UP: बलिया में एक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति निरस्त, केस का निर्देश; लेखपाल पर भी शिकंजा
यूपी के बलिया का यह मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। सीडीपीओ नगरा को प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। भ्रष्टाचार के मामले में संबंधित क्षेत्र के लेखपाल एवं आवेदिका स्वयं उत्तरदायी पाए गए हैं।
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फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नियुक्ति पाने वाली एक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति को निरस्त करने के साथ मामले में सीडीपीओ नगरा को प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने दिया है। साथ ही उपजिलाधिकारी रसड़ा को फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में सहयोग करने वाले लेखपाल के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है।
मामला नगरा नगर पंचायत के जहांगीरपुरा वार्ड नं. तीन का है। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि पूर्व में जिलाधिकारी को प्राप्त शिकायत के आधार पर जहांगीरपुरा वार्ड संख्या तीन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के आवेदन करते समय फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। मामले की जांच के लिए तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी रसड़ा को निर्देशित किया गया था।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि सात जनवरी 2025 को तथ्यों को छिपाकर आय प्रमाण पत्र बनवाया गया, जिसके आधार पर आवेदिका जयश्री पत्नी राजीव मोहन यादव के परिवार को बीपीएल दर्शाया गया। इस कृत्य के लिए संबंधित क्षेत्र के लेखपाल एवं आवेदिका स्वयं उत्तरदायी पाए गए।
जांच कर होगी सख्त कार्रवाई
सीडीओ ने बताया कि उपजिलाधिकारी रसड़ा की ओर से प्रस्तुत जांच आख्या के आधार पर जयश्री की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, बाल विकास परियोजना अधिकारी, नगरा को निर्देशित किया गया है कि आवेदिका के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज करवाई जाए।
इसके अतिरिक्त, उप जिलाधिकारी रसड़ा को निर्देशित किया गया है कि संबंधित लेखपाल के विरुद्ध प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
बीते दो मई को बेलहरी ब्लॉक के अंगनबाड़ी केंद्र बजरहा एवं रेपुरा में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नियुक्ति पाने वाली गुड़िया पत्नी मनीष कुमार (रेपुरा) एवं अमृता दुबे पत्नी आलोक कुमार दुबे (बजरहा) आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति भी सीडीओ ने निरस्त करते हुए एफआईआर दर्ज कराया था।इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर एसडीएम सदर ने संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया था।