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इओडब्लू ने दवा घोटाले की जांच को मांगा विवरण
Updated Wed, 25 Jul 2018 12:24 AM IST
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बलिया। जिला अस्पताल में बीते सालों में हुए दवा घोटाले की जांच को लेकर सीएमओ पर शासन से सख्ती बरती जा रही है। दवा आपूर्ति का विवरण मांगा जा रहा है। जिसे अब तक सीएमओ की तरफ से नहीं भेजा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के त्रैमासिक लेखा जोखा उपलब्ध नहीं कराने पर मिशन निदेशक ने सीएमओ को चेतावनी भी जारी किया है। इस मामले में पूर्व में यहां तैनात रहे सीमएओ और सीएमएस भी जांच के दायरे में हैं।
बताया जाता है कि वर्ष 2004-05 व 2005-06 में प्रदेश भर में एनएचएम के तहत अरबों का दवा घोटाला सामने आया था। इसमें यूपीडीपीएल की नकली दवा को मुख्य औषधि भंडार से सीएमओ, सीएमएस व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया गया था। इस मामले की जांच शासन ने अब ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) को दे दी है। जांच को लेकर ईओडब्लू ने सीएमओ से इस बाबत दवा की आपूर्ति के संबंध में पूरा ब्योरा तलब किया है। ईओडब्लू ने सीएमओ से यूपीडीपीएल या उसके अधिकृत वितरकों से दवा खरीदे जाने का विवरण, यूपीडीपीएल के आदेश की प्रति, भुगतान का विवरण, दवा का नाम, दर, दवा की मात्रा, फर्म व कंपनी का नाम आदि का विवरण भी मांगा है। ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) ने वर्ष 2004-05 व 2005-06 में तैनात रहे सीएमओ व सीएमएस का नाम भी मांगा है। बताया जाता जाता है कि जिले में भी करोड़ों की दवा की खरीद की गई थी और अब इसका पिटारा खुलने पर कई सीएमओ व सीएमएस का गला फंस सकता है। उधर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं के लागू करने में लापरवाही पर मिशन निदेशक पंकज कमार ने सीएमओ कार्यालय के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बताया है कि अप्रैल से जुलाई तक चार माह के लिए कुल 3972.50 लाख के आवंटन के सापेक्ष केवल 135.79 लाख ही खर्च किया गया है, इससे साफ है एनएचएम की योजनाओं को पूर्ण रूप से लागू नहीं गया है। मिशन निदेशक ने एनएचएम का त्रैमासिक लेखा जोखा समय से प्रस्तुत नहीं करने पर सीएमओ को भी चेताया है।
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बताया जाता है कि वर्ष 2004-05 व 2005-06 में प्रदेश भर में एनएचएम के तहत अरबों का दवा घोटाला सामने आया था। इसमें यूपीडीपीएल की नकली दवा को मुख्य औषधि भंडार से सीएमओ, सीएमएस व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाया गया था। इस मामले की जांच शासन ने अब ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) को दे दी है। जांच को लेकर ईओडब्लू ने सीएमओ से इस बाबत दवा की आपूर्ति के संबंध में पूरा ब्योरा तलब किया है। ईओडब्लू ने सीएमओ से यूपीडीपीएल या उसके अधिकृत वितरकों से दवा खरीदे जाने का विवरण, यूपीडीपीएल के आदेश की प्रति, भुगतान का विवरण, दवा का नाम, दर, दवा की मात्रा, फर्म व कंपनी का नाम आदि का विवरण भी मांगा है। ईओडब्लू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन) ने वर्ष 2004-05 व 2005-06 में तैनात रहे सीएमओ व सीएमएस का नाम भी मांगा है। बताया जाता जाता है कि जिले में भी करोड़ों की दवा की खरीद की गई थी और अब इसका पिटारा खुलने पर कई सीएमओ व सीएमएस का गला फंस सकता है। उधर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं के लागू करने में लापरवाही पर मिशन निदेशक पंकज कमार ने सीएमओ कार्यालय के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बताया है कि अप्रैल से जुलाई तक चार माह के लिए कुल 3972.50 लाख के आवंटन के सापेक्ष केवल 135.79 लाख ही खर्च किया गया है, इससे साफ है एनएचएम की योजनाओं को पूर्ण रूप से लागू नहीं गया है। मिशन निदेशक ने एनएचएम का त्रैमासिक लेखा जोखा समय से प्रस्तुत नहीं करने पर सीएमओ को भी चेताया है।
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