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प्रमुख घाटों की सफाई
ballia
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:24 AM IST
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गंगा घाट
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदू धर्म शास्त्र में पितरों के तर्पण एवं पिंडदान के लिए अति महत्वपूर्ण पक्ष पितृपक्ष भाद्रपद, शुक्लपक्ष पूर्णिमा कल से प्रारंभ हो रहा है। इसी के मद्देनजर गुरुवार को नगर पालिका द्वारा महावीर घाट, कीनाराम घाट, दरामपुर घाट, शिवरामपुर घाटों पर साफ-सफाई की गई। वहीं, दूसरी ओर नगर के प्रमुख बाजारों में पितृपक्ष को लेकर दूकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई।
पितृपक्ष माह को देखते हुए नगर पालिका की तरफ से शहर के प्रमुख गंगा घाटों पर सफाई के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था कर दी गई थी। कर्मचारियों ने घाटों के अलावा रास्ते की साफ सफाई की। वहीं, स्टेशन चौक, बालेश्वर मंदिर तिराहा, भृगु मंदिर रोड, चौक बाजार में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ गुरुवार की शाम तक लगी रही। पितृपक्ष में सभी हिंदू अपने पितरों को गंगा सहित अन्य तीर्थस्थलों में तर्पण और पिंडदान करते हैं। वहीं गया में पिंडदान करने की परंपरा का निर्वहन करते हैं।पितृपक्ष के प्रथम दिन ही प्रत्येक गांव से अपने स्व. माता-पिता एवं अन्य पितरों को पिंडदान करने के लिए श्रद्धालु गया जाते हैं। पिंडदान करने से पितृदोष की शांति हो जाती है।
पंडित अभय प्रकाश द्विवेदी के अनुसार विशेषकाल और स्थान पर पितरों के नाम से श्रद्धापूर्वक किया गया पिंडदान श्राद्ध कहलाता है और पितृपक्ष का महत्व इसलिए और ज्यादा है कि इस पक्ष में पितर लोक पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक आ जाता है और संबंधित व्यक्ति के पितर आसानी से अपना पिंडदान प्राप्त कर लेते हैं। पंडित द्विवेदी ने बताया कि पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार को अपवित्र भोजन नहीं करना चाहिए तथा संयमित जीवन जीना चाहिए। भोजन में मांस, मछली, मदिरा, प्याज, लहसून, अरूई सहित अन्य रूखे-सूखे भोजन नहीं करना चाहिए। जो लोग पिंडदान करने में सक्षम नहीं है। उन्हें नित्य गंगा या अन्य नदी में अपने पितरों के नाम से तर्पण करना चाहिए।
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पितृपक्ष माह को देखते हुए नगर पालिका की तरफ से शहर के प्रमुख गंगा घाटों पर सफाई के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था कर दी गई थी। कर्मचारियों ने घाटों के अलावा रास्ते की साफ सफाई की। वहीं, स्टेशन चौक, बालेश्वर मंदिर तिराहा, भृगु मंदिर रोड, चौक बाजार में पूजन सामग्री खरीदने वालों की भीड़ गुरुवार की शाम तक लगी रही। पितृपक्ष में सभी हिंदू अपने पितरों को गंगा सहित अन्य तीर्थस्थलों में तर्पण और पिंडदान करते हैं। वहीं गया में पिंडदान करने की परंपरा का निर्वहन करते हैं।पितृपक्ष के प्रथम दिन ही प्रत्येक गांव से अपने स्व. माता-पिता एवं अन्य पितरों को पिंडदान करने के लिए श्रद्धालु गया जाते हैं। पिंडदान करने से पितृदोष की शांति हो जाती है।
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पंडित अभय प्रकाश द्विवेदी के अनुसार विशेषकाल और स्थान पर पितरों के नाम से श्रद्धापूर्वक किया गया पिंडदान श्राद्ध कहलाता है और पितृपक्ष का महत्व इसलिए और ज्यादा है कि इस पक्ष में पितर लोक पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक आ जाता है और संबंधित व्यक्ति के पितर आसानी से अपना पिंडदान प्राप्त कर लेते हैं। पंडित द्विवेदी ने बताया कि पितृपक्ष में प्रत्येक परिवार को अपवित्र भोजन नहीं करना चाहिए तथा संयमित जीवन जीना चाहिए। भोजन में मांस, मछली, मदिरा, प्याज, लहसून, अरूई सहित अन्य रूखे-सूखे भोजन नहीं करना चाहिए। जो लोग पिंडदान करने में सक्षम नहीं है। उन्हें नित्य गंगा या अन्य नदी में अपने पितरों के नाम से तर्पण करना चाहिए।
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