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बेटी होना अच्छा, शिक्षित होना और भी अच्छा
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 11 Apr 2015 11:36 PM IST
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मां सरस्वती देवी बलदाऊ जी कन्या इंटर कालेज के कार्यक्रम में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि आए गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीएम सहाय ने कहा कि बालिकाओं को शिक्षित होना अति आवश्यक है। बेटी होना अच्छा है, बेटी शिक्षित होना और भी अच्छा है। कहा कि नारी सशक्तिकरण तभी सफल होगा, जब सभी बेटियां शिक्षित होंगी।
इंटर कालेज के प्रांगण में विद्यालय के संस्थापक समाजसेवी बलदाऊ की मूर्ति का अनावरण और प्रशासनिक भवन का उद्घाटन न्यायाधीश बीएम सहाय ने किया। उन्होंने विद्यालय में अध्ययनरत मेधावी छात्र-छात्राओं को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इसके बाद छात्राओं ने स्वागत तथा देशभक्ति गीत गाकर कार्यक्रम का आगाज किया।मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा एक अभियान और कर्तव्य है। यह आगे का मार्ग प्रशस्त कर मनुष्य को ऊंचा उठाने का काम करता है। वर्तमान में एक से आठ तक की नि:शुल्क शिक्षा को संविधान के आर्टिकल 21 में भी मान लिया गया है। आज बेटियों के लिए नये कानून बन रहे हैं। ताकि वह भी समानता के साथ समाज में जी सकें और उन्हें न्याय मिल सकें।
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कहा कि वर्तमान परिवेश में लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ रही हैं। विशिष्ट अतिथि हाईकोर्ट इलाहाबाद के पूर्व न्यायाधीश एसएन सहाय ने कहा कि शिक्षा के बल पर ही समाज और देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। बेसिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और रोजगार परक शिक्षा भी नितांत आवश्यक है।
कहा कि जिस व्यक्ति की मूर्ति का अनावरण हुआ है, उसने हमेशा शिक्षा के स्तर को ऊंचा बढ़ाने के लिए काम किया। आज उनके इस अभियान को जीवित रखना ही उनके प्रति सच्चि श्रद्धांजलि होगी। इसके पूर्व विद्यालय के प्रबंधक विनोद कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि सहित मंचासीन लोगों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया।
इस मौके पर सांसद रविंद्र कुशवाहा, पूर्व विधायक भगवान पाठक, बृजनाथ वर्मा, अरविंद कुमार राय, सुरेश सिंह, हरिशंकर सिंह, परमेश्वर प्रजापति, माधव प्रसाद गुप्ता, उदय बहादुर सिंह, डा. साकेत बिहारी, डा. बीके राय, एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी, सीओ राजाराम यादव आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता ईश्वरदास ब्रह्मचारी मौनी बाबा और संचालन एनके सिंह ने किया।
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इंटर कालेज के प्रांगण में विद्यालय के संस्थापक समाजसेवी बलदाऊ की मूर्ति का अनावरण और प्रशासनिक भवन का उद्घाटन न्यायाधीश बीएम सहाय ने किया। उन्होंने विद्यालय में अध्ययनरत मेधावी छात्र-छात्राओं को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
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इसके बाद छात्राओं ने स्वागत तथा देशभक्ति गीत गाकर कार्यक्रम का आगाज किया।मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा एक अभियान और कर्तव्य है। यह आगे का मार्ग प्रशस्त कर मनुष्य को ऊंचा उठाने का काम करता है। वर्तमान में एक से आठ तक की नि:शुल्क शिक्षा को संविधान के आर्टिकल 21 में भी मान लिया गया है। आज बेटियों के लिए नये कानून बन रहे हैं। ताकि वह भी समानता के साथ समाज में जी सकें और उन्हें न्याय मिल सकें।
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कहा कि वर्तमान परिवेश में लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों को पीछे छोड़ रही हैं। विशिष्ट अतिथि हाईकोर्ट इलाहाबाद के पूर्व न्यायाधीश एसएन सहाय ने कहा कि शिक्षा के बल पर ही समाज और देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। बेसिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और रोजगार परक शिक्षा भी नितांत आवश्यक है।
कहा कि जिस व्यक्ति की मूर्ति का अनावरण हुआ है, उसने हमेशा शिक्षा के स्तर को ऊंचा बढ़ाने के लिए काम किया। आज उनके इस अभियान को जीवित रखना ही उनके प्रति सच्चि श्रद्धांजलि होगी। इसके पूर्व विद्यालय के प्रबंधक विनोद कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि सहित मंचासीन लोगों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया।
इस मौके पर सांसद रविंद्र कुशवाहा, पूर्व विधायक भगवान पाठक, बृजनाथ वर्मा, अरविंद कुमार राय, सुरेश सिंह, हरिशंकर सिंह, परमेश्वर प्रजापति, माधव प्रसाद गुप्ता, उदय बहादुर सिंह, डा. साकेत बिहारी, डा. बीके राय, एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी, सीओ राजाराम यादव आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता ईश्वरदास ब्रह्मचारी मौनी बाबा और संचालन एनके सिंह ने किया।