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रसायनिक खाद व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से हो रहा कैंसर में इजाफा : प्रो. त्रिवेदी
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बैरिया। खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशक का अधिक, जंक फूड और तंबाकू का इस्तेमाल करना कैंसर का बड़ा कारण है। इनसे परहेज करने के साथ ही संयमित खान-पान से ही इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। विश्व कैंसर दिवस पर दुर्जनपुर गांव में मंगलवार को अमर उजाला से बातचीत में ये बातें डीएस रिसर्च सेंटर वाराणसी के निदेशक प्रोफेसर अशोक त्रिवेदी ने कहीं।
उन्होंने बताया कि कीटनाशकों के रूप में फसलों पर छिड़के गए रसायन हमारे पेट में पहुंच रहे हैं जिससे बीमारियां के होने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से कैंसर फैल रहा है। इससे बचने की जरूरत है। किसानों को आर्गेनिक खेती करनी चाहिए। डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए जिन रसायनों का प्रयोग किया जाता है, वे लंबे समय के बाद मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। जंक फूड के तौर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने रसायनयुक्त खाद पदार्थों का इतना प्रचार प्रसार किया कि पूरी युवा पीढ़ी इसकी दीवानी हो गई। देश के कई भागों में पाया गया है कि रासायनिक खाद्य और कीटनाशकों का असर भूगर्भ जल पर भी पड़ा है। चिकित्सक कई बार ऐसी दवाओं के सेवन को मजबूर करते हैं जिसकी जरूरत नहीं होती और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। भारत में कई ऐसी दवाओं का प्रयोग धड़ल्ले से किया जाता है जो कई देशों में प्रतिबंधित हैं। भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोगों को एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रयोग से बचने के लिए कहा है लेकिन हैैरानी की बात है कि इन दवाओं को रोकने के लिए उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
कैंसर से बचाव के प्रति किया जागरूक
रतसर। विश्व कैंसर दिवस पर मंगलवार को जनऊ बाबा साहित्यिक संस्था निर्झर की ओर से गोष्ठी हुई। इसमें युवाओं को कैंसर से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। परशुराम युवा मंच के अध्यक्ष सक्षम पांडेय रिशु ने कहा कि युवा तेजी से तंबाकू सेवन कर रहे हैं। भागदौड़ की जिंदगी में तनाव से बचाव के लिए सिगरेट व शराब का सेवन कैंसर का कारक है। जब तक यह युवा जानेंगे नहीं तब तक कैंसर पर लगाम लगना मुश्किल है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि सभी कैंसर के रोकथाम में अपनी भूमिका सुनिश्चित करते हुए लोगों को जागरूक करें। इस मौके पर संस्था के संयोजक धनेश कुमार पाण्डेय, प्रेमनारायन पांडेय, हृदयानंद पांडेय, करीमन राम, आशुतोष उपाध्याय, अवधेश चौबे, अतुल सिंह, शुभम सिंह, नितिश पांडेय, अंचल दूबे आदि रहे। अध्यक्षता श्रीकांत पांडेय एवं संचालन अमन शुक्ला ने किया।
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उन्होंने बताया कि कीटनाशकों के रूप में फसलों पर छिड़के गए रसायन हमारे पेट में पहुंच रहे हैं जिससे बीमारियां के होने का खतरा बढ़ गया है। इसी वजह से कैंसर फैल रहा है। इससे बचने की जरूरत है। किसानों को आर्गेनिक खेती करनी चाहिए। डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए जिन रसायनों का प्रयोग किया जाता है, वे लंबे समय के बाद मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। जंक फूड के तौर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने रसायनयुक्त खाद पदार्थों का इतना प्रचार प्रसार किया कि पूरी युवा पीढ़ी इसकी दीवानी हो गई। देश के कई भागों में पाया गया है कि रासायनिक खाद्य और कीटनाशकों का असर भूगर्भ जल पर भी पड़ा है। चिकित्सक कई बार ऐसी दवाओं के सेवन को मजबूर करते हैं जिसकी जरूरत नहीं होती और वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। भारत में कई ऐसी दवाओं का प्रयोग धड़ल्ले से किया जाता है जो कई देशों में प्रतिबंधित हैं। भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लोगों को एंटीबॉयोटिक दवाओं के प्रयोग से बचने के लिए कहा है लेकिन हैैरानी की बात है कि इन दवाओं को रोकने के लिए उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
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कैंसर से बचाव के प्रति किया जागरूक
रतसर। विश्व कैंसर दिवस पर मंगलवार को जनऊ बाबा साहित्यिक संस्था निर्झर की ओर से गोष्ठी हुई। इसमें युवाओं को कैंसर से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। परशुराम युवा मंच के अध्यक्ष सक्षम पांडेय रिशु ने कहा कि युवा तेजी से तंबाकू सेवन कर रहे हैं। भागदौड़ की जिंदगी में तनाव से बचाव के लिए सिगरेट व शराब का सेवन कैंसर का कारक है। जब तक यह युवा जानेंगे नहीं तब तक कैंसर पर लगाम लगना मुश्किल है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि सभी कैंसर के रोकथाम में अपनी भूमिका सुनिश्चित करते हुए लोगों को जागरूक करें। इस मौके पर संस्था के संयोजक धनेश कुमार पाण्डेय, प्रेमनारायन पांडेय, हृदयानंद पांडेय, करीमन राम, आशुतोष उपाध्याय, अवधेश चौबे, अतुल सिंह, शुभम सिंह, नितिश पांडेय, अंचल दूबे आदि रहे। अध्यक्षता श्रीकांत पांडेय एवं संचालन अमन शुक्ला ने किया।
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