{"_id":"c6306638064fdfe5951be9c54b9816a6","slug":"the-police-beat-the-suits-loaded-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस ने पहले पीटा फिर मुकदमे भी लाद दिए ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पुलिस ने पहले पीटा फिर मुकदमे भी लाद दिए
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Sat, 31 Oct 2015 11:37 PM IST
विज्ञापन
सिकंदरपुर थाने के चकखान गांव में शनिवार को अचानक उदासी छा गई। एक तरफ जहां पांच साल की मासूम की मौत से परिवार के लोगों में रूदन-क्रंदन जारी रहा।
वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार के न्याय के लिए सड़क पर उतरे लोगों को न केवल पुलिस की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा, बल्कि उन पर मुकदमे भी लाद दिए गए। जिससे परिवार में दहशत और उदासी है। गांव के दर्जनों परिवार के लोग घर छोड़कर फरार हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण धरना और चक्काजाम चल रहा था। लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती की और लाठी-डंडों से पीटकर दर्जनभर से अधिक लोगों को चुटहिल कर दिया। इतना ही नहीं कई पुलिस कर्मी भी हाथ में ईंट-पत्थर लेकर जनता पर पथराव करने से पीछे नहीं रहे।
मारने -पीटने के बाद पीड़ितों को मेडिकल मुआयना तक भी नहीं कराने दिया गया। उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर उन्हें अन्यत्र भागने और इलाज कराने के लिए भी मजबूर किया गया है। उधर चकखान गांव के साथ ही सिकंदरपुर कस्बे में भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। घटना के बाद बाजार की कुछ दूकानें बंद रहीं।
विज्ञापन
दूकानदार, समाजसेवी तथा इलाके के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की। कहा कि पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया होता तो मामला इतना तूल नहीं पकड़ता। पुलिस की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से लोग आहत हैं। लोगों का कहना है कि आला अफसरों ने आम जनता के साथ न्याय नहीं किया तो आंदोलन और तेज होगा और उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
विज्ञापन
वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार के न्याय के लिए सड़क पर उतरे लोगों को न केवल पुलिस की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा, बल्कि उन पर मुकदमे भी लाद दिए गए। जिससे परिवार में दहशत और उदासी है। गांव के दर्जनों परिवार के लोग घर छोड़कर फरार हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण धरना और चक्काजाम चल रहा था। लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती की और लाठी-डंडों से पीटकर दर्जनभर से अधिक लोगों को चुटहिल कर दिया। इतना ही नहीं कई पुलिस कर्मी भी हाथ में ईंट-पत्थर लेकर जनता पर पथराव करने से पीछे नहीं रहे।
विज्ञापन
मारने -पीटने के बाद पीड़ितों को मेडिकल मुआयना तक भी नहीं कराने दिया गया। उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर उन्हें अन्यत्र भागने और इलाज कराने के लिए भी मजबूर किया गया है। उधर चकखान गांव के साथ ही सिकंदरपुर कस्बे में भी पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। घटना के बाद बाजार की कुछ दूकानें बंद रहीं।
विज्ञापन
दूकानदार, समाजसेवी तथा इलाके के नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की। कहा कि पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया होता तो मामला इतना तूल नहीं पकड़ता। पुलिस की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई से लोग आहत हैं। लोगों का कहना है कि आला अफसरों ने आम जनता के साथ न्याय नहीं किया तो आंदोलन और तेज होगा और उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।