{"_id":"67a64a18ef024feabc026ad6","slug":"bloody-conflict-is-taking-place-due-to-land-dispute-cases-not-being-resolved-on-time-ballia-news-c-190-1-ana1001-132998-2025-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: भूमि विवाद के मामले समय से नहीं सुलझने से हो रहा खूनी संघर्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: भूमि विवाद के मामले समय से नहीं सुलझने से हो रहा खूनी संघर्ष
विज्ञापन
बलिया। भूमि विवाद के मामले समय से निस्तारण न होने से खूनी संघर्ष में बदल रहे हैं। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव की घटना ने इसे साबित कर दिया है। इन घटनाओं के लिए जहां गंवई वर्चस्व की बात सामने आ रही है। वहीं, इन्हें सरंक्षण देने वाले राजस्व व पुलिस अधिकारियों को लोग उतने ही दोषी मान रहे हैं।
खरीद गांव में चाचा-भतीजे की हत्या और छह से अधिक लोगों के घायल होने की घटना में राजस्व व पुलिस की लापरवाही ही सामने आई है। डीआईजी आजमगढ़ सुनील कुमार से ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस की शिकायत की। इस पर विभाग को चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।
भूमि से संबंधित मामले पहले थाने और तहसील पहुंचते हैं। निचले स्तर के कर्मचारी इसमें लापरवाही बरतते हैं और फिर मामला बिगड़ जाता है। स्थानीय स्तर पर निस्तारण न होने पर मामला न्यायालय पहुंच जाता है। जहां संघर्ष कर पीड़ित स्थगन आदेश तो प्राप्त कर लेता है, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो पाता। ऐसे में पीड़ित पुलिस प्रशासन पर मिलीभगत करने का आरोप लगाता है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में दो संपूर्ण समाधान दिवस पर 257 शिकायतें आईं। इनमें से सिर्फ 21 का समाधान हुआ। थाना समाधान दिवस पर 96 मामले आए, जिसमें 38 का समाधान हो पाया। अन्य मामलों में पीड़ित तहसील व थानों का चक्कर लगा रहे हैं।
विज्ञापन
बड़ी घटना रोकी जा सकती थी
सिकंदरपुर। खरीद गांव की घटना दुखदाई है। मृतकों के परिवार के प्रति गहरी संवेदना है। यह घटना प्रशासन की विफलता का परिणाम है। ये बातें सिकंदरपुर विधायक मो. जियाउद्दीन रिजवी ने प्रेस नोट जारी कर कहा। उन्होंने कहा कि खरीद गांव में पुलिस चौकी दो वर्ष पूर्व से स्वीकृत है किंतु पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी। अगर पुलिस चौकी संचालित रहती तो इस घटना को रोका जा सकता था। एसपी एवं पुलिस महानिदेशक से आग्रह किया लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। पूर्व विधायक भगवान पाठक ने कहा कि इस तरह से मामले में अधिकारियों को तत्परता से काम करना चाहिए। सात माह पहले ही अगर इस मामले को पुलिस गंभीरता से लेती तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटित होती। सरकार से दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करता हूं।
विज्ञापन
खरीद गांव में चाचा-भतीजे की हत्या और छह से अधिक लोगों के घायल होने की घटना में राजस्व व पुलिस की लापरवाही ही सामने आई है। डीआईजी आजमगढ़ सुनील कुमार से ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस की शिकायत की। इस पर विभाग को चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।
विज्ञापन
भूमि से संबंधित मामले पहले थाने और तहसील पहुंचते हैं। निचले स्तर के कर्मचारी इसमें लापरवाही बरतते हैं और फिर मामला बिगड़ जाता है। स्थानीय स्तर पर निस्तारण न होने पर मामला न्यायालय पहुंच जाता है। जहां संघर्ष कर पीड़ित स्थगन आदेश तो प्राप्त कर लेता है, लेकिन उसका अनुपालन नहीं हो पाता। ऐसे में पीड़ित पुलिस प्रशासन पर मिलीभगत करने का आरोप लगाता है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में दो संपूर्ण समाधान दिवस पर 257 शिकायतें आईं। इनमें से सिर्फ 21 का समाधान हुआ। थाना समाधान दिवस पर 96 मामले आए, जिसमें 38 का समाधान हो पाया। अन्य मामलों में पीड़ित तहसील व थानों का चक्कर लगा रहे हैं।
विज्ञापन
बड़ी घटना रोकी जा सकती थी
सिकंदरपुर। खरीद गांव की घटना दुखदाई है। मृतकों के परिवार के प्रति गहरी संवेदना है। यह घटना प्रशासन की विफलता का परिणाम है। ये बातें सिकंदरपुर विधायक मो. जियाउद्दीन रिजवी ने प्रेस नोट जारी कर कहा। उन्होंने कहा कि खरीद गांव में पुलिस चौकी दो वर्ष पूर्व से स्वीकृत है किंतु पुलिस कर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी। अगर पुलिस चौकी संचालित रहती तो इस घटना को रोका जा सकता था। एसपी एवं पुलिस महानिदेशक से आग्रह किया लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। पूर्व विधायक भगवान पाठक ने कहा कि इस तरह से मामले में अधिकारियों को तत्परता से काम करना चाहिए। सात माह पहले ही अगर इस मामले को पुलिस गंभीरता से लेती तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटित होती। सरकार से दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करता हूं।