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दहेज हत्या में चार को उम्र कैद
अमर उजाला ब्यूरो बलिया
Updated Thu, 11 Feb 2016 09:09 PM IST
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दहेज हत्या कर शव गायब करने के एक मामले में गुरुवार को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पति समेत चार आरोपियों पर दोष साबित पाया। इस मामले में कोर्ट ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय नरेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने की।
अभियोजन के मुताबिक हल्दी थाना क्षेत्र के नेमछपरा निवासी प्रेमशंकर तिवारी ने 20 नवंबर, 2005 को थाने में प्रार्थना पत्र दिया था। बताया था कि उसकी बेटी रिचा की शादी सहतवार थाना क्षेत्र के मंदी राय के टोला निवासी अशोक तिवारी के साथ 14 मई, 2004 को हुई थी।
शादी के बाद से ससुराल वाले उसकी बेटी से 50 हजार नकद, बाइक और फ्रीज की मांग करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 18 नवंबर, 2005 को मिट्टी तेल उड़ेल कर उसको मार डाला। आरोपियों के प्रभाव के चलते थाने में पुलिस ने तहरीर दर्ज नहीं की थी। इससे क्षुब्ध होकर कोर्ट से गुहार लगाया था।
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कोर्ट के आदेश पर सहतवार थाने में मृतका के पति अशोक तिवारी, ससुर दीनानाथ, सास रामदुलारी देवी, जेठानी निर्माला देवी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप पत्र प्रेषित होनेे के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सभी को दोषी पाया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी निर्भय नारायण सिंह और बचाव पक्ष से अरुण कुमार शुक्ल ने पैरवी किया।
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अभियोजन के मुताबिक हल्दी थाना क्षेत्र के नेमछपरा निवासी प्रेमशंकर तिवारी ने 20 नवंबर, 2005 को थाने में प्रार्थना पत्र दिया था। बताया था कि उसकी बेटी रिचा की शादी सहतवार थाना क्षेत्र के मंदी राय के टोला निवासी अशोक तिवारी के साथ 14 मई, 2004 को हुई थी।
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शादी के बाद से ससुराल वाले उसकी बेटी से 50 हजार नकद, बाइक और फ्रीज की मांग करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 18 नवंबर, 2005 को मिट्टी तेल उड़ेल कर उसको मार डाला। आरोपियों के प्रभाव के चलते थाने में पुलिस ने तहरीर दर्ज नहीं की थी। इससे क्षुब्ध होकर कोर्ट से गुहार लगाया था।
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कोर्ट के आदेश पर सहतवार थाने में मृतका के पति अशोक तिवारी, ससुर दीनानाथ, सास रामदुलारी देवी, जेठानी निर्माला देवी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप पत्र प्रेषित होनेे के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सभी को दोषी पाया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी निर्भय नारायण सिंह और बचाव पक्ष से अरुण कुमार शुक्ल ने पैरवी किया।