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सीएम साहब, 24 घंटे बाद तक नहीं पहुंची है पीड़ितों तक राहत

Thu, 19 Sep 2019 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 12:12 AM IST
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बैरिया/दयाछपरा। दुबेछपरा रिंग बंधा टूटने के बाद गंगा नदी के बाढ़ का पानी गोपालपुर, दुबेछपरा, प्रसादछपरा, बुधनचक, मुरलीछपरा, दयाछपरा, केहरपुर गांव के बाशिंदों के घरों में घुस गया है। इससे हजारों की संख्या में बाशिंदे बेघर हो गए हैं, खास बात तो यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 घंटे में बाढ़ राहत सामग्री व आर्थिक सहायता देने की घोषणा के 24 घंटे बाद भी राहत सामग्री व आर्थिक सहायता नहीं पहुंची है। तहसील प्रशासन ने सर छुपाने के लिए 500 बाढ़ पीड़ितों में तिरपाल वितरण के साथ ही खाना का पैकेट वितरण कराया है। जबकि विधायक सुरेंद्र सिंह की तरफ से बाढ़ पीड़ितों के भोजन के लिए बुधवार को लंगर की व्यवस्था की गई है। हालांकि बाढ़ पीड़ितों के पशुओं के निवाले के लाले पड़े हुए हैं। जिन पशुपालकों के पांच से 10 पशु हैं, उन्हें भी महज पांच किलो भूसा दिया जा रहा है। बाढ़ इलाके में तैनात मनियर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लालबहादुर ने बताया कि कुल 15 कुंटल भूसा वितरण करना है। ऐसे में प्रति पशुपालक पांच किलो भूसा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इलाज के लिए एंबुलेंस चिकित्सा सेवा की व्यवस्था की गई है। टिटनेस, सर्प काटने के बाद बचाव के लिए एंटी स्नैक, रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कृष्ण गोपाल पांडेय ने लंच पैकेज वितरण कराने की कमान संभाली है। हालांकि अभी तक एनएच 31 पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को स्कूल, पंचायत भवन आदि सरकारी संस्थाओं में कहीं शिफ्ट नहीं किया गया है। ऐसे में बीमार बाढ़ पीड़ितों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। गोपालपुर निवासी लक्ष्मण राम की तबीयत काफी खराब है, लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। वे एनएच 31 पर शरण लिए हुए हैं। तहसील प्रशासन की तरफ से बाढ़ राहत कैंप की कमान एसडीएम बैरिया दुष्यन्त कुमार मौर्य, तहसीलदार श्रवण कुमार राठौड़ व बांसडीह तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने संभाली है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार हमें कुछ नहीं मिल रहा है।
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नहीं उपलब्ध हुई नाव, खराब हो रहे सामान
बैरिया/दयाछपरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 घंटे में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री व आर्थिक मदद देने की बात तो दूर 24 घंटे बाद अब तक बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला नहीं जा सका है। एनडीआरएफ की टीम जरूर लगी है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नाव की कमी खल रही है। आलम ये है कि बाढ़ पीड़ितों के आवश्यक महंगे समान बाढ़ के पानी में भीगकर नष्ट हो रहे हैं।
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बस सरकारें बदलती रहीं, हमारी नियति नहीं बदली
बैरिया। हम हर साल उजड़ते रहे और शासन-प्रशासन के लोग हमारे बचाव के नाम पर मालामाल होते रहे। एनएच 31 पर तिरपाल के नीचे शरण लिए बाढ़ पीड़ितों की आंसू भरी आंखें यही कहानी कर रही हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि तिनका-तिनका जोड़कर हम किसी तरह सपनों का महल खड़ा करते हैं और एक झटके में बाढ़ व कटान में वर्षों की कमाई खत्म हो जाती है। जनप्रतिनिधियों ने हर बार हमें आश्वासन दिया कि हमारी सरकार बनी तो कटान से निजात दिला देंगे, बाढ़ व कटान की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन बस सरकारें बदलती रहीं, हमारी समस्या तो पहले भी यही थी और आज भी यही है। दुबेछपरा रिंग बंधे को बचाने के नाम पर 41 करोड़ से भी अधिक धन खर्च कर दिया गया, इसके बाद भी हम सड़क पर हैं। यदि सरकार निष्पक्षता पूर्वक जांच करा ले तो लूट खसोट करने वाले जेल जाएंगे। जब तक धांधली करने वाले अधिकारी दंडित नहीं होंगे, हम बाढ़ पीड़ितों की कहानी साल दर साल इसी प्रकार समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती रहेगी।
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