फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Encroached city lanes due to encroachment

अतिक्रमण के चलते सिमटी शहर की गलियां

Sun, 16 Feb 2020 10:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 10:27 PM IST
विज्ञापन
Encroached city lanes due to encroachment
स्टेशन कचहरी रोड से विशुनीपुर जाने वाली गली अब अपनी असली चौड़ाई से आधी भी नहीं रह गई है। - फोटो : BALLIA
बलिया। सुगम यातायात के लिए कभी अलग पहचान रखने वाला जिला मुख्यालय अब अतिक्रमण से अभिशप्त है। इस शहर का नक्शा इस कदर बना है कि किसी भी गली से गुजर कर चौक तक पहुंचा जा सकता है लेकिन अब कई गलियां अतिक्रमण से सिमट गई है या बंद हो गई हैं। यही वजह है कि आए दिन शहर में जाम लगता है और लोग परेशान होते हैं। कई बार जाम से निजात के लिए योजना बनी लेकिन इस समस्या से निजात नहीं मिल सकी।
विज्ञापन

बलिया शहर को बसाने के लिए लंदन से दो इंजीनियर जापलिन और ओक्डेन आए थे। इन दोनों इंजीनियरों ने बाढ़ में पूरी तरह समाप्त हो चुके बलिया शहर को फिर से बसाया गया। दोनों इंजीनियरों ने इस शहर का जो नक्शा बनाया था, वह ऐसा था कि इस शहर में किसी को भी कहीं भी छोड़ दो वह हर तरफ से घूमकर अंतत: छह रास्तों को जोड़ने वाले चौक में ही पहुंच जाएगा। अब वही शहर अतिक्रमण व अवैध कब्जे के कारण इस हाल में पहुंच गया है कि इसकी लगभग सभी गलियां नक्शे से गायब हो गई हैं। अब स्टेशन कचहरी रोड से विशुनीपुर जाने वाली गली की चौड़ाई से आधी भी नहीं रह गई है। सहतवार कोठी के पीछे स्थित गली एक तरफ से पूरी तरह बंद हो चुकी है। गुरुद्वारा के पीछे स्थित इस गली पर सालों पहले से लगभग कब्जा की स्थिति है और इधर से अब कोई नहीं जाता है। कुछ स्थानों पर जेनरेटर का कब्जा है तो शुरूआत में ही एक बाइक सर्विस सेंटर का कब्जा है और वहां दिनभर रोड पर ही गाड़ियां धोई जाती हैं। यदि गलियों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही बंद गलियों को खोल दिया जाए तो जाम की समस्या से मुक्ति मिल सकती है।
विज्ञापन

सामाजिक कार्यकर्ता व साहित्यकार शिव कुमार कौशिकेय बताते हैं कि गंगा की बाढ़ में पूरा शहर नक्शे से गायब हो गया था। इसके बाद अंग्रेजी शासन के सामने शहर को फिर से बसाने की चुनौती सामने आई तो यहां के तत्कालीन कलक्टर ने इसकी सूचना लंदन भेजी। तब लंदन से दो इंजीनियर भेजे गए, जिनकी देखरेख में पूरा शहर बसाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

गलियां ऐसी थी कि ट्रक घुस जाए
शहर को बसाते समय पुराने जमाने के अंग्रेज इंजीनियरों ने भी कितनी दूरदर्शिता दिखाई थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस समय गलियों के नाम पर जो जगह छोड़ी गई थी, उसकी चौड़ाई इतनी थी कि उनमें भी आप आसानी से ट्रकों पर सामान लादकर ले जा सकते थे। तब लगभग चार किलोमीटर के एरिया में बसाए गए इस शहर में कोई भी ऐसी गली या सड़क नहीं थी जिसपर जाम लगने की नौबत आए। आज भी यदि उन सभी गलियों को पहले की दशा में ला दिया जाए तो मुख्य सड़क पर इतना लोड ही नहीं रह जाएगा कि जाम की स्थिति हो। कारण कि जाम लगते ही लोग गलियों का रास्ता अपनाकर गंतव्य तक पहुंच जाएंगे।
इंजीनियरों के नाम पर हैं दो पुलिस चौकियां व मोहल्ले
लंदन से आकर शहर का नक्शा तैयार करने और अपनी देखरेख में बसाने वाले इन इंजीनियरों से तब के अंग्रेज अधिकारी इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने दोनों के नाम पर दो मोहल्लों के नाम रख दिए जो आज भी हैं। उन मोहल्लों में स्थापित होने वाली जापलिनगंज पुलिस चौकी और ओक्डेनगंज पुलिस चौकी का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है।

कोट
ईओ से शहर का नक्शा मंगवा कर जांच कराई जाएगी। नक्शे के आधार पर गलियों की वर्तमान स्थिति देखकर अतिक्रमण हटाया जाएगा। अभी हाल ही में ओवरब्रिज के नीचे बड़ी कार्रवाई करते हुए थोक सब्जी मंडी को परिखरा स्थित मंडी में शिफ्ट भी कराया गया है।-बृजकिशोर दुबे, सिटी मजिस्ट्रेट।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed