{"_id":"5fc928458ebc3e9bca1b0f42","slug":"drains-not-repaired-for-43-years-irrigation-affected-ballia-news-vns5615244193","type":"story","status":"publish","title_hn":"43 साल से नहीं हुई नालियों की मरम्मत, सिंचाई हो रही प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
43 साल से नहीं हुई नालियों की मरम्मत, सिंचाई हो रही प्रभावित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लालगंज। बैरिया तहसील क्षेत्र के हृदयपुर मौजे में मुरार पट्टी व हृदयपुर के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए 1977 में नलकूप का निर्माण कराया गया था। एक किलोमीटर के दायरे में बनाई गईं नालियां मरम्मत नहीं होने से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। ऐसे में नलकूप चलते ही पानी दूसरे खेतों में निकल जा रहा है।
नलकूप को तत्कालीन विधायक बनवारी राम यादव ने हृदयपुर के एक किसान के खेत में लगवाया था। जिससे लगभग सौ एकड़ खेत की सिंचाई होती थी और 120 किसान लाभान्वित होते थे। लेकिन इस समय सिर्फ उन्हीं किसानों के खेतों की सिंचाई हो पा रही है जो प्लास्टिक के पाइप की व्यवस्था कर अपने खेत तक ले गए हैं। हृदयपुर के किसान ताड़केश्वर पाठक ने बताया कि पहले नाली खेत तक आई थी। इससे सिंचाई आसानी से कर लेते थे। अब खेत के सामने नाली का अस्तित्व समाप्त हो गया है। अब बोरिंग कराने की सोच रहा हूं। मुरारपट्टी के किसान राजेंद्र पाठक ने बताया कि जब तक नाली का अस्तित्व था, तब तक नलकूप से सिंचाई कर काफी अच्छी फसल का उत्पादन कर लेत था। अब ऐसा नहीं हो पा रहा।
किसान कमलदेव ने बताया कि सरकारी बोरिंग से सिंचाई आसानी से कम खर्च में हो जाती थी। अब नही हो पा रही, क्योंकि नाली या तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है या उसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। बहुआरा के किसान शंकर सिंह बताते हैं कि हृदयपुर की बोरिंग की नालियां मेरे खेत तक गई थीं। इससे सिंचाई कर अधिक उत्पादन किया जाता था। अब खेत के साइड में पूर्ण रूप से नाली का अस्तित्व खत्म हो गया तो सिंचाई नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
नलकूप ऑपरेटर बलराम तिवारी बताते हैं कि नाली की मरम्मत 2011 और 2015 में कराई गई थी। दोनों बार 270 मीटर के दायरे को कवर किया गया था। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी नाली की मरम्मत होते नहीं देखा।
विज्ञापन
नलकूप को तत्कालीन विधायक बनवारी राम यादव ने हृदयपुर के एक किसान के खेत में लगवाया था। जिससे लगभग सौ एकड़ खेत की सिंचाई होती थी और 120 किसान लाभान्वित होते थे। लेकिन इस समय सिर्फ उन्हीं किसानों के खेतों की सिंचाई हो पा रही है जो प्लास्टिक के पाइप की व्यवस्था कर अपने खेत तक ले गए हैं। हृदयपुर के किसान ताड़केश्वर पाठक ने बताया कि पहले नाली खेत तक आई थी। इससे सिंचाई आसानी से कर लेते थे। अब खेत के सामने नाली का अस्तित्व समाप्त हो गया है। अब बोरिंग कराने की सोच रहा हूं। मुरारपट्टी के किसान राजेंद्र पाठक ने बताया कि जब तक नाली का अस्तित्व था, तब तक नलकूप से सिंचाई कर काफी अच्छी फसल का उत्पादन कर लेत था। अब ऐसा नहीं हो पा रहा।
विज्ञापन
किसान कमलदेव ने बताया कि सरकारी बोरिंग से सिंचाई आसानी से कम खर्च में हो जाती थी। अब नही हो पा रही, क्योंकि नाली या तो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है या उसका अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। बहुआरा के किसान शंकर सिंह बताते हैं कि हृदयपुर की बोरिंग की नालियां मेरे खेत तक गई थीं। इससे सिंचाई कर अधिक उत्पादन किया जाता था। अब खेत के साइड में पूर्ण रूप से नाली का अस्तित्व खत्म हो गया तो सिंचाई नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
नलकूप ऑपरेटर बलराम तिवारी बताते हैं कि नाली की मरम्मत 2011 और 2015 में कराई गई थी। दोनों बार 270 मीटर के दायरे को कवर किया गया था। लेकिन किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी नाली की मरम्मत होते नहीं देखा।