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शिक्षक नहीं खराब दर्जे के अनाज घटना के जिम्मेवार
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 21 Mar 2016 10:10 PM IST
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उत्तर प्रदेशीय विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक सोमवार को आयोजित किया गया। जिसमें बेलहरी ब्लाक के बहदुरा प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मिल में फूड प्वाइजनिंग का मुद्दा छाया रहा।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि अध्यापकों पर से गलत तरीके से दर्ज प्राथमिकी को वापस नहीं लिया गया, तो जनपद के शिक्षक आंदोलित होने के लिए बाध्य होंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष घनश्याम चौबे ने कहा कि एक ओर जहां कोटे की दूकान से सड़ा गेहूं और चावल के साथ ही तेल, घी और दूध भी मिलावट कर दूकानदारों द्वारा मिड-डे-मिल के लिए आपूर्ति हो रही है। इस अनाज से बने भोजन की जांच के लिए कोई मशीन नहीं है।
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ऐसे में अनाज कोटेदार और दूकानदारों की जांच न कर पूरी जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोपना अधिकारियों और छुटभैया नेताओं का फैशन बन गया है। अध्यापकों की नियुक्ति शिक्षण कार्य के लिए किया जाता है, लेकिन उनके जिम्में कई विभागों के गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझाकर शिक्षा के स्तर को गिराया जा रहा है।
कहा कि मध्याह्न भोजन योजना ने तो शिक्षकों को बावर्ची बनाकर रख दिया है। मध्याह्न भोजन से बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं से न तो सबक लिया जा रहा है और न ही पके भोजन की जांच के लिए कोई व्यवस्था की जा रही है।
कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जिसका बच्चा विद्यालय में पढ़ता भी नहीं है, उसके द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराना साबित करता है कि इस मामले को सुनियोजित रूप से तूल दिया जा रहा है। संगठन के इस मामले को गंभीरता से लिया है।
जिले के शिक्षकों में फर्जी प्राथमिकी दर्ज होने को लेकर नाराजगी है। बैठक में अरूण कुमार सिंह, राजेंद्र तिवारी, डा. आशुतोष कुमार शुक्ल, अवनीश सिंह, धीरज राय, नित्यानंद पांडेय, अनिल सिंह, संजय सिंह, धनंजय पाठक, योगेंद्र वर्मा, जितेंद्र यादव, भूपेंद्र सिंह, सुनील सिंह, सुनील यादव, राजेश यादव, विजय सिंह, मनोज सिंह, मैनुद्दीन, राकेश वर्मा, संतोष पांडेय आदि उपस्थित रहे। बैठक का संचालन शर्मानाथ यादव ने किया।
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बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि अध्यापकों पर से गलत तरीके से दर्ज प्राथमिकी को वापस नहीं लिया गया, तो जनपद के शिक्षक आंदोलित होने के लिए बाध्य होंगे।
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बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष घनश्याम चौबे ने कहा कि एक ओर जहां कोटे की दूकान से सड़ा गेहूं और चावल के साथ ही तेल, घी और दूध भी मिलावट कर दूकानदारों द्वारा मिड-डे-मिल के लिए आपूर्ति हो रही है। इस अनाज से बने भोजन की जांच के लिए कोई मशीन नहीं है।
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ऐसे में अनाज कोटेदार और दूकानदारों की जांच न कर पूरी जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोपना अधिकारियों और छुटभैया नेताओं का फैशन बन गया है। अध्यापकों की नियुक्ति शिक्षण कार्य के लिए किया जाता है, लेकिन उनके जिम्में कई विभागों के गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझाकर शिक्षा के स्तर को गिराया जा रहा है।
कहा कि मध्याह्न भोजन योजना ने तो शिक्षकों को बावर्ची बनाकर रख दिया है। मध्याह्न भोजन से बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं से न तो सबक लिया जा रहा है और न ही पके भोजन की जांच के लिए कोई व्यवस्था की जा रही है।
कहा कि एक ऐसा व्यक्ति जिसका बच्चा विद्यालय में पढ़ता भी नहीं है, उसके द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराना साबित करता है कि इस मामले को सुनियोजित रूप से तूल दिया जा रहा है। संगठन के इस मामले को गंभीरता से लिया है।
जिले के शिक्षकों में फर्जी प्राथमिकी दर्ज होने को लेकर नाराजगी है। बैठक में अरूण कुमार सिंह, राजेंद्र तिवारी, डा. आशुतोष कुमार शुक्ल, अवनीश सिंह, धीरज राय, नित्यानंद पांडेय, अनिल सिंह, संजय सिंह, धनंजय पाठक, योगेंद्र वर्मा, जितेंद्र यादव, भूपेंद्र सिंह, सुनील सिंह, सुनील यादव, राजेश यादव, विजय सिंह, मनोज सिंह, मैनुद्दीन, राकेश वर्मा, संतोष पांडेय आदि उपस्थित रहे। बैठक का संचालन शर्मानाथ यादव ने किया।