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दिहाड़ी मजूदरों के सामने संकट, घर जा रहे पैदल

Thu, 07 May 2020 09:42 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 09:42 PM IST
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Crisis in front of daily lives, going home on foot
मध्यप्रदेश के इटारसी से पैदल ही मजफ्फरपुर के लिए निकले नहर बनाने वाले मजदूर। - फोटो : BALLIA
बैरिया। तीन दिनों तक मध्य प्रदेश के इटारसी में भूखे-प्यासे रहने के बाद बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए 45 मजदूर पैदल ही चल दिए। बैरिया के रास्ते बिहार की सीमा पर स्थित मांझी पुल पर पहुंच गए। सभी मजदूरों का भूख-प्यास से बुरा हाल था। लगभग 700 किमी के पैदल यात्रा करने के कारण वे काफी थक गए थे। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद तक रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे पैदल आए। वहां से सड़क मार्ग से बैरिया पहुंचे हैं। मजदूरों में अखिलेश कुमार, सिकंदर कुमार, छोटू, मिथिलेश, धनंजय आदि ने बताया कि हम लोग मुजफ्फरपुर जनपद के कांटी थाना अंतर्गत तलवारी घाट के रहने वाले हैं। मध्य प्रदेश के इटारसी में नहर बनाने का काम कर रहे थे। 10 दिनों से ठेकेदार ने पैसा देना बंद कर दिया। मकान मालिक ने घर खाली करा दिया, तीन दिनों तक पैसे की प्रतीक्षा में खुले आसमान में नहर के पटरियों पर ही रात गुजारी लेकिन ठेकेदार अचानक गायब हो गया और फिर उसका पता नहीं चल पाया। इसलिए हम लोग पैदल ही अपने घरों के लिए चल दिए।
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बैरिया। लॉकडाउन के चलते गैर राज्यों के प्रवासी मजदूरों पर सिर छिपाने से लेकर निवाला जुटाने तक का संकट हो गया है। इससे तंग आकर प्रवासी मजदूर पैदल ही अपनी गांव की ओर चल दे रहे हैं। पैदल यात्रा करने वाले प्रवासी मजदूरों का रात्रि विश्राम सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर ही होता है। यह मजदूर बिस्किट व चूरा खाकर दिन-दिन भर पैदल चल रहे हैं। गाजीपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे पटरी का काम करने वाले 50 दिहाड़ी मजदूर बिहार के कटिहार पैदल ही गए। जबकि बिहार के छपरा से कई मजदूर चंदौली की ओर पैदल गए। गाजीपुर अंतर्गत नन्दगंज रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले मजदूर राकेश कुमार सिंह, निधि सिंह, प्रदीप सिंह, राणा कुमार, गोपी ऋषि ने बताया कि हम लोग रेलवे ठेकेदार के यहां दिहाड़ी पर काम करते हैं। कई दिनों तक लॉकडाउन खुलने का इंतजार किया गया लेकिन लॉकडाउन खुलता नहीं दिख रहा है जिससे काम भी बंद हो गया है। इसके कारण वह पैदल की घर जाने को मजबूर हैं।
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