{"_id":"60f45cbd8ebc3e6d8f79b09d","slug":"e-rickshaw-running-without-registration-traffic-system-in-bad-shape-ballia-news-vns601170222","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे ई-रिक्शा, यातायात व्यवस्था बदहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना रजिस्ट्रेशन दौड़ रहे ई-रिक्शा, यातायात व्यवस्था बदहाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। शहर में वैसे भी यातायात व्यवस्था बेहद खराब है। वन वे व्यवस्था लागू होने के बाद भी ना कोई नियम है और न कोई रोकटोक। यहां डग्गामार वाहन भी बेधड़क होकर दौड़ रहे हैं। ऊपर से बिना रजिस्ट्रेशन के करीब ढाई हजार ई-रिक्शा शहर की यातायात व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं। इनकी वजह से जगह-जगह जाम लग रहा है।
जिले में 2800 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। 60 लोडर ई-रिक्शों का भी रजिस्ट्रेशन हैं। इनके अलावा, बिना रजिस्ट्रेशन ई रिक्शा की बात करें तो जिले में कम से कम इनकी संख्या ढाई-तीन हजार होगी। केवल शहर में ही दो हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इनमें करीब पांच सौ ई-रिक्शा रजिस्टर्ड होंगे। बाकी ई-रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन वाले हैं। इनके रजिस्ट्रेशन या सही संख्या जानने के लिए न तो एआरटीओ ने कोई कदम उठाया है और न ही पुलिस विभाग ने अभियान चलाया है। इनके सड़क पर चलने के संबंध में भी कोई नियम लागू नहीं किया गया है और न ही इन पर ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। ऐसे में ई रिक्शा चालक के परिवार में जिसके मन में आता है, वह ई-रिक्शा लेकर शहर में निकल पड़ता है। यातायात पुलिस की लापरवाही से इनकी संख्या बेहिसाब बढ़ती जा रही है। इससे यातायात व्यवस्था और बिगड़ रही है। इनकी वजह से शहर में जगह-जगह जाम लग रहा है और लोगों को परेशानी हो रही है।
2800 रजिस्ट्रेशन, सौ लाइसेंस
जिले में 2800 ई-रिक्शों के रजिस्ट्रेशन जरूर हैं, लेकिन एक हैरानी की बात यह है कि इन्हें चलाने के लिए मात्र सौ लोगों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। बाकी ई-रिक्शों के लाइसेंस भी नहीं है। वह बिना लाइसेंस के दौड़ रहे हैं। शहर में ई-रिक्शा चलाने के लिए कोई नियम लागू नहीं दिखता। इन्हें दस साल से लेकर 16-17 साल के लड़के भी चला रहे हैं। न तो उन्हें यातायात नियमों के बारे में जानकारी है और न ही उन्हें वाहन चलाने का अधिकार है। इसके बावजूद उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
एजेंसियों से सीधे बेच दिए जाते हैं ई-रिक्शा
वैसे किसी वाहन की बिक्री के बाद उसका नंबर एआरटीओ कार्यालय से जारी होता है। उसका बीमा, फिटनेस, लाइसेंस समेत अन्य कागजात एआरटीओ कार्यालय से ही जारी होते हैं, लेकिन ई रिक्शों में कोई नियम लागू नहीं किया जाता। कौन खरीद रहा है या कौन बेच रहा है, इनके रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं हो रहे इस पर कोई गौर नहीं दिया जा रहा। जबकि पुलिस और एआटीओ इसके जिम्मेदार हैं। ई-रिक्शा में सबसे बड़ी दिक्कत ये आ रही है कि आपराधिक मामलों में इन्हें तलाश करना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि न तो इन पर कोई नंबर होता है और न ही इनके रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं। अगर ये लूट लिए भी जाते हैं तो पुलिस को बरामद करना और कठिन हो जाता है।
जो ई-रिक्शे कार्यालय आ रहे हैं। उनके रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं, जो ई-रिक्शा एजेंसियों से सीधे बेच दिए जाते हैं। वह अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं। इस संबंध में एजेंसियों से बात की जाएगी कि ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन कराएं और उनके ड्राइवरों के ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाएं। - राज भूषण चौधरी, आरआई, परिवहन विभाग
विज्ञापन
जिले में 2800 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। 60 लोडर ई-रिक्शों का भी रजिस्ट्रेशन हैं। इनके अलावा, बिना रजिस्ट्रेशन ई रिक्शा की बात करें तो जिले में कम से कम इनकी संख्या ढाई-तीन हजार होगी। केवल शहर में ही दो हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इनमें करीब पांच सौ ई-रिक्शा रजिस्टर्ड होंगे। बाकी ई-रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन वाले हैं। इनके रजिस्ट्रेशन या सही संख्या जानने के लिए न तो एआरटीओ ने कोई कदम उठाया है और न ही पुलिस विभाग ने अभियान चलाया है। इनके सड़क पर चलने के संबंध में भी कोई नियम लागू नहीं किया गया है और न ही इन पर ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। ऐसे में ई रिक्शा चालक के परिवार में जिसके मन में आता है, वह ई-रिक्शा लेकर शहर में निकल पड़ता है। यातायात पुलिस की लापरवाही से इनकी संख्या बेहिसाब बढ़ती जा रही है। इससे यातायात व्यवस्था और बिगड़ रही है। इनकी वजह से शहर में जगह-जगह जाम लग रहा है और लोगों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
2800 रजिस्ट्रेशन, सौ लाइसेंस
जिले में 2800 ई-रिक्शों के रजिस्ट्रेशन जरूर हैं, लेकिन एक हैरानी की बात यह है कि इन्हें चलाने के लिए मात्र सौ लोगों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। बाकी ई-रिक्शों के लाइसेंस भी नहीं है। वह बिना लाइसेंस के दौड़ रहे हैं। शहर में ई-रिक्शा चलाने के लिए कोई नियम लागू नहीं दिखता। इन्हें दस साल से लेकर 16-17 साल के लड़के भी चला रहे हैं। न तो उन्हें यातायात नियमों के बारे में जानकारी है और न ही उन्हें वाहन चलाने का अधिकार है। इसके बावजूद उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
एजेंसियों से सीधे बेच दिए जाते हैं ई-रिक्शा
वैसे किसी वाहन की बिक्री के बाद उसका नंबर एआरटीओ कार्यालय से जारी होता है। उसका बीमा, फिटनेस, लाइसेंस समेत अन्य कागजात एआरटीओ कार्यालय से ही जारी होते हैं, लेकिन ई रिक्शों में कोई नियम लागू नहीं किया जाता। कौन खरीद रहा है या कौन बेच रहा है, इनके रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं हो रहे इस पर कोई गौर नहीं दिया जा रहा। जबकि पुलिस और एआटीओ इसके जिम्मेदार हैं। ई-रिक्शा में सबसे बड़ी दिक्कत ये आ रही है कि आपराधिक मामलों में इन्हें तलाश करना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि न तो इन पर कोई नंबर होता है और न ही इनके रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं। अगर ये लूट लिए भी जाते हैं तो पुलिस को बरामद करना और कठिन हो जाता है।
जो ई-रिक्शे कार्यालय आ रहे हैं। उनके रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं, जो ई-रिक्शा एजेंसियों से सीधे बेच दिए जाते हैं। वह अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं। इस संबंध में एजेंसियों से बात की जाएगी कि ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन कराएं और उनके ड्राइवरों के ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाएं। - राज भूषण चौधरी, आरआई, परिवहन विभाग