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दावा अधिकरण के फैसलों को न्यायालय की परिधि के बाहर रखना न्याय व्यवस्था की हत्या: रामगोविन्द चौधरीनेता
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बलिया। संपत्ति क्षति दावा अधिकरण के फैसलों को न्यायालय की परिधि से बाहर रखने का सरकार का निर्णय लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। समाजवादी पार्टी इस अधिकरण का हर स्तर पर विरोध करेगी। ये बातें नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने बृहस्पतिवार को टेलीफोन पर अमर उजाला से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्विटर पर यूपी लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली नियमावली 2020 के तहत संपत्ति क्षति दावा अधिकरण के गठन की घोषणा की है। इस अधिकरण के फैसले को न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती है। पीड़ितों को अपनी बेगुनाही का सबूत भी इसी अधिकरण के समक्ष देना होगा। अधिकरण को मिले इस असीम अधिकार का साफ अर्थ है कि उत्तर प्रदेश में अब लोकतंत्र, संविधान और न्याय व्यवस्था का कोई मतलब नहीं है। कहा कि यूपी लोक तथा निजी संपत्ति नियमावली खुद में कानून सम्मत नहीं है। इसके तहत अधिकरण गठित कर उसके निर्णयों को न्यायालयों की परिधि से बाहर रखने का फैसला संविधान के खिलाफ है। जो लोग भी लोकतंत्र, संविधान और भारत की न्याय व्यवस्था में यकीन रखते हैं, उन्हें इस अधिकरण का हर स्तर पर विरोध करना चाहिए।
कहा, उत्तर प्रदेश में सरकार सभी मोर्चे पर फेल है। सूबे में जंगल राज की स्थिति है। अपहरण, हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाओं से लोग सहमे हैं। शासन प्रशासन का काम टेंडर सेटिंग, तैनाती सेटिंग तथा जनता के दोहन तक सीमित रह गया है। निजी संपत्ति नियमावली और अधिकरण के गठन का एक मात्र लक्ष्य प्रतिरोध की आवाजों को कुचलना है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से 1942 में अंग्रेजों ने आजादी की आवाज को कुचलने के लिए शासन, प्रशासन और कानून का दुरुपयोग किया, जिस तरह से आपात काल में कांग्रेसी सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनने के लिए शासन, प्रशासन और कानून का दुरुपयोग किया, ठीक उसी तरह से योगी सरकार भी सूबे में हो रहे लूटपाट, हत्या, रेप, टेंडर सेटिंग, तैनाती सेटिंग, बेरोजगारी और अवैध दोहन के खिलाफ उठ रही विरोध की आवाजों को कुचलने के लिए कानून का हर स्तर पर दुरुपयोग कर रही है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए और समाजवादी पार्टी सदन से लेकर सड़क तक इस काले कानून का विरोध करेगी।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्विटर पर यूपी लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली नियमावली 2020 के तहत संपत्ति क्षति दावा अधिकरण के गठन की घोषणा की है। इस अधिकरण के फैसले को न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती है। पीड़ितों को अपनी बेगुनाही का सबूत भी इसी अधिकरण के समक्ष देना होगा। अधिकरण को मिले इस असीम अधिकार का साफ अर्थ है कि उत्तर प्रदेश में अब लोकतंत्र, संविधान और न्याय व्यवस्था का कोई मतलब नहीं है। कहा कि यूपी लोक तथा निजी संपत्ति नियमावली खुद में कानून सम्मत नहीं है। इसके तहत अधिकरण गठित कर उसके निर्णयों को न्यायालयों की परिधि से बाहर रखने का फैसला संविधान के खिलाफ है। जो लोग भी लोकतंत्र, संविधान और भारत की न्याय व्यवस्था में यकीन रखते हैं, उन्हें इस अधिकरण का हर स्तर पर विरोध करना चाहिए।
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कहा, उत्तर प्रदेश में सरकार सभी मोर्चे पर फेल है। सूबे में जंगल राज की स्थिति है। अपहरण, हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाओं से लोग सहमे हैं। शासन प्रशासन का काम टेंडर सेटिंग, तैनाती सेटिंग तथा जनता के दोहन तक सीमित रह गया है। निजी संपत्ति नियमावली और अधिकरण के गठन का एक मात्र लक्ष्य प्रतिरोध की आवाजों को कुचलना है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से 1942 में अंग्रेजों ने आजादी की आवाज को कुचलने के लिए शासन, प्रशासन और कानून का दुरुपयोग किया, जिस तरह से आपात काल में कांग्रेसी सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनने के लिए शासन, प्रशासन और कानून का दुरुपयोग किया, ठीक उसी तरह से योगी सरकार भी सूबे में हो रहे लूटपाट, हत्या, रेप, टेंडर सेटिंग, तैनाती सेटिंग, बेरोजगारी और अवैध दोहन के खिलाफ उठ रही विरोध की आवाजों को कुचलने के लिए कानून का हर स्तर पर दुरुपयोग कर रही है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए और समाजवादी पार्टी सदन से लेकर सड़क तक इस काले कानून का विरोध करेगी।
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