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अवैध वसूली में रेंजर समेत तीन नपे
ballia
Updated Sun, 11 Jun 2017 10:14 PM IST
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प्रांतीय सीमा भरौली में बिहार प्रांत से आने वाले लाल बालू से अवैध वसूली करने के आरोप में डीएफओ ने फेफना के रेंजर समेत तीन वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। डीएफओ ने स्थानांतरित रेंजर को जहां कार्यमुक्त कर दिया वहीं दो वनकर्मियों को अलग रेंज से संबद्ध कर दिया। विभाग इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
वर्ष 2012 में वैट लागू होने के बाद सरकार ने सभी विभागों के चेकपोस्ट को समाप्त कर दिया। लिहाजा वन विभाग की ओर से प्रवर्तन दल की तैनाती सभी प्रांतीय सीमाओं पर की गई और बिहार प्रांत की ओर से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। इसी बीच भरौली-बक्सर के बीच बना गंगा पुल को मरम्मत के लिए बिहार सरकार ने 12 मई 2014 को आधी रात में पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया।
इसके बाद वन विभाग के अफसरों ने पुल बंद होने के कारण भरौली में तैनात प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया लेकिन माफियाओं ने अपना कारोबार छोटे वाहनों से जारी रखा। वहीं प्रावधान है कि प्रवर्तन दल नहीं होने पर बिहार प्रांत की ओर से वन उपज लेकर आने वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाए। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा।
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इस दौरान वनकर्मियों ने राजस्व वसूली न करके करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया। इसका खुलासा अमर उजाला ने किया और तीन दिन पहले क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी से ग्रामीणों ने शिकायत भी की। राज्यमंत्री ने इस बाबत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद शनिवार को डीएफओ ने फेफना के रेंजर जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। इसके अलावा वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से संबद्ध कर दिया। डीएफओ ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रांतीय सीमा भरौली में अवैध तरीके से वसूली के मामले में पहले से स्थानांतरित रेंजर को कार्यमुक्त कर दिया है और दो अन्य वनकर्मियों को अलग-अलग रेंज कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच चल रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। सीमा पर बिहार से आने वाले लाल बालू आदि पर शुल्क लगाने व रसीद देने की व्यवस्था की गई है। श्री मौर्य की तैनाती के मामले में रेंजर जवाब मांगा जाएगा। - राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया
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वर्ष 2012 में वैट लागू होने के बाद सरकार ने सभी विभागों के चेकपोस्ट को समाप्त कर दिया। लिहाजा वन विभाग की ओर से प्रवर्तन दल की तैनाती सभी प्रांतीय सीमाओं पर की गई और बिहार प्रांत की ओर से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। इसी बीच भरौली-बक्सर के बीच बना गंगा पुल को मरम्मत के लिए बिहार सरकार ने 12 मई 2014 को आधी रात में पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया।
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इसके बाद वन विभाग के अफसरों ने पुल बंद होने के कारण भरौली में तैनात प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया लेकिन माफियाओं ने अपना कारोबार छोटे वाहनों से जारी रखा। वहीं प्रावधान है कि प्रवर्तन दल नहीं होने पर बिहार प्रांत की ओर से वन उपज लेकर आने वाले वाहनों पर जुर्माना लगाया जाए। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा।
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इस दौरान वनकर्मियों ने राजस्व वसूली न करके करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया। इसका खुलासा अमर उजाला ने किया और तीन दिन पहले क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी से ग्रामीणों ने शिकायत भी की। राज्यमंत्री ने इस बाबत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद शनिवार को डीएफओ ने फेफना के रेंजर जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। इसके अलावा वनकर्मी राजकिशोर को सिकंदरपुर व केके सिंह को मनियर रेंज कार्यालय से संबद्ध कर दिया। डीएफओ ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
प्रांतीय सीमा भरौली में अवैध तरीके से वसूली के मामले में पहले से स्थानांतरित रेंजर को कार्यमुक्त कर दिया है और दो अन्य वनकर्मियों को अलग-अलग रेंज कार्यालय से संबद्ध किया गया है। मामले की जांच चल रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। सीमा पर बिहार से आने वाले लाल बालू आदि पर शुल्क लगाने व रसीद देने की व्यवस्था की गई है। श्री मौर्य की तैनाती के मामले में रेंजर जवाब मांगा जाएगा। - राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया