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दुर्जनपुर हत्याकांड: मुख्य अभियुक्त धीरेंद्र प्रताप सिंह 48 घंटे के पुलिस कस्टडी रिमांड पर
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बलिया। दुर्जनपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह डब्लू की पुलिस कस्टडी रिमांड कोर्ट ने स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 48 घंटे की रिमांड की अनुमति देते हुए आरोपी को अधिवक्ता साथ रखने की छूट दी है जो पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप किए बिना दूर से कार्रवाई को देख सकता है।
थानाध्यक्ष रेवती प्रवीण कुमार सिंह की ओर से अभियोजन अधिकारी अधिवक्ता ओंकार त्रिपाठी व शिवबचन राम ने कोर्ट सीजेएम रमेश कुशवाहा की कोर्ट में सात दिन की रिमांड की मांग करते हुए कहा कि 15 अक्तूबर को दुर्जनपुर गांव में जयप्रकाश पाल की हत्या के बाद आरोपी शस्त्र समेत फरार था। इसे पालिटेक्निक चौराहा थाना गाजीपुर लखनऊ से एसटीएफ ने 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 19 अक्तूबर को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार बलिया भेज दिया गया। अधिवक्ता ने कहा कि विवेचना के लिए असलहा बरामदगी, साक्ष्य संकलन व अपराध के बाद फरार होने के दौरान किसने सहयोग किया इस संबंध में आरोपी से पूछताछ करना आवश्यक है।
वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भुुवाल सिंह ने मौखिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि आरोपी ने किसी वस्तु को बरामद कराने की बात नहीं कही है। विवेचक द्वारा मनमाने ढंग से इसे अंकित किया गया है। पुलिस कस्टडी रिमांड इसलिए मांगी जा रही है कि आरोपी को अनावश्यक रूप से केस में फंसाया जा सके। सीजेएम रमेश कुशवाहा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने अनुमति देते हुए कहा कि आरोपी को 22 अक्तूबर को सुबह दस बजे से 24 अक्तूबर सुबह दस बजे तक रिमांड इस शर्त के साथ स्वीकार की जाती है कि आरोपी को रिमांड के पूर्व व न्यायिक अभिरक्षा में दाखिल करने से पूर्व चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। आरोपी चाहे तो रिमांड पर कार्रवाई के दौरान अधिवक्ता रख सकता है जो दूर से कार्रवाई देखेगा पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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थानाध्यक्ष रेवती प्रवीण कुमार सिंह की ओर से अभियोजन अधिकारी अधिवक्ता ओंकार त्रिपाठी व शिवबचन राम ने कोर्ट सीजेएम रमेश कुशवाहा की कोर्ट में सात दिन की रिमांड की मांग करते हुए कहा कि 15 अक्तूबर को दुर्जनपुर गांव में जयप्रकाश पाल की हत्या के बाद आरोपी शस्त्र समेत फरार था। इसे पालिटेक्निक चौराहा थाना गाजीपुर लखनऊ से एसटीएफ ने 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 19 अक्तूबर को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार बलिया भेज दिया गया। अधिवक्ता ने कहा कि विवेचना के लिए असलहा बरामदगी, साक्ष्य संकलन व अपराध के बाद फरार होने के दौरान किसने सहयोग किया इस संबंध में आरोपी से पूछताछ करना आवश्यक है।
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वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भुुवाल सिंह ने मौखिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि आरोपी ने किसी वस्तु को बरामद कराने की बात नहीं कही है। विवेचक द्वारा मनमाने ढंग से इसे अंकित किया गया है। पुलिस कस्टडी रिमांड इसलिए मांगी जा रही है कि आरोपी को अनावश्यक रूप से केस में फंसाया जा सके। सीजेएम रमेश कुशवाहा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने अनुमति देते हुए कहा कि आरोपी को 22 अक्तूबर को सुबह दस बजे से 24 अक्तूबर सुबह दस बजे तक रिमांड इस शर्त के साथ स्वीकार की जाती है कि आरोपी को रिमांड के पूर्व व न्यायिक अभिरक्षा में दाखिल करने से पूर्व चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। आरोपी चाहे तो रिमांड पर कार्रवाई के दौरान अधिवक्ता रख सकता है जो दूर से कार्रवाई देखेगा पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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