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करोड़ों के गोलमाल के जांच में हो रही लीपापोती!
ballia
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:37 PM IST
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जांच
- फोटो : demopic
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बलिया। नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली स्थित प्रांतीय सीमा पर करोड़ों के राजस्व के गोलमाल के मामले में रेंजर समेत तीन वनकर्मियों को हटाया गया और जांच शुरु की गई। लेकिन करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी जांच अधर में लटकी है। यह कार्रवाई ‘अमर उजाला’ के खुलासा के बाद और राज्यमंत्री की ओर से दिए निर्देश पर हुई थी।
कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में वन विभाग के कई आला अफसर भी फंस सकते है, लिहाजा मामले में लीपापोती के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूल करने के लिए प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया।
हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के चलते चेकपोस्ट समाप्त होने पर वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती कर बिहार से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा।
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12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद वन विभाग ने प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया लेकिन माफियाओं ने अपना कारोबार छोटे वाहनों से जारी रखा। प्रवर्तन दल हटाने पर गैर प्रंात से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा। इस दौरान वनकर्मियों ने राजस्व वसूली न करके करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया।
इसका खुलासा अमर उजाला के करने और इसी बीच क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री के निर्देश पर डीएफओ ने फेफना के रेंजर सत्येन्द्र सिंह जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया और वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया। डीएफओ ने बताया था कि मामले की जांच शुरु कर दी गई है लेकिन एक सप्ताह बाद भी जांच को लेकर कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है। सूत्रों की मानें तो जांच में विभाग के कई बड़े अफसरों की भी गर्दन फंस सकती है, लिहाजा विभाग मामले में लीपापोती कर सकता है।
प्रांतीय सीमा पर जारी है मनमानी
बलिया। एक ओर प्रांतीय सीमा पर हुए करोड़ों के गोलमाल में तीन वनकर्मियों को हटाकर जांच की जा रही है वहीं दूसरी इसी सीमा पर तैनात नए वनकर्मियों का %खेल’ भी बदस्तूर जारी है। ग्रामीणों की मानें तो शाम ढलते ही बिहार से लाल बालू लाने का दौर शुरु हो जाता है जो अगले दिन भोर तक चलता है, जबकि विभाग के दस्तावेजों में 15 से 20 वाहन ही बिहार की ओर से आते हैं जिससे जुर्माना वसूल किया जाता है। फेफना रेंज के रेंजर पीएन राय ने बताया कि एक सप्ताह में औसत प्रतिदिन 22 हजार राजस्व की वसूली की गई है।
राजस्व के गोलमाल के मामले में तीन वनकर्मियों को हटाने के बाद जांच शुरु की गई है। इसके लिए दो सदस्यीय टीम बनाई गई है और जांच चल रही है। टीम की ओर से रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया
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कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में वन विभाग के कई आला अफसर भी फंस सकते है, लिहाजा मामले में लीपापोती के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूल करने के लिए प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया।
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हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के चलते चेकपोस्ट समाप्त होने पर वन विभाग की ओर से प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती कर बिहार से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा।
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12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद वन विभाग ने प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया लेकिन माफियाओं ने अपना कारोबार छोटे वाहनों से जारी रखा। प्रवर्तन दल हटाने पर गैर प्रंात से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा। इस दौरान वनकर्मियों ने राजस्व वसूली न करके करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया।
इसका खुलासा अमर उजाला के करने और इसी बीच क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री के निर्देश पर डीएफओ ने फेफना के रेंजर सत्येन्द्र सिंह जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया और वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया। डीएफओ ने बताया था कि मामले की जांच शुरु कर दी गई है लेकिन एक सप्ताह बाद भी जांच को लेकर कोई खास प्रगति नहीं हो सकी है। सूत्रों की मानें तो जांच में विभाग के कई बड़े अफसरों की भी गर्दन फंस सकती है, लिहाजा विभाग मामले में लीपापोती कर सकता है।
प्रांतीय सीमा पर जारी है मनमानी
बलिया। एक ओर प्रांतीय सीमा पर हुए करोड़ों के गोलमाल में तीन वनकर्मियों को हटाकर जांच की जा रही है वहीं दूसरी इसी सीमा पर तैनात नए वनकर्मियों का %खेल’ भी बदस्तूर जारी है। ग्रामीणों की मानें तो शाम ढलते ही बिहार से लाल बालू लाने का दौर शुरु हो जाता है जो अगले दिन भोर तक चलता है, जबकि विभाग के दस्तावेजों में 15 से 20 वाहन ही बिहार की ओर से आते हैं जिससे जुर्माना वसूल किया जाता है। फेफना रेंज के रेंजर पीएन राय ने बताया कि एक सप्ताह में औसत प्रतिदिन 22 हजार राजस्व की वसूली की गई है।
राजस्व के गोलमाल के मामले में तीन वनकर्मियों को हटाने के बाद जांच शुरु की गई है। इसके लिए दो सदस्यीय टीम बनाई गई है और जांच चल रही है। टीम की ओर से रिपोर्ट मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया