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Ballia News: चेतावनी देने के बाद भी नहीं बढ़ी काम कराने की रफ्तार
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नौरंगा गांव के समीप चल रहा कटानरोधी कार्य।
मझौवां। गंगा नदी के कटान से 49 गांवों की लगभग 42 हजार आबादी को बचाने के लिए बाढ़ खंड की ओ्रर से करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। लेकिन इनकी रफ्तार धीमी है।
नौरंगा, चक्की नौरंगा और दूबे छपरा में चल रही परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों और ठेकेदारों को फटकार लगाते हुए 400 से 500 मजदूर लगाकर दिन-रात अलग-अलग शिफ्टों में कार्य कराने के निर्देश दिए थे।
हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो मजदूरों की संख्या बढ़ाई गई और न ही संसाधनों में अपेक्षित वृद्धि हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार नौरंगा और चक्की नौरंगा परियोजनाओं में करोड़ों रुपये की लागत के बावजूद केवल सात पोकलेन मशीनों और लगभग 90 मजदूरों के भरोसे कार्य कराया जा रहा है।
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गुणवत्ता पर भी उठे सवाल: तटवर्ती ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थलों पर जियो बैग, बोल्डर, लोहे की जाली और रेत की भारी कमी है। नौरंगा में 2600 मीटर क्षेत्र में 18 कटर तथा 2300 मीटर में पार्कोंपाइन विधि से सुरक्षा कार्य होना है, लेकिन अब तक 50 मीटर कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। संवाद
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नौरंगा, चक्की नौरंगा और दूबे छपरा में चल रही परियोजनाओं में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिकारियों और ठेकेदारों को फटकार लगाते हुए 400 से 500 मजदूर लगाकर दिन-रात अलग-अलग शिफ्टों में कार्य कराने के निर्देश दिए थे।
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हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक न तो मजदूरों की संख्या बढ़ाई गई और न ही संसाधनों में अपेक्षित वृद्धि हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार नौरंगा और चक्की नौरंगा परियोजनाओं में करोड़ों रुपये की लागत के बावजूद केवल सात पोकलेन मशीनों और लगभग 90 मजदूरों के भरोसे कार्य कराया जा रहा है।
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गुणवत्ता पर भी उठे सवाल: तटवर्ती ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थलों पर जियो बैग, बोल्डर, लोहे की जाली और रेत की भारी कमी है। नौरंगा में 2600 मीटर क्षेत्र में 18 कटर तथा 2300 मीटर में पार्कोंपाइन विधि से सुरक्षा कार्य होना है, लेकिन अब तक 50 मीटर कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। संवाद