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आधार के नाम पर वसूली मामले की लीपापोती में जुटा विभाग
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बलिया। सोहांव बीआरसी पर आधार कार्ड बनाने और संशोधन के नाम पर हो रही वसूली का मामला सामने आया तो प्रशासन ने बीआरसी पर संशोधन का कार्य तो बंद करवा दिया लेकिन इसके लिए जिम्मेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में लगता है कि वसूली के खेल में सभी की मिलीभगत है। भले ही मुख्यमंत्री जनता के कल्याण की बात करते हो, लेकिन इसका असर जमीनी स्तर पर देखने को नहीं मिलता। बता दें कि आधार कार्ड बनवाने के नाम पर वसूली का खुलासा होने के बाद से विभाग सतर्क है और लीपापोती में जुटा है। बताया जाता है कि सोहांव में तैनात खंड शिक्षा अधिकारी कुछ समय के अंतराल को छोड़कर डेढ़ दशक से अधिक समय से जमे हुए हैं और इनके कार्यकाल में कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं। इसी क्रम में आधार के नाम पर वसूली भी शामिल है, जिसका खुलासा अमर उजाला ने किया था। चार दिनों पहले सोहांव बीआरसी पर पड़ताल के दौरान सामने आया कि बच्चों और अध्यापकों के लिए आवंटित आधार केंद्र पर खुलेआम बाहरी लोगों के आधार बनाने और संशोधन का कार्य किया जा रहा है। इन कार्यों के लिए अलग-अलग धनराशि की वसूली भी की जा रही है। सच सामने आने के बाद से बाहरी लोगों के लिए किए जा रहे कार्य को अधिकारियों और कर्मचारियों ने बंद करा दिया है। हैरानी की बात है कि पैसे के बदले कभी किसी को कोई रसीद नहीं दी गई। आसपास के लोगों का कहना है कि यहां तैनात खंड शिक्षा अधिकारी डेढ़ दशक से अधिक समय से हैं, जिनका केवल कुछ दिनों के लिए स्थानांतरण होता है और फिर यहीं तैनाती मिल जाती है। लोगों का तो यह भी कहना है कि इनके कार्यकाल में कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं और अधिकारी ने सीमावर्ती शहर बिहार के बक्सर में करोड़ों का साम्राज्य भी खड़ा कर लिया है। लोग बताते हैं कि सोहांव ब्लॉक में 200 से अधिक गैर मान्यता लिए स्कूलों का संचालन किया जाता है जो अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से किया जाता है और यह काली कमाई का बहुत बड़ा जरिया है।
कोट
आधार कार्ड के नाम पर हो रही वसूली मामले की जांच कराकर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - राम आसरे, अपर जिलाधिकारी
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कोट
आधार कार्ड के नाम पर हो रही वसूली मामले की जांच कराकर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - राम आसरे, अपर जिलाधिकारी