बलिया बलिदान दिवस: इतिहास की दस्तक से खुला जिला जेल का फाटक, निकला जंग-ए-आजादी के दीवानों का हुजूम
19 अगस्त 1942 को तब जेल का फाटक खोला गया था और स्वतंत्रता आंदोलन के दीवाने आजाद हुए थे। उस समय जिले ने न सिर्फ बागी बलिया का तमगा हासिल किया बल्कि देश में सबसे पहले आजाद होने का गौरव भी हासिल कर लिया था।
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जंग-ए-आजादी आजादी के दीवानों का हुजूम, हिंदुस्तान जिंदाबाद और भारत माता की जय जैसे नारों से गूंजती फिजाएं और चहुंओर बही देशभक्ति की बयार। 75वें साल भी बलिया बलिदान दिवस पर बृहस्पतिवार को बलिया जिला जेल के बाहर का नजारा सुबह कुछ ऐसा ही था। इतिहास तारीख बन कर एक बार फिर सामने खड़ा था।
हर साल की तरह जेल के दरवाजे को प्रतीकात्मक तौर पर खोल दिया गया। भारत माता की जय व वंदे मातरम की गगनभेदी नारे गूंज उठे। सेनानियों के साथ देशभक्ति के रंग में डूबे लोगों ने यहां जुलूस की शक्ल में निकल कर शहर के सभी सेनानियों के प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद टाउन हॉल में आजादी के दीवानों की वीर गाथा को याद किया।
19 अगस्त 1942 को तब जेल का फाटक खोला गया था और स्वतंत्रता आंदोलन के दीवाने आजाद हुए थे। उस समय जिले ने न सिर्फ बागी बलिया का तमगा हासिल किया बल्कि देश में सबसे पहले आजाद होने का गौरव भी हासिल कर लिया था। इस ऐतिहासिक घटना को प्रतीकात्मक रूप में जब बृहस्पतिवार को दोहराया गया तो जिला कारागार के आसपास का पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
उन पलों को याद कर के जिले के लोगों की भुजाएं फड़कने लगीं। इसके बाद जुलूस की शक्ल में नगर भ्रमण करते हुए नगवासियों ने देश के सच्चे सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही कहा कि बागी बलिया को गुलामी न तब सहन थी और न ही अब इसे बर्दाश्त किया जाएगा।
अमर शहीदों के नाम पर गगनभेदी नारे
बलिया बलिदान दिवस पर नगर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें विभिन्न संगठनों के लोगों ने प्रतिभाग कर सेनानियों द्वारा दी गई कुर्बानी को याद किया। जिला कारागार पर स्वतंत्रता सेनानी राम विचार पांडेय के साथ डीएम अदिति सिंह, एसपी राजकरन नैय्यर ओंकार सिंह सुबह ही जेल के मुख्य द्वार के बाहर इकट्ठा हो गए थे। सुबह नौ बजे जेल का मुख्य फाटक खोल दिया गया।
अमर शहीदों के नाम पर गगनभेदी नारे लगाए जाने लगे। सेनानी राम विचार पांडेय को माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। जिला कारागार परिसर में ही स्थापित सेनानी राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद समाजसेवी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एवं संगठनों के पदाधिकारी जुलूस की शक्ल में सेनानियों की प्रतिमाओं तक पहुंचे।
शेर-ए- बलिया चित्तू पांडेय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के दौरान शहीदों का जयघोष भी किया गया। जुलूस बापू भवन टाउन हॉल में पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। इस दौरान लोगों ने सेनानियों द्वारा दी गई कुर्बानी को याद किया और उनके सपनों के भारत का निर्माण करने का संकल्प लिया।