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बाजारीकरण के विरुद्ध संघर्ष का एलान
ब्यूरो/ अमर उजाला, बलिया
Updated Sat, 23 Apr 2016 10:33 PM IST
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डीआईओएस कार्यालय में धरना सभा को संबोधित करते शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष केके पांडेय।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर शनिवार शिक्षकों ने डीआईओएस कार्यालय पर धरना दिया। शिक्षकों ने शिक्षा के बाजारीकरण के विरुद्ध संघर्ष पर विस्तार से विचार रखा। साथ ही सीएम को संबोधित ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपा
धरना सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष केके पांडेय ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का बाजारीकरण पूरी तरह से हाबी है। भारत के संविधान और भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियमों के मुताबिक 18 वर्ष तक के आय के बच्चों के शिक्षा का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर है। लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो जन्म लेने के बाद से ही अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा-दीक्षा पर हर वर्ष हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। ऐसा नहीं कर पाने वाले लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में विवश होकर पढ़ा रहे हैं। यहां दोहरी शिक्षा नीति पूरी तरह से लागू है। सामान्य एवं कम आय वाले परिवारों के बच्चे पैसे के अभाव में अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते।
ऐसे में मेधावी बच्चों को उत्तम शिक्षा के हक से रोका जा रहा है। कक्षा एक से लेकर 12 तक के सरकार द्वारा स्थापित और संचालित विद्यालयों की संख्या संसद द्वारा पारित अधिनियमों के अनुरूप नहीं है। शिक्षा पूरी तरह से निजी हाथों में पहुंच गई है। पूर्व अध्यक्ष अभय नारायण राय, पूर्व अध्यक्ष विष्णु देव राय, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र राय, अशोक कुमार श्रीवास्तव, डा. शिवकुमार मिश्र, अभिमन्यु सिंह, श्रीराम सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन अरुण कुमार ओझा ने किया।
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धरना सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष केके पांडेय ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का बाजारीकरण पूरी तरह से हाबी है। भारत के संविधान और भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियमों के मुताबिक 18 वर्ष तक के आय के बच्चों के शिक्षा का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर है। लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो जन्म लेने के बाद से ही अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए शिक्षा-दीक्षा पर हर वर्ष हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। ऐसा नहीं कर पाने वाले लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में विवश होकर पढ़ा रहे हैं। यहां दोहरी शिक्षा नीति पूरी तरह से लागू है। सामान्य एवं कम आय वाले परिवारों के बच्चे पैसे के अभाव में अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते।
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ऐसे में मेधावी बच्चों को उत्तम शिक्षा के हक से रोका जा रहा है। कक्षा एक से लेकर 12 तक के सरकार द्वारा स्थापित और संचालित विद्यालयों की संख्या संसद द्वारा पारित अधिनियमों के अनुरूप नहीं है। शिक्षा पूरी तरह से निजी हाथों में पहुंच गई है। पूर्व अध्यक्ष अभय नारायण राय, पूर्व अध्यक्ष विष्णु देव राय, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र राय, अशोक कुमार श्रीवास्तव, डा. शिवकुमार मिश्र, अभिमन्यु सिंह, श्रीराम सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन अरुण कुमार ओझा ने किया।
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