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लगातार बारिश व तरसोत के पानी से 100 एकड़ से अधिक की फसल हुई चौपट

Fri, 14 Aug 2020 10:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2020 10:39 PM IST
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Crop of more than 100 acres due to continuous rain
जयप्रकाश नगर। लगातार बारिश व नदियों का पानी बढ़ने घटने के कारण तरसोत के पानी से क्षेत्र में बोई गई मक्का, ज्वार, बाजरा की फसल प्रभावित हो गई है।
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बकुल्हा संसार टोला बंधे के भीतर करीब पांच किमी की दूरी में विभिन्न मौजे के लगभग 100 एकड़ से ज्यादा खेतों की फसल चौपट हो गई है। एक ओर बीएसटी बंधे के बाहर सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके की फसल डूबकर नष्ट हो गई है वहीं ऊपरी क्षेत्र के खेतों में तरसोत का पानी भरने से फसलें चौपट हो गई हैं। इसके कारण सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारा को लेकर हो गई है। पानी में डूबे फसल को चारा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि डूबे फसलों को खिलाने से पशुओं के रोगी होने की संभावना रहती है। इसके चलते किसान काफी परेशान हैं। क्षेत्र के शंकर नगर प्लाट व आसपास केले की खेती होती है, इन खेतों में भी तरसोत का पानी अब नुकसान पहुंचा रहा है। यदि तरसोत के पानी जल्द नहीं निकला तो फसल का नष्ट होना तय है।
श्रीप्रकाश ने कहा कि हर साल से अधिक बारिश होने व खेतों में पानी लग जाने के कारण फसल नष्ट हो गई है। इसमें अन्न उत्पादन की आशा समाप्त हो गई है। पिंटू सिंह ने कहा कि बीएसटी बंधे के बाहर के फसल को सरयू नदी का पानी तो भीतर तरसोत के पानी से अधिकतर खेतों में जलभराव हो गया है। इसके चलते फसल चौपट हो गई है। शिवदयाल यादव ने कहा कि बाढ़ व तरसोत के पानी से फसल नुकसान हो चुकी है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं को लेकर है क्योंकि इस क्षेत्र में मक्का व ज्वार की फसल को हरा चारा के रूप में भी इस्तेमाल होता है। पुरेंद्र पांडेय ने कहा कि बाढ़ व तरसोत के पानी से किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। अन्न के उत्पादन में कमी तो होगी ही पशुओं के चारा का भी संकट हो गया है। - प्रभुनाथ गोंड
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मैं केले की खेती किया हूं जो अतिवृष्टि व तरसोत का पानी लगने के कारण केले के पौधा सूखने लगे हैं। यदि तरसोत का पानी खेतों में लगा रहा तो हमारी पूंजी ही टूट जाएगी। शिवकुमार यादव ने कहा कि क्षेत्र के सैकड़ों एकड़ की फसल हर साल बर्बाद होती है पर इसके एवज में फूटी कौड़ी भी हम किसानों को मुआवजा के नाम पर सरकार नहीं देती। अधिकारियों को इसका सर्वे कराकर किसानों को आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
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