फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Arbitrary deduction on paddy purchase centers

धान क्रय केंद्रों पर हो रही मनमानी कटौती

Tue, 28 Nov 2017 10:25 PM IST
ballia
ballia Updated Tue, 28 Nov 2017 10:25 PM IST
विज्ञापन
Arbitrary deduction on paddy purchase centers
सरकारी केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा नमी वाला धान - फोटो : अमर उजाला
धान क्रय केंद्रों पर खरीद में मनमानी जारी है। नमी और कटौती के नाम पर किसानों को परेशान किया रहा। इससे नाराज किसान धान को बाजारों में बेचने को मजबूर हैं। आलम यह है कि किसी भी क्रय केंद्र पर किसानों की सुविधा का कोई इंतजाम नहीं है। अधिकारियों की सारी व्यवस्था कागज पर ही चल रही।  
विज्ञापन

डीएम के आदेश के बावजूद जिले में धान क्रय केंद्रों पर मनमानी बदस्तूर जारी है। जिले में कुल 89 धान क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसमें विपणन की हाट शाखा के 14 केंद्र खोले गए हैं। इसके अलावा पीसीएफ के 28, एग्रो के 6, भारतीय खाद्य निगम व एनसीसीएफ के दो-दो, नैफेड के 7, कर्मचारी कल्याण निगम के 4 व एनसीएमएल के 21 तथा आदर्श क्रय विक्रय सहकारी समिति के पांच क्रय केंद्र अलग-अलग स्थानों पर स्थापित है। शासन की ओर से क्रय केंद्रों पर किसानों की सुविधा को लेकर कई इंतजाम करने का निर्देश दिया गया। इसमें क्रय केंद्रों पर पानी, बैठने, किसी कारण से रात होने पर रुकने आदि के अलावा नमी मापक यंत्र व इलेक्ट्रानिक कांटा लगाने थे। लेकिन एक नवंबर से कागजों में संचालित अधिकांश क्रय केंद्रों पर सुविधाओं का टोटा है।
विज्ञापन


अधिकांश क्रय केंद्रों पर नमी के नाम पर किसानों से मनमानी कटौती की जा रही है। किसी भी क्रय केंद्र पर नमी मापक यंत्र सही तरीके से काम नहीं कर रहा। कुछ दिनों पहले सोहांव ब्लाक के बघौना गांव के किसानों ने इसी बात को लेकर खरीद एजेंसी के जिला प्रभारी को बंधक भी बनाया था। सूत्रों की मानें तो किसानों से मनमानी कटौती कर विपणन विभाग के अधिकारी व खरीद एजेंसी के कर्मचारी हर साल लाखों का गोलमाल करते हैं। इतना ही क्रय केंद्रों पर धान तौल कराने, सिलाई आदि का खर्च भी लिया जाता है जबकि यह खर्च क्रय केंद्रों को वहन करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्थिति यह है कि शासन के निर्देश के बावजूद विपणन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। हैरानी की बात है कि धान क्रय केंद्रो के लिए नोडल अफसर भी नामित किए गए हैं लेकिन उनका भी कभी अता-पता नहीं चलता है। इस फजीहत के चलते किसान धान को क्रय केंद्रों के बजाए खुले बाजारों में बेचने को विवश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed