{"_id":"595146cd4f1c1b7c1b8b45e9","slug":"duty-on-the-provincial-border-even-after-the-bridge-was-closed","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुल बंद होने के बाद भी प्रांतीय सीमा पर लगती रही ड्यूटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुल बंद होने के बाद भी प्रांतीय सीमा पर लगती रही ड्यूटी
ballia
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:09 PM IST
विज्ञापन
जांच
- फोटो : demopic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। प्रांतीय सीमा पर तीन सालों तक पुल बंद होने के नाम पर वन कर्मियों की ओर से किए गए करोड़ों के गोलमाल की जांच तो चल रही है। लेकिन इस बीच हुए ‘खेल’ की परत-दर-परत भी खुल रही है। एक ओर जहां विभाग पुल को बंद बताता रहा वहीं गोरखधंधा जारी रखने के लिए प्रांतीय सीमा पर वनकर्मियों की आठ-आठ घंटे की ड्यूटी भी लगाता रहा। अमर उजाला के खुलासे के बाद हो रही जांच को लेकर विभागीय कर्मियों में खलबली मची हुई है।
बताया जाता है कि वर्ष 2007-08 में वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूलने के लिए वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने पर चेकपोस्ट को हटाकर विभाग ने प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती की। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद विभाग ने पुल बंद होने के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्रवर्तन दल को हटा दिया गया।
लेकिन छोटे वाहनों से बिहार से वन उपज आने का सिलसिला चलता रहा। विभागीय नियमों के मुताबिक प्रवर्तन दल नहीं होने पर गैर प्रंात से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था है। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम धड़ल्ले से चलता रहा।
विज्ञापन
सूत्रों की मानें तो विभागीय कर्मियों ने एक ओर जहां पुल को बंद दिखाया वहीं दूसरी ओर फेफना रेंजर की ओर से भरौली प्रांतीय सीमा पर तीन वन दरोगाओं की आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई जाती रही। सवाल उठता है कि जब पुल बंद होना बताया गया तो ड्यूटी किस लिए लगाई जाती रही? जब प्रांतीय सीमा पर 24 घंटे की ड्यूटी थी तो तीन सालों में महज सात-आठ वाहनों को ही क्यों पकड़े गए? तीन सालों तक चले इस गोरखधंधे पर विभाग के आला अफसरों की निगाह क्यों नहीं पड़ी? इन्हीं सवालों के बीच करोड़ों के गोलमाल का राज है।
बेखौफ चल रहा ‘खेल’
बलिया। एक ओर करोड़ों के गोलमाल की जांच आजमगढ़ के वन संरक्षक की ओर से की जा रही है वहीं दूसरी ओर भरौली स्थित प्रांतीय सीमा पर वनकर्मियों का ‘खेल’ बदस्तूर जारी है। सूत्रों की मानें तो वाहनों की संख्या कम दिखाकर रोजाना हजारों के राजस्व का गोलमाल किया जा रहा है।
करोड़ों के गोलमाल की जांच कई एंगल से की जा रही है। तीन सालों में कब, कहां और क्या-क्या हुआ इसकी पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया
विज्ञापन
बताया जाता है कि वर्ष 2007-08 में वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूलने के लिए वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने पर चेकपोस्ट को हटाकर विभाग ने प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती की। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद विभाग ने पुल बंद होने के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्रवर्तन दल को हटा दिया गया।
विज्ञापन
लेकिन छोटे वाहनों से बिहार से वन उपज आने का सिलसिला चलता रहा। विभागीय नियमों के मुताबिक प्रवर्तन दल नहीं होने पर गैर प्रंात से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था है। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम धड़ल्ले से चलता रहा।
विज्ञापन
सूत्रों की मानें तो विभागीय कर्मियों ने एक ओर जहां पुल को बंद दिखाया वहीं दूसरी ओर फेफना रेंजर की ओर से भरौली प्रांतीय सीमा पर तीन वन दरोगाओं की आठ-आठ घंटे की ड्यूटी लगाई जाती रही। सवाल उठता है कि जब पुल बंद होना बताया गया तो ड्यूटी किस लिए लगाई जाती रही? जब प्रांतीय सीमा पर 24 घंटे की ड्यूटी थी तो तीन सालों में महज सात-आठ वाहनों को ही क्यों पकड़े गए? तीन सालों तक चले इस गोरखधंधे पर विभाग के आला अफसरों की निगाह क्यों नहीं पड़ी? इन्हीं सवालों के बीच करोड़ों के गोलमाल का राज है।
बेखौफ चल रहा ‘खेल’
बलिया। एक ओर करोड़ों के गोलमाल की जांच आजमगढ़ के वन संरक्षक की ओर से की जा रही है वहीं दूसरी ओर भरौली स्थित प्रांतीय सीमा पर वनकर्मियों का ‘खेल’ बदस्तूर जारी है। सूत्रों की मानें तो वाहनों की संख्या कम दिखाकर रोजाना हजारों के राजस्व का गोलमाल किया जा रहा है।
करोड़ों के गोलमाल की जांच कई एंगल से की जा रही है। तीन सालों में कब, कहां और क्या-क्या हुआ इसकी पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया