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अपनी दास्तां सुनाई तो कांप गई रूह
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2015 11:13 PM IST
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नेपाल में आए जलजले को झेलकर जब संतोष कुमार चौधरी शनिवार अपने गांव घोरौली नारायणपुर पहुंचे तो सबकी जान में जान आई। संतोष से त्रासदी की जुबानी सुनने को गांव वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। उन्होंने दास्तां सुनाई तो लोगों की रूह कांप गई।
संतोष के मुताबिक एक सप्ताह पूर्व नेपाल में आए भूकंप में उसका किराए का मकान धराशायी हो गया। संतोष उस वक्त इलेक्ट्रानिक्स पार्ट्स खरीदने बाजार गया था। लेकिन उसकी पत्नी सीमा देवी तथा बच्चा अनमोल घर पर टीवी देख रहे थे। भूकंप आते ही उसकी पत्नी बच्चे को लेकर बाहर भाग गई।
इससे दोनों बाल-बाल बच गए। लेकिन आंखों के सामने पूरा मकान गिर गया और लाखों का सामान नष्ट हो गया। चारों और चीख-पुकार मच गई। परिवहन, दूरसंचार आदि व्यवस्थाएं ठप हो गईं। दूसरे दिन चारों और सिर्फ लाशें दिख रही थीं।
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राहत कर्मी जुटे थे। बताया कि उन्होंने अपनी बीवी और बच्चे के साथ प्लास्टिक के नीचे तीन दिनों तक गुजर बसर किया।
बताया कि 60 से 90 रुपये तक पानी की बोतल, 160 रुपये प्रति किलो चिउड़ा, एक पैकेट दालमोठ 200 रुपये में मिल रहा था। बताया कि भारत सरकार की ओर से आपदा में विशेष सहयोग मिल रहा है। बार्डर रक्सोल पहुंचने के बाद प्रदेश सरकार ने आने-जाने का टिकट मुहैया कराया। तब संतोष घर वापस आया।
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संतोष के मुताबिक एक सप्ताह पूर्व नेपाल में आए भूकंप में उसका किराए का मकान धराशायी हो गया। संतोष उस वक्त इलेक्ट्रानिक्स पार्ट्स खरीदने बाजार गया था। लेकिन उसकी पत्नी सीमा देवी तथा बच्चा अनमोल घर पर टीवी देख रहे थे। भूकंप आते ही उसकी पत्नी बच्चे को लेकर बाहर भाग गई।
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इससे दोनों बाल-बाल बच गए। लेकिन आंखों के सामने पूरा मकान गिर गया और लाखों का सामान नष्ट हो गया। चारों और चीख-पुकार मच गई। परिवहन, दूरसंचार आदि व्यवस्थाएं ठप हो गईं। दूसरे दिन चारों और सिर्फ लाशें दिख रही थीं।
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राहत कर्मी जुटे थे। बताया कि उन्होंने अपनी बीवी और बच्चे के साथ प्लास्टिक के नीचे तीन दिनों तक गुजर बसर किया।
बताया कि 60 से 90 रुपये तक पानी की बोतल, 160 रुपये प्रति किलो चिउड़ा, एक पैकेट दालमोठ 200 रुपये में मिल रहा था। बताया कि भारत सरकार की ओर से आपदा में विशेष सहयोग मिल रहा है। बार्डर रक्सोल पहुंचने के बाद प्रदेश सरकार ने आने-जाने का टिकट मुहैया कराया। तब संतोष घर वापस आया।