{"_id":"61b63ac94223c97faf464871","slug":"bhojpuri-folk-songs-drenched-my-mind-ballia-news-vns627561821","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोजपुरी लोकगीतों की फुहार से मन हुआ सराबोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोजपुरी लोकगीतों की फुहार से मन हुआ सराबोर
विज्ञापन
ददरी मेला के मीना बाजार स्थित भारतेंदु कला मंच पर लोकगीत प्रस्तुत करते शनि पांडेय तथा अमित पाठक क
- फोटो : BALLIA
बलिया। ऐतिहासिक ददरी मेला में भारतेंदु कला मंच पर शनिवार की रात आयोजित ददरी महोत्सव में भोजपुरी लोकगायकों ने गीतों से खूब वाहवाही बटोरी। हालांकि श्रोताओं की कमी के कारण कई-एक कलाकार अपनी बेहतर प्रस्तुति देने से बचते नजर आए और महोत्सव के नाम गायकी कर खानापूर्ति की। बावजूद इसके भोजपुरी गीतों और और नृत्य ने ददरी महोत्सव की शाम को गुलजार बनाने की कवायद जरूर की।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने फीता काटकर किया। इसके उपरांत भाजपा जिलाध्यक्ष ने कलाकारों को अंगवस्त्रम व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व अपर पुलिस अधीक्षक विजय त्रिपाठी उपस्थित नहीं रहे। इसके उपरांत कलाकारों की अनुपम प्रस्तुति का श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया और रातभर सुरों की सरिता में गोता लगाते रहे। महोत्सव का आगाज स्नेहा डे के कथक नृत्य से हुआ। इसके उपरांत गायक अमलेश शुक्ला ने ‘माई मंगला भवानी आई मोरे अंगना’ ने प्रस्तुत कर कार्यक्रम के शुभारंभ किया। ‘जय जय शम्भू शंकरा जय जय शम्भू शंकरा मेरा भोला है भण्डारी करे नंदी की सवारी ’ प्रस्तुत किया। इसके उपरांत अनुभा राय ने ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जा रे ’, ‘बलिया शहरिया में ददरी के मेलवा घुमाय द ये मोरे राजा’ गाया तो दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
विष्णु ओझा ने शादी से ‘पहिले दिहनि सबका से देखाई त बताई अम्माजी अब केकरा से लजाई’ , ‘मन के पोलाही जाई रात फेरु आई हो छोड़ दी न हो गइले बिहान ए राजा’ प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। विष्णु ओझा ने लोगों की फरमाइश पर जा हु हम जनिति कि शीतल ‘आई ह अंगना रुनु रे झुनू ना बजवइति बारहो बाजना’... प्रस्तुत किया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़हाट से गुंज उठा। तदोपरांत गायक सोनू पांडेय व अमित पाठक की जुगल बंदी ने समाज में बेटियों की दुर्दशा और दहेज प्रथा पर प्रहार करते हुआ ‘काका वा हो काका वा’ और ‘सतपुतिया बेच के पियवा किनले बा कुर्ती’ आदि प्रस्तुत किया। लोक गायिका निशा उपाध्याय ने ‘बनल रहो नईरहवा ये मइया बनल रहो ससुरवा अइसन बरवा दिहितु ए मइया बनल रहो सेनुरवा’। ‘जनिति जे टिकुली पे राजा जी लोभाई जईहे हम किसुम किसुम के लगाइति’, ‘दिल न लगइह फेरु जनि अइह अब जा जा जा जा जान भुला जइह‘ प्रस्तुत किया। अंकित और शनि की जोड़ी ने ‘देखी के घर ठगिले घर पकवा काकवा रे काकवा कइसे के कटे दिन कइसे के कटे रात’ गाकर लोगों को आनंदित किया।
विज्ञापन
इसके बाद अंजनी उपाध्याय ने ‘ चिंगरिया जब बलिया से उठल तब पूरा देश मे फइलल जाके लहरिया जब चिंगरिया बलिया से उठल’ गाया तो दर्शक वाह वाह कर उठे। महोत्सव के अंत में गोलू राजा ने ‘शारदे भवानी हो मइया आज रखो हो लाज’, ‘जनिति जे प्रेम के सकेत रे गली कनासम ना रहिती नगरे दिडोरवा पीटवइति ’ प्रस्तुत किया। गोलू राजा ने ‘ददरी के मेलवा में चोरी भइल दिल ए दरोगा बाबू खोजलो भइल बा मुश्किल’ प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू ने फीता काटकर किया। इसके उपरांत भाजपा जिलाध्यक्ष ने कलाकारों को अंगवस्त्रम व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व अपर पुलिस अधीक्षक विजय त्रिपाठी उपस्थित नहीं रहे। इसके उपरांत कलाकारों की अनुपम प्रस्तुति का श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया और रातभर सुरों की सरिता में गोता लगाते रहे। महोत्सव का आगाज स्नेहा डे के कथक नृत्य से हुआ। इसके उपरांत गायक अमलेश शुक्ला ने ‘माई मंगला भवानी आई मोरे अंगना’ ने प्रस्तुत कर कार्यक्रम के शुभारंभ किया। ‘जय जय शम्भू शंकरा जय जय शम्भू शंकरा मेरा भोला है भण्डारी करे नंदी की सवारी ’ प्रस्तुत किया। इसके उपरांत अनुभा राय ने ‘रेलिया बैरन पिया को लिए जा रे ’, ‘बलिया शहरिया में ददरी के मेलवा घुमाय द ये मोरे राजा’ गाया तो दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
विज्ञापन
विष्णु ओझा ने शादी से ‘पहिले दिहनि सबका से देखाई त बताई अम्माजी अब केकरा से लजाई’ , ‘मन के पोलाही जाई रात फेरु आई हो छोड़ दी न हो गइले बिहान ए राजा’ प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। विष्णु ओझा ने लोगों की फरमाइश पर जा हु हम जनिति कि शीतल ‘आई ह अंगना रुनु रे झुनू ना बजवइति बारहो बाजना’... प्रस्तुत किया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़हाट से गुंज उठा। तदोपरांत गायक सोनू पांडेय व अमित पाठक की जुगल बंदी ने समाज में बेटियों की दुर्दशा और दहेज प्रथा पर प्रहार करते हुआ ‘काका वा हो काका वा’ और ‘सतपुतिया बेच के पियवा किनले बा कुर्ती’ आदि प्रस्तुत किया। लोक गायिका निशा उपाध्याय ने ‘बनल रहो नईरहवा ये मइया बनल रहो ससुरवा अइसन बरवा दिहितु ए मइया बनल रहो सेनुरवा’। ‘जनिति जे टिकुली पे राजा जी लोभाई जईहे हम किसुम किसुम के लगाइति’, ‘दिल न लगइह फेरु जनि अइह अब जा जा जा जा जान भुला जइह‘ प्रस्तुत किया। अंकित और शनि की जोड़ी ने ‘देखी के घर ठगिले घर पकवा काकवा रे काकवा कइसे के कटे दिन कइसे के कटे रात’ गाकर लोगों को आनंदित किया।
विज्ञापन
इसके बाद अंजनी उपाध्याय ने ‘ चिंगरिया जब बलिया से उठल तब पूरा देश मे फइलल जाके लहरिया जब चिंगरिया बलिया से उठल’ गाया तो दर्शक वाह वाह कर उठे। महोत्सव के अंत में गोलू राजा ने ‘शारदे भवानी हो मइया आज रखो हो लाज’, ‘जनिति जे प्रेम के सकेत रे गली कनासम ना रहिती नगरे दिडोरवा पीटवइति ’ प्रस्तुत किया। गोलू राजा ने ‘ददरी के मेलवा में चोरी भइल दिल ए दरोगा बाबू खोजलो भइल बा मुश्किल’ प्रस्तुत किया।