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भाजपा के कई मंत्री हैं सामंतवादी
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Tue, 24 Nov 2015 11:35 PM IST
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बिहार के सांसद शत्रुघभन सिन्हा के बाद सलेमपुर के भाजपा सांसद रवींद्र कुशवाहा ने भी दल के मंत्रियों के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए पार्टी नेताओं को सामंतवादी बताया है। कहा कि भाजपा में अंदर ही अंदर मोदी जैसे ईमानदार नेता को भी हटाने की साजिश रची जा रही है।
श्री कुशवाहा ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को सामंतवादी करार देते हुए कहा कि सोमवार को मॉडल रेलवे स्टेशन पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यक्रम में कई भाजपा नेताओं की उपेक्षा की गई। सांसद ने कहा कि सोमवार को मॉडल रेलवे स्टेशन पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु आए हुए थे।
जिनके साथ रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा भी थे। वे देश के नहीं, बल्कि केवल गाजीपुर के मंत्री बनकर रह गए हैं। आरोप लगाया कि हम पिछड़े वर्ग से आते हैं। इसके चलते न तो हमें कार्यक्रम में कोई तरजीह दी गई और न ही हमारा तथा घोसी के भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर का नाम ही कहीं लिया गया।
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रेल राज्यमंत्री के कहने पर मॉडल रेलवे स्टेशन पर लगे शिलापट्ट पर सांसद भरत सिंह और सांसद नीरज शेखर का नाम लिखवाया गया था। भाजपा की सरकार में यह मंत्री सामंतवादी तरीके से काम कर रहे हैं। कहा कि रेल राज्यमंत्री से कई बार एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
ऐसे में हमारे संसदीय क्षेत्र में जग हंसाई हो रही है। कहा कि भाजपा के अधिकांश मंत्रियों द्वारा पिछड़े तबके के सांसदों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जा रहा है। जिनकी संख्या पूरे देश में करीब 70 से अधिक है। कहा कि अगर यही स्थिति रही तो सामंतवाद को बढ़ावा देने वाले मंत्री मोदी को ले डूबेंगे।
मोदी भी पिछड़ी जाति के हैं, ऐसे में उन्हें हटाने की साजिश रची जा रही है। भाजपा में यह पहली बार नहीं हो रहा है। इसके पहले उप्र के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ ऐसा हो चुका था। कुशवाहा ने कहा कि हम मोदी के विकास के नारे पर जीते। लेकिन अब संघ के भागवत सरीखे लोग सरकार चलाना चाह रहे हैं।
कहा कि केंद्रीय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलौत बलिया आए थे। उन्हें अपने क्षेत्र में बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। इसी तरह से मानव संसाधन मंत्री स्मृ़ति इरानी भी बेल्थरारोड में बने केंद्रीय विद्यालय के लोकार्पण के लिए कहकर नहीं आई। ऐसे में भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों की कथनी करनी में अंतर साफ झलक रहा है।
मोदी ने सरकार चलाने के लिए सराहनीय कदम उठाया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री उन्हें साजिश के तहत बदनाम कर हटाने में जुटे है। पार्टी में पिछड़े वर्ग के सांसदों की नहीं सुनी जा रही है। जिसका नतीजा 2017 के विस चुनाव में देखने को मिलेगा।
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श्री कुशवाहा ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को सामंतवादी करार देते हुए कहा कि सोमवार को मॉडल रेलवे स्टेशन पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यक्रम में कई भाजपा नेताओं की उपेक्षा की गई। सांसद ने कहा कि सोमवार को मॉडल रेलवे स्टेशन पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु आए हुए थे।
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जिनके साथ रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा भी थे। वे देश के नहीं, बल्कि केवल गाजीपुर के मंत्री बनकर रह गए हैं। आरोप लगाया कि हम पिछड़े वर्ग से आते हैं। इसके चलते न तो हमें कार्यक्रम में कोई तरजीह दी गई और न ही हमारा तथा घोसी के भाजपा सांसद हरिनारायण राजभर का नाम ही कहीं लिया गया।
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रेल राज्यमंत्री के कहने पर मॉडल रेलवे स्टेशन पर लगे शिलापट्ट पर सांसद भरत सिंह और सांसद नीरज शेखर का नाम लिखवाया गया था। भाजपा की सरकार में यह मंत्री सामंतवादी तरीके से काम कर रहे हैं। कहा कि रेल राज्यमंत्री से कई बार एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग रखी, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
ऐसे में हमारे संसदीय क्षेत्र में जग हंसाई हो रही है। कहा कि भाजपा के अधिकांश मंत्रियों द्वारा पिछड़े तबके के सांसदों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जा रहा है। जिनकी संख्या पूरे देश में करीब 70 से अधिक है। कहा कि अगर यही स्थिति रही तो सामंतवाद को बढ़ावा देने वाले मंत्री मोदी को ले डूबेंगे।
मोदी भी पिछड़ी जाति के हैं, ऐसे में उन्हें हटाने की साजिश रची जा रही है। भाजपा में यह पहली बार नहीं हो रहा है। इसके पहले उप्र के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ ऐसा हो चुका था। कुशवाहा ने कहा कि हम मोदी के विकास के नारे पर जीते। लेकिन अब संघ के भागवत सरीखे लोग सरकार चलाना चाह रहे हैं।
कहा कि केंद्रीय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलौत बलिया आए थे। उन्हें अपने क्षेत्र में बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। इसी तरह से मानव संसाधन मंत्री स्मृ़ति इरानी भी बेल्थरारोड में बने केंद्रीय विद्यालय के लोकार्पण के लिए कहकर नहीं आई। ऐसे में भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों की कथनी करनी में अंतर साफ झलक रहा है।
मोदी ने सरकार चलाने के लिए सराहनीय कदम उठाया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री उन्हें साजिश के तहत बदनाम कर हटाने में जुटे है। पार्टी में पिछड़े वर्ग के सांसदों की नहीं सुनी जा रही है। जिसका नतीजा 2017 के विस चुनाव में देखने को मिलेगा।