{"_id":"74aadedb8ec726fd40c2e02029d9f0ec","slug":"hanging-a-murder-case-four-to-life-imprisonment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या मामले में एक को फांसी, चार को उम्रकैद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हत्या मामले में एक को फांसी, चार को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Wed, 06 May 2015 11:08 PM IST
विज्ञापन
हत्या के एक मामले में एडीजे तृतीय कैप्टन डीपीएन सिंह की अदालत ने बुधवार को एक व्यक्ति को फांसी और चार को उम्र कैद की सजा सुनाई। उम्रकैद की सजा पाने वालों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली थानाक्षेत्र के अजिजपुर निवासी रामध्यान (26) के भतीजे शत्रुघ्न यादव ने 15 अगस्त 2006 को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में उसने बताया था कि उसके चाचा रामध्यान की शादी नगरा थानाक्षेत्र के सिसवार निवासी होसिला देवी के साथ हुई थी।
होसिला देवी अक्सर अपने गांव के मुन्ना राजभर से मिलती थी और फोन पर बातचीत करती थी। रामध्यान इसका विरोध करते थे। 10 अगस्त 2006 को होसिला देवी ने रामध्यान को अपने मायके सिसवार बुलाया। इसके बाद चाचा लौटकर नहीं आए।
विज्ञापन
11 अगस्त को उनका क्षत-विक्षत शव तिराहीपुर मोड़ के समीप मिला। घरवालों ने शव की शिनाख्त की। इस मामले में पुलिस ने होसिला देवी, रामजीत यादव, अवधेश यादव, दिनेश यादव और मुन्ना राजभर के खिलाफ धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश कैप्टन डीपीएन सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें मामले को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखते हुए मुख्य आरोपी मुन्ना राजभर को फांसी की सजा सुनाई।
साथ ही चार आरोपियों मृतक की पत्नी होसिला देवी, रामजीत यादव, दिनेश यादव तथा अवधेश यादव को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। रामजीत यादव, दिनेश यादव और अवधेश मुख्य आरोपी के साथी हैं। अभियोजन की ओर से एडीजीसी विजय बहादुर यादव तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आरडी सिंह तथा अरविंद सिंह ने तर्क प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली थानाक्षेत्र के अजिजपुर निवासी रामध्यान (26) के भतीजे शत्रुघ्न यादव ने 15 अगस्त 2006 को हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में उसने बताया था कि उसके चाचा रामध्यान की शादी नगरा थानाक्षेत्र के सिसवार निवासी होसिला देवी के साथ हुई थी।
विज्ञापन
होसिला देवी अक्सर अपने गांव के मुन्ना राजभर से मिलती थी और फोन पर बातचीत करती थी। रामध्यान इसका विरोध करते थे। 10 अगस्त 2006 को होसिला देवी ने रामध्यान को अपने मायके सिसवार बुलाया। इसके बाद चाचा लौटकर नहीं आए।
विज्ञापन
11 अगस्त को उनका क्षत-विक्षत शव तिराहीपुर मोड़ के समीप मिला। घरवालों ने शव की शिनाख्त की। इस मामले में पुलिस ने होसिला देवी, रामजीत यादव, अवधेश यादव, दिनेश यादव और मुन्ना राजभर के खिलाफ धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश कैप्टन डीपीएन सिंह की अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें मामले को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखते हुए मुख्य आरोपी मुन्ना राजभर को फांसी की सजा सुनाई।
साथ ही चार आरोपियों मृतक की पत्नी होसिला देवी, रामजीत यादव, दिनेश यादव तथा अवधेश यादव को आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। रामजीत यादव, दिनेश यादव और अवधेश मुख्य आरोपी के साथी हैं। अभियोजन की ओर से एडीजीसी विजय बहादुर यादव तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता आरडी सिंह तथा अरविंद सिंह ने तर्क प्रस्तुत किए।