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म्पैक्ट-- क्षतिग्रस्त पिलर को दुरुस्त करने की शुरु हुई कवायद
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रामगढ़। पिछले दो सप्ताह से दूबे छपरा में चल रहे 8.93 करोड़ की लागत से हो रहे कटान रोधी कार्य जारी हैं। इसको लेकर बाढ़ और कटान का दंश झेल चुके ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चा है। उधर, अमर उजाला के 11 जून के अंक में मानक की अनदेखी से संबंधित खबर पर विभाग हरकत में आया। आनन- फानन में क्षतिग्रस्त सीमेंटेड पिलर को दुरुस्त कराने की कवायद शुरु हो गई।
बता दें कि दूबे छपरा में हो रहे कटान रोधी कार्य में मानक की अनदेखी की जा रही है। पार्कोपाईन विधि से चल रहे बाढ़ निरोधक कार्य में विभागीय अधिकारियों के अनुसार सरिया 7/8 एमएम जो पतले वायर से बंधे हुए हैं और कंक्रीट ग्रेड एम 15 व सीमेंट मानक के अनुसार प्रयोग कर पिलर तैयार किया जा रहा है। जबकि धरातल पर ऐसा नहीं दिख रहा। लोग तो शंका व्यक्त करने लगे हैं कि कहीं पिछले वर्ष 29 करोड़ की लागत से ठोकर व पिचिंग का कार्य करने के बावजूद रिंगबंधा 16 सितम्बर 2019 को गंगा नदी की लहरों में ध्वस्त हो गया वही हाल इस कटान रोधी कार्य का भी बाढ़ आने पर हो जाए।
मामला मेरे संज्ञान में है, ग्रामीणों की शिकायत पर सीमेंटेड पिलर की ढलाई का काम मानक के अनुसार कार्यस्थल पर करने का आदेश दिया गया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खण्ड, बलिया।
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बता दें कि दूबे छपरा में हो रहे कटान रोधी कार्य में मानक की अनदेखी की जा रही है। पार्कोपाईन विधि से चल रहे बाढ़ निरोधक कार्य में विभागीय अधिकारियों के अनुसार सरिया 7/8 एमएम जो पतले वायर से बंधे हुए हैं और कंक्रीट ग्रेड एम 15 व सीमेंट मानक के अनुसार प्रयोग कर पिलर तैयार किया जा रहा है। जबकि धरातल पर ऐसा नहीं दिख रहा। लोग तो शंका व्यक्त करने लगे हैं कि कहीं पिछले वर्ष 29 करोड़ की लागत से ठोकर व पिचिंग का कार्य करने के बावजूद रिंगबंधा 16 सितम्बर 2019 को गंगा नदी की लहरों में ध्वस्त हो गया वही हाल इस कटान रोधी कार्य का भी बाढ़ आने पर हो जाए।
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मामला मेरे संज्ञान में है, ग्रामीणों की शिकायत पर सीमेंटेड पिलर की ढलाई का काम मानक के अनुसार कार्यस्थल पर करने का आदेश दिया गया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खण्ड, बलिया।