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कोर्ट ने मांगा जीजीआईसी बैरिया के स्थिति का व्योरा
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 15 Nov 2016 08:16 PM IST
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राजकीय बालिका इंटर कालेज बैरिया दशकों करीब तीन दशक से प्राथमिक विद्यालय बैरिया में संचालित हो रहा है। लेकिन मानक के हिसाब से न तो शिक्षक है और न ही शिक्षणेत्तर कर्मचारी। वहीं शासन द्वारा धन स्वीकृत करने के बाद भी भवन का निर्माण भी अब तक नहीं सका है। इस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जीजीआईसी बैरिया सहित प्रदेश के अन्य राजकीय विद्यालयों की स्थिति पर रिपोर्ट शासन से प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट के इस आदेश से विभाग रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है।
द्वाबा में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 1988 में बैरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में राजकीय बालिका इंटर कालेज का संचालन शुरू हुआ। लेकिन तीन दशक बीतने के बावजूद भूमि के अभाव में भवन निर्माण नहीं हो सका। काफी मशक्कत के बाद सोनबरसा में भूमि उपलब्ध होने पर शासन ने भवन के लिए धन तो स्वीकृत कर दिया।
लेकिन भवन निर्माण की गति इतनी धीमी है कि तत्काल में इसको तैयार होने की संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं हैं। यही नहीं बैरिया राजकीय विद्यालय में मानक के हिसाब से शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भी तैनाती नहीं की गई है। इसको लेकर गत दिनों इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए शासन से दो माह में जीजीआईसी बैरिया सहित प्रदेश के अन्य राजकीय विद्यालयों के भवन सहित शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की स्थिति के संबंध में पूरा ब्योरा मांगा है। कोर्ट के इस आदेश के बाद शासन राजकीय विद्यालयों के स्थिति का ब्योरा जुटाने में जुट गया है।
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द्वाबा में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 1988 में बैरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में राजकीय बालिका इंटर कालेज का संचालन शुरू हुआ। लेकिन तीन दशक बीतने के बावजूद भूमि के अभाव में भवन निर्माण नहीं हो सका। काफी मशक्कत के बाद सोनबरसा में भूमि उपलब्ध होने पर शासन ने भवन के लिए धन तो स्वीकृत कर दिया।
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लेकिन भवन निर्माण की गति इतनी धीमी है कि तत्काल में इसको तैयार होने की संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं हैं। यही नहीं बैरिया राजकीय विद्यालय में मानक के हिसाब से शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भी तैनाती नहीं की गई है। इसको लेकर गत दिनों इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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जिस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए शासन से दो माह में जीजीआईसी बैरिया सहित प्रदेश के अन्य राजकीय विद्यालयों के भवन सहित शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की स्थिति के संबंध में पूरा ब्योरा मांगा है। कोर्ट के इस आदेश के बाद शासन राजकीय विद्यालयों के स्थिति का ब्योरा जुटाने में जुट गया है।