आए और गुरुवार को ही विद्यालय की सफाई कराई गई।
जबकि शुक्रवार को विद्यालय पहुंचीं शिक्षा मित्र ज्योत्सना चौधरी और प्रेरक ओमप्रकाश ने कक्षाएं संचालित की। 17 बच्चों ने पहुंचकर पढ़ाई की। प्रधानाध्यापक अभय बहादुर सिंह शुक्रवार को भी विद्यालय में उपस्थित नहीं मिले।
मिड-डे मील भी नहीं बना था। इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी एके झा ने बताया कि शुक्रवार को विद्यालय पर जांच के लिए गया था। विद्यालय में 17 बच्चे उपस्थित मिले।
शिक्षा मित्र और प्रेरक पढ़ा रहे थे लेकिन प्रधानाचार्य अभय बहादुर सिंह उपस्थित नहीं थे। साथ ही बच्चों के लिए मिड-डे मील भी नहीं बना था। इसकी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है।
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अमर उजाला में गुरुवार को इस मामले का खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा महकमा जागा। गुरुवार को ही प्रभारी डीएम के बालाजी ने मामले में बीएसए के नेतृत्व में जांच बैठा दी और स्कूल से भैंसें निकालकर कर सफाई की गई।
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यह खबर जब शुक्रवार के अंक में छपी तो इस दिन स्कूल में 17 बच्चे भी पहुंचे। शिक्षा मित्र और प्रेरक ने कक्षाएं भी ली। मिड-डे मील नहीं बन रहा था। प्रधानाध्यापक भी नहीं थे। शुक्रवार को बीईओ भी पहुंचे और एक-एक बिंदुओं की रिपोर्ट बीएसए को भेजी।
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बता दें कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय से मिली सूची के मुताबिक डा. विनोद सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम मंगलवार को दियारा भागड़ स्थित प्राथमिक विद्यालय पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर टीम भौचक रह गई।
विद्यालय के सभी कमरों में भैंसें बंधी थीं। इस मामले को अमर उजाला ने 26 मार्च के अंक में ‘शिक्षा मंत्री के इलाके में तबेला बना स्कूल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की।
इसके बाद बाद अधिकारियों के कान खडे़ हुए। जिला प्रशासन के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी हरकत में आए और गुरुवार को ही विद्यालय की सफाई कराई गई।
जबकि शुक्रवार को विद्यालय पहुंचीं शिक्षा मित्र ज्योत्सना चौधरी और प्रेरक ओमप्रकाश ने कक्षाएं संचालित की। 17 बच्चों ने पहुंचकर पढ़ाई की। प्रधानाध्यापक अभय बहादुर सिंह शुक्रवार को भी विद्यालय में उपस्थित नहीं मिले।
मिड-डे मील भी नहीं बना था। इस बाबत खंड शिक्षा अधिकारी एके झा ने बताया कि शुक्रवार को विद्यालय पर जांच के लिए गया था। विद्यालय में 17 बच्चे उपस्थित मिले।
शिक्षा मित्र और प्रेरक पढ़ा रहे थे लेकिन प्रधानाचार्य अभय बहादुर सिंह उपस्थित नहीं थे। साथ ही बच्चों के लिए मिड-डे मील भी नहीं बना था। इसकी रिपोर्ट बेसिक शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है।