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रुचि से कला को करें विकसित
अमर उजाला ब्यूरो बलिया।
Updated Mon, 29 Jun 2015 12:12 AM IST
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कला को हमेशा सजीव रखने के लिए यह जरूरी है कि उसे जीवन के लिए उपयोगी बनाया जाए। जिसका मुख्य उत्तरदायित्व कलाकारों पर है। क्योंकि यही उसे विविध विधाओं द्वारा उसे मूर्त रूप देना होता है। एक माह तक चले कलात्मक विधाओं के प्रशिक्षण शिविर के समापन के मौके पर मुख्य अतिथि एडीएम खेमपाल सिंह ने यह बातें कहीं।
एडीएम ने प्रशिक्षु छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी कला की रूचि के अनुसार ही अपने को विकसित करें और अपने कला को और निखारने का प्रयास करते रहे। कहा कि कलाकार प्रकृति प्रेमी और समाज का पथ प्रदर्शक होता है। इस मौके पर टाउन इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अशोक कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि को माला पहनाकर स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने प्रमुख प्रशिक्षक डा. इफ्तेखार खां की सोच और सेवाओं की सराहना करते हुए उनके कल्पनाशील व्यक्तित्व के प्रति आभार प्रकट किया। वरिष्ठ पत्रकार अशोक ने कहा कि एक कलाकार के भीतर असीम प्रतिभा और संभावनाएं होती है। जिन्हें प्रकट करना और उसे निखारना अति आवश्यक है।
यही नहीं यह भी याद रखना होगा कि कला केवल कला के लिए नहीं। बल्कि जीवन के लिए भी होना चाहिए। कार्यक्रम को युवा कवि उत्कर्ष तिवारी ने काव्य पाठ और ओमप्रकाश तथा सुनीता पाठक ने अपने गायन के माध्यम से चार चांद लगा दिया। रंग मंच के निदेशक आसीफ त्रिवेदी ने प्रशिक्षकों को बधाई दी। कहा कि इन कलामय प्रतिभाओं को जितना ही तराशा जाएगा। उतना ही वे आगे बढ़ेगी। इस मौके पर श्वेता पांडेय, सुरभी पांडेय, हरिशंकर प्रसाद, इरसाद अनवर, राकेश कुमार, स्नेहा, दिव्यशी राय, धीरेंद्र प्रताप को प्रशिक्षण देने में सहयेाग के लिए ड. इफ्तखार खां ने धन्यवाद दिया।
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एडीएम ने प्रशिक्षु छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी कला की रूचि के अनुसार ही अपने को विकसित करें और अपने कला को और निखारने का प्रयास करते रहे। कहा कि कलाकार प्रकृति प्रेमी और समाज का पथ प्रदर्शक होता है। इस मौके पर टाउन इंटर कालेज के प्रधानाचार्य अशोक कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि को माला पहनाकर स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने प्रमुख प्रशिक्षक डा. इफ्तेखार खां की सोच और सेवाओं की सराहना करते हुए उनके कल्पनाशील व्यक्तित्व के प्रति आभार प्रकट किया। वरिष्ठ पत्रकार अशोक ने कहा कि एक कलाकार के भीतर असीम प्रतिभा और संभावनाएं होती है। जिन्हें प्रकट करना और उसे निखारना अति आवश्यक है।
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यही नहीं यह भी याद रखना होगा कि कला केवल कला के लिए नहीं। बल्कि जीवन के लिए भी होना चाहिए। कार्यक्रम को युवा कवि उत्कर्ष तिवारी ने काव्य पाठ और ओमप्रकाश तथा सुनीता पाठक ने अपने गायन के माध्यम से चार चांद लगा दिया। रंग मंच के निदेशक आसीफ त्रिवेदी ने प्रशिक्षकों को बधाई दी। कहा कि इन कलामय प्रतिभाओं को जितना ही तराशा जाएगा। उतना ही वे आगे बढ़ेगी। इस मौके पर श्वेता पांडेय, सुरभी पांडेय, हरिशंकर प्रसाद, इरसाद अनवर, राकेश कुमार, स्नेहा, दिव्यशी राय, धीरेंद्र प्रताप को प्रशिक्षण देने में सहयेाग के लिए ड. इफ्तखार खां ने धन्यवाद दिया।
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