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जयंती पर याद किए गए डॉ भीमराव आंबेडकर
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नगर के टाउन हाल बापू भवन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित विचार संगोष्ठी में मंचासीन अति?
- फोटो : BALLIA
बलिया। नगर सहित विभिन्न इलाकों में गुरुवार को विभिन्न संगठनों व दलों की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती मनाया गया। वक्ताओं ने डॉ आंबेडकर के जीवन पर्यंत किए कार्यों पर प्रकाश डाला।
कलेक्ट्रेट स्थित अंबेडकर संस्थान में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 131 वी जयंती मनाई गई। शुभारंभ एस प्रताप वैद्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद बुद्ध वंदना व गौतम बुद्ध, डॉक्टर आंबेडकर साहब के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित किया गया। वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त रखते हुए कहा कि बाबा साहब डॉक्टर आंबेडकर ने भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता और अखंडता तथा समतामूलक समाज की स्थापना पर विशेष बल दिया है। भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था व सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध पूरा जीवन संघर्ष में बिताया। उन्होंने समाज में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और गैर बराबरी में समानता लाने के लिए जीवन पर्यंत कार्य किया। दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए भी कार्य किया। श्रीराम सरगम, शंभू राजभर व बिकल बलियावी अपने गीतों के माध्यम से बाबा साहब द्वारा किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया। इस मौके पर विजय शंकर, प्रभुनाथ, वकील राम, आरडी गौतम, वीर बहादुर, छोटेलाल, लक्ष्मीनारायण चौहान, राजन कनौजिया, गौरी शंकर राम, स्वामीनाथ आदि रहे।
बाबा साहब का संघर्ष ही संविधान में उतारा गया: रमापतिराम त्रिपाठी
बलिया। टाउनहाल के सभागार में गुरुवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर समाजिक समरसता दिवस विचार संगोष्ठी का आयोजन भारतीय जनता पार्टी द्वारा किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद रमापतिराम त्रिपाठी व विशिष्ट अतिथि सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बाबा साहब के चित्र पर दीप प्रज्वलित व पुष्पांजलि अर्पित कर किया। जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि व विधायक केतकी सिंह का अंगवस्त्रम से स्वागत किया।
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संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि बाबा साहब का संघर्ष ही भारतीय संविधान में उतारा गया है। हमारा संविधान समाजिक समरसता एंव सदभाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है। समरसता हमारी संस्कृति का मूल आधार है। यह सभी धर्मों ,विचारों और समाज को एकता के सूत्र में पिरोती है। कहा कि हम जिस क्षेत्र में भी रहे वहां समरसता का भाव स्थापित करें। सांसद मस्त ने कहा कि बाबा साहब ने समाज से छूआछूत और भेदभाव आदि को मिटाया तथा लोगों में समरसता की भावना पैदा किया।
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कलेक्ट्रेट स्थित अंबेडकर संस्थान में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 131 वी जयंती मनाई गई। शुभारंभ एस प्रताप वैद्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद बुद्ध वंदना व गौतम बुद्ध, डॉक्टर आंबेडकर साहब के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित किया गया। वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त रखते हुए कहा कि बाबा साहब डॉक्टर आंबेडकर ने भारतीय संविधान में राष्ट्रीय एकता और अखंडता तथा समतामूलक समाज की स्थापना पर विशेष बल दिया है। भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था व सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध पूरा जीवन संघर्ष में बिताया। उन्होंने समाज में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और गैर बराबरी में समानता लाने के लिए जीवन पर्यंत कार्य किया। दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए भी कार्य किया। श्रीराम सरगम, शंभू राजभर व बिकल बलियावी अपने गीतों के माध्यम से बाबा साहब द्वारा किए गए कार्यों को प्रस्तुत किया। इस मौके पर विजय शंकर, प्रभुनाथ, वकील राम, आरडी गौतम, वीर बहादुर, छोटेलाल, लक्ष्मीनारायण चौहान, राजन कनौजिया, गौरी शंकर राम, स्वामीनाथ आदि रहे।
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बाबा साहब का संघर्ष ही संविधान में उतारा गया: रमापतिराम त्रिपाठी
बलिया। टाउनहाल के सभागार में गुरुवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर समाजिक समरसता दिवस विचार संगोष्ठी का आयोजन भारतीय जनता पार्टी द्वारा किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद रमापतिराम त्रिपाठी व विशिष्ट अतिथि सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बाबा साहब के चित्र पर दीप प्रज्वलित व पुष्पांजलि अर्पित कर किया। जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि व विधायक केतकी सिंह का अंगवस्त्रम से स्वागत किया।
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संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि बाबा साहब का संघर्ष ही भारतीय संविधान में उतारा गया है। हमारा संविधान समाजिक समरसता एंव सदभाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है। समरसता हमारी संस्कृति का मूल आधार है। यह सभी धर्मों ,विचारों और समाज को एकता के सूत्र में पिरोती है। कहा कि हम जिस क्षेत्र में भी रहे वहां समरसता का भाव स्थापित करें। सांसद मस्त ने कहा कि बाबा साहब ने समाज से छूआछूत और भेदभाव आदि को मिटाया तथा लोगों में समरसता की भावना पैदा किया।