{"_id":"593ed36c1126f4c90b8b4c14","slug":"do-not-make-the-bridge-then-you-will-have-to-resort-to-boat","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं बना पुल, फिर लेना होगा नाव का सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं बना पुल, फिर लेना होगा नाव का सहारा
ballia
Updated Mon, 12 Jun 2017 11:16 PM IST
विज्ञापन
गंगा में बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैरिया के उत्तरी दियरांचल के गोपालनगर, बशिष्ठनगर, शिवाल, मानगढ़ के करीब 40 हजार आबादी को मुख्यमार्ग से जोड़ने के लिए करीब 13 करोड़ की लागत से बनने वाला राम बालक बाबा सेतु का निर्माण कार्य का समय सीमा सेतु निगम ने मार्च 2018 तय किया है। ऐसे में अगर घाघरा में बाढ़ आई तो निष्प्रयोज्य रामबालक बाबा सेतु का एप्रोच कटना तय है, जिससे दियारावासियों को मुख्य मार्ग से जुड़ने के लिए एक बार फिर नाव का ही सहारा लेना तय माना जा रहा है।
वर्ष 2010-11 में सेतु निगम द्वारा करीब चार करोड़ के लागत से बनाया गया पुल घाघरा नदी के वेग को नहीं सह सका। जिससे उसी वर्ष चार पाया का बना पुल बैंड हो गया, पुल को निस्प्रयोज घोषित करना पड़ा था। अब दिसंबर 2015 में सेतु निगम ने आठ पाए का पुल छह करोड़ 71 लाख 58 हजार के लागत से निर्माण करा रहा है।
हालांकि इस पुल के निर्माण में भी दियारावासी ने मानक के अनदेखी कर लूट खसोट का आरोप लगाया है। पुल के निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य शासन द्वारा वर्ष 2017 दिया गया था, लेकिन धीमी गति से निर्माण कार्य होने के कारण एक वर्ष निर्मण कार्य पूरा करने की सीमा बढ़ा दिया गया है। वहीं इस पुल के एप्रोच निर्माण पीडब्लूडी द्वारा छह करोड़ की लागत से किया जाना है।
विज्ञापन
पुल का पिलर लगभग बनकर तैयार है, सेतु निगम के एई जी के मित्तल ने बताया कि मार्च 2018 में पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। मौके पर जेई आरएन सिंह मौजूद रहे। वहीं पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता आरके बाजपेई ने कहा कि सेतुनिगम के निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही एप्रोच बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा और जब उनका काम पूरा होगा तो साथ मे ही हमारा काम पूरा हो जाएगा।
दो-दो बार क्षतिग्रस्त हो चुका पुल
बैरिया। उत्तरी दियरांचल को मुख्यमार्ग से जोड़ने के लिए तीसरी बार करीब 13 करोड़ की लागत से निर्माण हो रहा है, सबसे पहले तत्कालीन विधायक भरत सिंह ने वर्ष 2001 में पूर्वांचल निधि से 21 लाख 96 हजार की लागत से जिला पंचायत के कार्यदायी संस्था से बनवाया था, लेकिन वर्ष 2002 में घाघरा नदी के प्रलयकारी बाढ़ में पुल बह गया, इसके बाद दियारावासियों की मांगों पर तत्कालीन एमएलसी स्व. विक्रमादित्य पांडेय की पहल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पुल निर्माण करने की घोषणा की थी।
करीब चार करोड़ की लागत से सेतुनिगम ने पुल का निर्माण कार्य पूरा किया। लेकिन पुल वर्ष 2010-11 में घाघरा के तीब्र बाढ़ को सहन नहीं कर सका। पुल बैंड हो गया, जिससे जांच में पुल को निष्प्रयोज्य घोषित करना पड़ा।
विज्ञापन
वर्ष 2010-11 में सेतु निगम द्वारा करीब चार करोड़ के लागत से बनाया गया पुल घाघरा नदी के वेग को नहीं सह सका। जिससे उसी वर्ष चार पाया का बना पुल बैंड हो गया, पुल को निस्प्रयोज घोषित करना पड़ा था। अब दिसंबर 2015 में सेतु निगम ने आठ पाए का पुल छह करोड़ 71 लाख 58 हजार के लागत से निर्माण करा रहा है।
विज्ञापन
हालांकि इस पुल के निर्माण में भी दियारावासी ने मानक के अनदेखी कर लूट खसोट का आरोप लगाया है। पुल के निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य शासन द्वारा वर्ष 2017 दिया गया था, लेकिन धीमी गति से निर्माण कार्य होने के कारण एक वर्ष निर्मण कार्य पूरा करने की सीमा बढ़ा दिया गया है। वहीं इस पुल के एप्रोच निर्माण पीडब्लूडी द्वारा छह करोड़ की लागत से किया जाना है।
विज्ञापन
पुल का पिलर लगभग बनकर तैयार है, सेतु निगम के एई जी के मित्तल ने बताया कि मार्च 2018 में पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। मौके पर जेई आरएन सिंह मौजूद रहे। वहीं पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता आरके बाजपेई ने कहा कि सेतुनिगम के निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही एप्रोच बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा और जब उनका काम पूरा होगा तो साथ मे ही हमारा काम पूरा हो जाएगा।
दो-दो बार क्षतिग्रस्त हो चुका पुल
बैरिया। उत्तरी दियरांचल को मुख्यमार्ग से जोड़ने के लिए तीसरी बार करीब 13 करोड़ की लागत से निर्माण हो रहा है, सबसे पहले तत्कालीन विधायक भरत सिंह ने वर्ष 2001 में पूर्वांचल निधि से 21 लाख 96 हजार की लागत से जिला पंचायत के कार्यदायी संस्था से बनवाया था, लेकिन वर्ष 2002 में घाघरा नदी के प्रलयकारी बाढ़ में पुल बह गया, इसके बाद दियारावासियों की मांगों पर तत्कालीन एमएलसी स्व. विक्रमादित्य पांडेय की पहल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने पुल निर्माण करने की घोषणा की थी।
करीब चार करोड़ की लागत से सेतुनिगम ने पुल का निर्माण कार्य पूरा किया। लेकिन पुल वर्ष 2010-11 में घाघरा के तीब्र बाढ़ को सहन नहीं कर सका। पुल बैंड हो गया, जिससे जांच में पुल को निष्प्रयोज्य घोषित करना पड़ा।