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गंगा में गिरते नाले दे रहे हैं स्वच्छता को चुनौती
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 23 Apr 2016 10:32 PM IST
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गंगा के दर्द की दवा सरकार के एजेंडे में नहीं है। अगर कुछ है भी तो वह कम से कम हकीकत में तो कहीं नहीं दिख रही है। यही वजह है कि लाख हाय तौबा के बाद भी जिले में गंगा प्रदूषण पर तनिक भी विराम नहीं लग सका है। शहर के मध्य भाग से होते हुए गंगा के समाने वाला कटहर नाला निरंतर नदी में गिरता रहता है। कटहर नाले के रास्ते प्रतिदिन करीब 500 क्यूसेक प्रदूषित जल गंगा को दूषित कर रहा है। इसके अलावे जनपद के पश्चिमी छोर पर बसे कोटवां में भी लोगों के घरों से निकलने वाला प्रदूषित मल व दूषित जल सीधे-सीधे नाले के माध्यम से गंगा में जाता है। जिससे गंगा प्रदूषित हो रही है।
शहर के कटहल नाला और कोटवां नाले से हो रहे गंगा प्रदूषण से जिला प्रशासन तथा अब तक यहां रह चुके जिलाधिकारी वाकिफ है। नगर पालिका से लेकर यहां के जनप्रतिनिधि भी सबकुछ जानते हैं। बावजूद इस पर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। जिला प्रशासन व नगर पालिका परिषद के स्तर पर कहीं कोई सुधार नहीं हुआ। गंगा के निर्मलीकरण पर भी कोई संजीदगी नहीं दिखाई दी। गंगा की व्यथा, कथा को लेकर चिंतित स्वयं सेवी संस्थाएं भी महज सरकार को कोसते भर में ही लगी रहती है। लेकिन गोमुख से लेकर बलिया के रास्ते गंगा सागर तक 2555 किमी का सफर करने वाली गंगा की गंदगी के प्रति कोई जागरूक नहीं है। वैचारिक स्तर पर इधर के दस वर्षों में गंगा प्रदूषण की बातें जरूर सामने आई है, लेकिन जमीनी हकीकत यही बयां कर रहा है कि गंगा गंदी है और उसकी धारा मंदी।
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शहर के कटहल नाला और कोटवां नाले से हो रहे गंगा प्रदूषण से जिला प्रशासन तथा अब तक यहां रह चुके जिलाधिकारी वाकिफ है। नगर पालिका से लेकर यहां के जनप्रतिनिधि भी सबकुछ जानते हैं। बावजूद इस पर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। जिला प्रशासन व नगर पालिका परिषद के स्तर पर कहीं कोई सुधार नहीं हुआ। गंगा के निर्मलीकरण पर भी कोई संजीदगी नहीं दिखाई दी। गंगा की व्यथा, कथा को लेकर चिंतित स्वयं सेवी संस्थाएं भी महज सरकार को कोसते भर में ही लगी रहती है। लेकिन गोमुख से लेकर बलिया के रास्ते गंगा सागर तक 2555 किमी का सफर करने वाली गंगा की गंदगी के प्रति कोई जागरूक नहीं है। वैचारिक स्तर पर इधर के दस वर्षों में गंगा प्रदूषण की बातें जरूर सामने आई है, लेकिन जमीनी हकीकत यही बयां कर रहा है कि गंगा गंदी है और उसकी धारा मंदी।
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