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बलिया की बेटी अन्नू दुबे लड़ रही, ताकि बेटियां हों निर्भय
Fri, 06 Dec 2019 12:03 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2019 12:03 AM IST
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दो दिसम्बर को संसद भवन के सामने धरने पर बैठी बलिया की बेटी अन्नू दुबे व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला।
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1857 का गदर हो या 1942 का आंदोलन। बलिया ने हर बार नेतृत्व किया है। जब-जब जरूरत पड़ी देश ने बलिया का बागीपन देखा और आज एक बार फिर बलिया की बेटी देश की बेटियों के निर्भय बनाने के लिए दिल्ली में उनकी आवाज बुलंद कर रही है। जी, हां हम बात कर रहे हैं दिल्ली में संसद भवन के सामने धरना देने के दौरान पुलिस की बर्बरता की शिकार हुई अन्नू दुबे की।
उसने तेलंगाना, हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म, हत्या व शव जलाने वालों को सजा की मांग को लेकर 2 नवंबर को संसद भवन मार्ग पर धरना शुरू किया था। तब से उसका संघर्ष सतत जारी अब वह जंतर मंतर पर धरने पर बैठी है।
अन्नू का पैतृक गांव बांसडीह कोतवाली थाना क्षेत्र के हुसेनाबाद गांव में है। उसकी ननिहाल भी बलिया के ही बैरिया थाना क्षेत्र के गोविंदपुर(चांदपुर) में है। अन्नू के पिता लक्ष्मण दुबे एयरफोर्स में फ्लाइंग अफसर थे। वहां से रिटायरमेंट के बाद इस समय जोधपुर की किसी प्राइवेट कंपनी में हैं। उसके दादा स्व. शिवबचन दुबे भी क्षेत्र में ख्याति रखते थे। अन्नू जोधपुर से बीबीए करने के बाद मैट की तैयारी कर रही है। तीन बहनों व एक भाई के बीच अन्नू दूसरे नबर की है।
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उसने तेलंगाना, हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म, हत्या व शव जलाने वालों को सजा की मांग को लेकर 2 नवंबर को संसद भवन मार्ग पर धरना शुरू किया था। तब से उसका संघर्ष सतत जारी अब वह जंतर मंतर पर धरने पर बैठी है।
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अन्नू का पैतृक गांव बांसडीह कोतवाली थाना क्षेत्र के हुसेनाबाद गांव में है। उसकी ननिहाल भी बलिया के ही बैरिया थाना क्षेत्र के गोविंदपुर(चांदपुर) में है। अन्नू के पिता लक्ष्मण दुबे एयरफोर्स में फ्लाइंग अफसर थे। वहां से रिटायरमेंट के बाद इस समय जोधपुर की किसी प्राइवेट कंपनी में हैं। उसके दादा स्व. शिवबचन दुबे भी क्षेत्र में ख्याति रखते थे। अन्नू जोधपुर से बीबीए करने के बाद मैट की तैयारी कर रही है। तीन बहनों व एक भाई के बीच अन्नू दूसरे नबर की है।
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फौजियों के बच्चे कायर नहीं होते: अन्नू दुबे
अन्नू ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि जब रातोंरात नोट बदले जा सकते हैं। रातोंरात सरकारें बदली जा सकती हैं तो सरकार एक रात में बेटियों और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के लिए कठोर सजा का कानून क्यों नहीं बना सकता है।
आखिर कब तक निर्भया कांड की तरह आग सुलगती रहेगी। वह लगातार जंतर-मंतर पर धरने पर बैठी है और उसका कहना है कि जब तक सरकार इसे लेकर कानून नहीं बना देती तब तक उसका संघर्ष खत्म नहीं होगा। चाहे इसके लिए उसकी जान ही क्यों न चली जाए। उसने कहा कि मेरे पिता फौजी रहे हैं और फौजियों के बच्चे कायर नहीं होते। मैं भी किसी से नहीं डरती हूं।
अन्नू ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि जब रातोंरात नोट बदले जा सकते हैं। रातोंरात सरकारें बदली जा सकती हैं तो सरकार एक रात में बेटियों और महिलाओं पर अत्याचार करने वालों के लिए कठोर सजा का कानून क्यों नहीं बना सकता है।
आखिर कब तक निर्भया कांड की तरह आग सुलगती रहेगी। वह लगातार जंतर-मंतर पर धरने पर बैठी है और उसका कहना है कि जब तक सरकार इसे लेकर कानून नहीं बना देती तब तक उसका संघर्ष खत्म नहीं होगा। चाहे इसके लिए उसकी जान ही क्यों न चली जाए। उसने कहा कि मेरे पिता फौजी रहे हैं और फौजियों के बच्चे कायर नहीं होते। मैं भी किसी से नहीं डरती हूं।