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अक्षय नवमी : आंवला पेड़ का पूजन अर्चन कर लोगों ने किया दान पुण्य
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नरही में अक्षय नवमी पर आवंले के वृक्ष के नीचे भोजन करते श्रद्धालु।
- फोटो : BALLIA
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी मनाई जाती है। अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है। बुधवार को लोगों ने आंवला के पेड़ के नीचे पूजा किया और ब्राह्मणों को भोजन कराया और दानपुण्य भी किया। इसके बाद लोगों ने आंवला पेड़ के नीचे भोजन किया।
पौराणिक मान्यता के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। इस दिन आंवला पेड़ के अलावा भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा और दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण वृंदावन-गोकुल की गलियां छोड़ मथुरा गए थे। इस दिन उन्होंने अपनी बाल लीलाओं को त्याग कर अपने कर्तव्य के पथ पर कदम रखा था। महिलाएं आंवला वृक्ष की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करती हैं। यह पूजा संतान प्राप्ति एवं पारिवारिक सुख समृद्धि के लिए की जाती है। सुबह से ही आंवले के वृक्ष के नीचे महिलाओं ने पूजन शुरू कर दिया। वृक्ष के नीचे पकवान बनाए गए। इसे ब्राह्मणों के साथ ही अन्य लोगों को खिलाया गया। इसके बाद दानपुण्य भी किया गया।
नवानगर। गांवों में अक्षय नवमी उत्साह से मनाया गया। महिलाओं ने घरों में पकवान बनाकर आंवला वृक्ष की पूजा अर्चन कर परिवार के साथ वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किया। मान्यता है कि इस दिन आंवला के पेड़ का पूजन कर परिवार समेत पकवान बनाकर भोजन करने से परिवार में आरोग्यता व सुख-समृद्धि आती है। बुधवार को अक्षय नवमी को लेकर सुबह से ही आंवला पेड़ों का पूजन करने के लिए महिलाओं की कतारें लग गई। पं. विजय शंकर दूबे ने बताया कि अक्षय नवमी पर किया गया जप, तप, दान आदि से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त कर मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होता है। इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
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बेल्थरारोड। अक्षय नवमी पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर आंवला वृक्ष के नीचे पूजन अर्चन कर भोजन किया। इस दौरान नगर क्षेत्र के बाग- बगीचों के अलावा अन्य स्थानों पर आंवला वृक्ष के नीचे लोगों की भीड़ रही। नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्त ने जिला पंचायत के डाक बंगला में आंवला वृक्ष के नीचे पूजन अर्चन के बाद हजारों लोगों ने भोजन का आनंद लिया। अखिल भारतीय साहू समाज की ओर से धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। इस दिन आंवला पेड़ के अलावा भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा और दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण वृंदावन-गोकुल की गलियां छोड़ मथुरा गए थे। इस दिन उन्होंने अपनी बाल लीलाओं को त्याग कर अपने कर्तव्य के पथ पर कदम रखा था। महिलाएं आंवला वृक्ष की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करती हैं। यह पूजा संतान प्राप्ति एवं पारिवारिक सुख समृद्धि के लिए की जाती है। सुबह से ही आंवले के वृक्ष के नीचे महिलाओं ने पूजन शुरू कर दिया। वृक्ष के नीचे पकवान बनाए गए। इसे ब्राह्मणों के साथ ही अन्य लोगों को खिलाया गया। इसके बाद दानपुण्य भी किया गया।
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नवानगर। गांवों में अक्षय नवमी उत्साह से मनाया गया। महिलाओं ने घरों में पकवान बनाकर आंवला वृक्ष की पूजा अर्चन कर परिवार के साथ वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन किया। मान्यता है कि इस दिन आंवला के पेड़ का पूजन कर परिवार समेत पकवान बनाकर भोजन करने से परिवार में आरोग्यता व सुख-समृद्धि आती है। बुधवार को अक्षय नवमी को लेकर सुबह से ही आंवला पेड़ों का पूजन करने के लिए महिलाओं की कतारें लग गई। पं. विजय शंकर दूबे ने बताया कि अक्षय नवमी पर किया गया जप, तप, दान आदि से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त कर मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होता है। इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
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बेल्थरारोड। अक्षय नवमी पर श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर आंवला वृक्ष के नीचे पूजन अर्चन कर भोजन किया। इस दौरान नगर क्षेत्र के बाग- बगीचों के अलावा अन्य स्थानों पर आंवला वृक्ष के नीचे लोगों की भीड़ रही। नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश कुमार गुप्त ने जिला पंचायत के डाक बंगला में आंवला वृक्ष के नीचे पूजन अर्चन के बाद हजारों लोगों ने भोजन का आनंद लिया। अखिल भारतीय साहू समाज की ओर से धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।