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Ballia News: बारिश नहीं होने से धान की रोपाई पर ब्रेक, अब तक 74.64 फीसदी खेती
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बलिया। करीब एक पखवारा तक रुक-रुक हुई बारिश के बीच जिले में धान की रोपाई में तेजी आई। जिन किसानों ने धान की नर्सरी रोहिणी नक्षत्र में नहीं लगाई थी, वह आर्द्रा नक्षत्र में बारिश के बाद नर्सरी डाली। यह किसान भी करीब एक पखवारा बाद धान की रोपाई की तैयारी में हैं। लेकिन करीब 10 दिनों से बारिश रुक जाने के कारण धान की रोपाई पर ब्रेक लग गया है। अब तक जिले में लक्ष्य के सापेक्ष 74.64 फीसदी धान की रोपाई हुई है। जिले में कुल एक लाख 23127 हेक्टेयर में धान की रोपाई होती है। जिले में अगस्त माह तक रोपाई होती है।
इस वर्ष कृषि विभाग की ओर से खरीफ में कुल 167184 हेेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि वर्ष 2022 में कुल 127412 हेक्टेयर में खरीफ की खेती हुई थी। खरीफ लक्ष्य के सापेक्ष करीब 70 फीसदी खेतों में धान की खेती होती है। आमतौर पर अगेती खेती करने वाले किसान धानों की नर्सरी रोहिणी नक्षत्र में लगाने का काम शुरु कर देते हैं। लेकिन इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र में बारिश नहीं होने के कारण सिंचाई के संसाधन वाले किसान ही धान की नर्सरी लगाए। हालांकि कई क्षेत्रों में धान की नर्सरी आर्द्रा नक्षत्र में लगाई जाती है। देर से ही सही आर्द्रा नक्षत्र के तीन दिन बीतने के बाद शुरू हुई रुक कर लगातार होती रही। इससे धान की खेती को संजीवनी मिली और रोहिणी नक्षत्र के नर्सरी वाले किसान रोपाई भी शुरु कर दिए। कृषि विभाग के अनुसार अबतक लक्ष्य के सापेक्ष 74.64 फीसदी खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है। इसी बीच बीते 10 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण जहां रोपे गए धान के खेतों में दरार पड़ने लगे हैं। वहीं धान की रोपाई पर भी ब्रेक लग गया है।जिन किसानों ने आर्द्रा नक्षत्र में धान की नर्सरी लगाई वह एक पखवारा बाद धान की रोपाई की तैयारी में थे लेकिन बारिश नहीं होने के कारण रोपाई को लेकर हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। किसानों को अभी भी बारिश का इंतजार है क्योंकि जिले में अगस्त महीने के अंत की धान की रोपाई होती है।
सूखे की स्थिति देख किसान चिंतित
रेवती। सूखा की स्थिति के चलते क्षेत्रीय किसान चिंता में हैं। विभिन्न गांवों के किसान खरीफ फसलों की बोआई कर लिया था। लेकिन भीषण गर्मी तथा अवर्षण की स्थिति के कारण क्षेत्र में बोई जाने वाली खरीफ की फसलें खासकर धान तथा मक्का सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। एक से डेढ़ माह पूर्व बोई गई मक्का की फसल जमीन से निकलने के बाद जहां विकसित नहीं हो पा रही हैं वहीं धान की फसल की रोपाई होने के दो सप्ताह के बाद उनकी पत्तियां सूख कर कत्थई होने लगी हैं। किसानों का मानना है कि यदि अनावृष्टि की स्थिति बनी रही तो एक दाना भी घर आ पाएगा इसमें संदेह है। इन दिनों तप रहे मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। धान की फसल को जीवित रखने के लिए सिंचाई करते-करते किसानों का बुरा हाल हो गया है। खेतों की ऊपरी सतह पर चौड़ी चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में खरिका, भाखर, रेवती, दलछपरा, श्रीनगर, चौबेछपरा, छेड़ी, कंचनपुर, केंवा, बेलहरी, मुड़ाडीह, गायघाट, कुशहर, शोभनाथपुर, नैना, कुसौरी, हड़िहां समेत दियारांचल के सभी गांवों के किसानों द्वारा की गई खेती सूख रही है। अलबत्ता जिन किसानों के निजी नलकूप हैं वो तो अपने खेतों में सिंचाई करके फसलों को जीवित रखे हुए हैं लेकिन जिन्हें खरीद कर सिंचाई करनी है उनकी स्थिति दयनीय हो चली है।
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अब तक 35 फीसदी कम हुई बारिश
बलिया। आमतौर पर जून से अगस्त माह तक बरसात का मौसम होता है। इसमें होने वाली बारिश पर खरीफ की फसलें आधारित होती हैं। लेकिन वर्ष मौसम ने दगा दे दिया है। अबतक जिले में 35 फीसदी बारिश कम हुई है। सामान्य तौर पर जिले में एक जून से 26 जुलाई तक कुल 326.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए लेकिन इस अवधि में कुल 212.10 मिलीमीटर ही बारिश हुई है।
किसानों की प्रतिक्रिया:
इस सूखा की स्थिति में अपने धान को बचाने के लिए खेतों में पानी देते देते हालत खराब हो गई है। यदि यही स्थिति रही तो लगता है हिम्मत जवाब दे देगी। बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही है। बिजली कटौती के कारण डीजल चालित पंपों को चलाना पड़ता है जो काफी खर्चीला पड़ता है। - राजेश कुमार पांडेय बड़े
प्रचण्ड गर्मी के चलते फसलें सूखा की चपेट में हैं। एक माह पूर्व बोई गई मक्का की फसल का विकास नहीं होने के कारण उसकी जोताई करनी पड़ी। धान के खेतों में दरार पड़ने लगी है जिसे बचाना मुश्किल हो रहा है। - प्रवीण ओझा
फसल लक्ष्य हेक्टेयर में
धान नर्सरी 8208
धान सामान्य 99127
धान सुगंधित 2000
धान संकर 22000
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धान की रोपाई जिले में अधिकांश भूभाग पर हो चुकी है। बारिश नहीं होने का असर खरीफ की फसलों पर पड़ रहा है। अब भी बारिश हो जाए तो शेष बचे किसान धान की रोपाई कर लेंगे और खरीफ फसलों को लाभ पहुंचेगा। - पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी, बलिया
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इस वर्ष कृषि विभाग की ओर से खरीफ में कुल 167184 हेेक्टेयर में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि वर्ष 2022 में कुल 127412 हेक्टेयर में खरीफ की खेती हुई थी। खरीफ लक्ष्य के सापेक्ष करीब 70 फीसदी खेतों में धान की खेती होती है। आमतौर पर अगेती खेती करने वाले किसान धानों की नर्सरी रोहिणी नक्षत्र में लगाने का काम शुरु कर देते हैं। लेकिन इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र में बारिश नहीं होने के कारण सिंचाई के संसाधन वाले किसान ही धान की नर्सरी लगाए। हालांकि कई क्षेत्रों में धान की नर्सरी आर्द्रा नक्षत्र में लगाई जाती है। देर से ही सही आर्द्रा नक्षत्र के तीन दिन बीतने के बाद शुरू हुई रुक कर लगातार होती रही। इससे धान की खेती को संजीवनी मिली और रोहिणी नक्षत्र के नर्सरी वाले किसान रोपाई भी शुरु कर दिए। कृषि विभाग के अनुसार अबतक लक्ष्य के सापेक्ष 74.64 फीसदी खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है। इसी बीच बीते 10 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण जहां रोपे गए धान के खेतों में दरार पड़ने लगे हैं। वहीं धान की रोपाई पर भी ब्रेक लग गया है।जिन किसानों ने आर्द्रा नक्षत्र में धान की नर्सरी लगाई वह एक पखवारा बाद धान की रोपाई की तैयारी में थे लेकिन बारिश नहीं होने के कारण रोपाई को लेकर हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। किसानों को अभी भी बारिश का इंतजार है क्योंकि जिले में अगस्त महीने के अंत की धान की रोपाई होती है।
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सूखे की स्थिति देख किसान चिंतित
रेवती। सूखा की स्थिति के चलते क्षेत्रीय किसान चिंता में हैं। विभिन्न गांवों के किसान खरीफ फसलों की बोआई कर लिया था। लेकिन भीषण गर्मी तथा अवर्षण की स्थिति के कारण क्षेत्र में बोई जाने वाली खरीफ की फसलें खासकर धान तथा मक्का सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। एक से डेढ़ माह पूर्व बोई गई मक्का की फसल जमीन से निकलने के बाद जहां विकसित नहीं हो पा रही हैं वहीं धान की फसल की रोपाई होने के दो सप्ताह के बाद उनकी पत्तियां सूख कर कत्थई होने लगी हैं। किसानों का मानना है कि यदि अनावृष्टि की स्थिति बनी रही तो एक दाना भी घर आ पाएगा इसमें संदेह है। इन दिनों तप रहे मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। धान की फसल को जीवित रखने के लिए सिंचाई करते-करते किसानों का बुरा हाल हो गया है। खेतों की ऊपरी सतह पर चौड़ी चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में खरिका, भाखर, रेवती, दलछपरा, श्रीनगर, चौबेछपरा, छेड़ी, कंचनपुर, केंवा, बेलहरी, मुड़ाडीह, गायघाट, कुशहर, शोभनाथपुर, नैना, कुसौरी, हड़िहां समेत दियारांचल के सभी गांवों के किसानों द्वारा की गई खेती सूख रही है। अलबत्ता जिन किसानों के निजी नलकूप हैं वो तो अपने खेतों में सिंचाई करके फसलों को जीवित रखे हुए हैं लेकिन जिन्हें खरीद कर सिंचाई करनी है उनकी स्थिति दयनीय हो चली है।
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अब तक 35 फीसदी कम हुई बारिश
बलिया। आमतौर पर जून से अगस्त माह तक बरसात का मौसम होता है। इसमें होने वाली बारिश पर खरीफ की फसलें आधारित होती हैं। लेकिन वर्ष मौसम ने दगा दे दिया है। अबतक जिले में 35 फीसदी बारिश कम हुई है। सामान्य तौर पर जिले में एक जून से 26 जुलाई तक कुल 326.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए लेकिन इस अवधि में कुल 212.10 मिलीमीटर ही बारिश हुई है।
किसानों की प्रतिक्रिया:
इस सूखा की स्थिति में अपने धान को बचाने के लिए खेतों में पानी देते देते हालत खराब हो गई है। यदि यही स्थिति रही तो लगता है हिम्मत जवाब दे देगी। बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही है। बिजली कटौती के कारण डीजल चालित पंपों को चलाना पड़ता है जो काफी खर्चीला पड़ता है। - राजेश कुमार पांडेय बड़े
प्रचण्ड गर्मी के चलते फसलें सूखा की चपेट में हैं। एक माह पूर्व बोई गई मक्का की फसल का विकास नहीं होने के कारण उसकी जोताई करनी पड़ी। धान के खेतों में दरार पड़ने लगी है जिसे बचाना मुश्किल हो रहा है। - प्रवीण ओझा
फसल लक्ष्य हेक्टेयर में
धान नर्सरी 8208
धान सामान्य 99127
धान सुगंधित 2000
धान संकर 22000
धान की रोपाई जिले में अधिकांश भूभाग पर हो चुकी है। बारिश नहीं होने का असर खरीफ की फसलों पर पड़ रहा है। अब भी बारिश हो जाए तो शेष बचे किसान धान की रोपाई कर लेंगे और खरीफ फसलों को लाभ पहुंचेगा। - पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी, बलिया