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डेढ़ दशक पहले जिले में हुआ था करोड़ों का खाद्यान्न घोटाला

Tue, 31 Dec 2019 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 12:21 AM IST
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A decade and a half ago, there was crores of food scam in the district
बलिया। करीब डेढ़ दशक पहले जिले में हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आने लगा है। सोमवार को प्रकरण की जांच कर रही ईओडब्लू की टीम ने जिले के हनुमानगंज ब्लॉक के तत्कालीन प्रभारी बीडीओ एके पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। इस घोटाले में कुल 51 एफआईआर हुए थे और 6055 आरोपी थे।
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जिले में वर्ष 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आने लगा है। वर्ष 2005 में सबसे पहले सीबीसीआईडी ने 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए अलग-अलग थानों में कुल 51 मुकदमे दर्ज कर जांच शुरु कर दी। इन मुकदमों में 2002-03 से वर्ष 2005-06 के बीच रहे सभी सीडीओ, पीडी, डीडीओ, बीडीओ, तहसीलदार, पूर्ति निरीक्षक, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव आदि समेत कुल 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया। जांच शुरु होते ही जिले में हड़कंप मच गया और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद इस जांच को शासन ने ईओडब्लू को दे दी। इसी बीच जिले के कुछ लोगों ने इस घोटाले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने आठ मुकदमों को अपने अधीन लेते हुए जांच शुुरु कर दी। उधर, ईओडब्लू वाराणसी की ओर से 43 मामलों की जांच की जा रही है। कई मामलों में ईओडब्लू की ओर से पहले भी ग्राम पंचायत सचिवों से योजना से संबंधित पत्रावलियों की मांग की लेकिन सचिवों की ओर से पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराने पर चार माह पहले संबंधित कस्टोडियन 14 ब्लॉकों के 117 सचिवों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा। इसके बाद डीएम के निर्देश पर विभिन्न् थानों में मुकदमा दर्ज कराया गया।
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सीडीओ की पहल पर शासन ने जांच का दिया था आदेश
बलिया। वर्ष 2005 में तत्कालीन सीडीओ व सत्ता दल के जिलाध्यक्ष के बीच विवाद हो गया। इसके बाद सीडीओ ने शासन को पत्र भेजकर आशंका जताया कि एसजीआरवाई के तहत बड़े पैमाने पर घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है जिसकी उच्चस्तरीय जांच कराया जाना आवश्यक है। सीडीओ की रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआईडी को दिया। वर्ष 2005 में जिले में पहुंची सीबीसीआईडी की टीम ने प्रथम दृष्टया जांच के बाद सभी 17 ब्लॉकों में हुई गड़बड़ी को देखते हुए कुल 51 मुकदमे दर्ज कराते हुए 6055 अधिकारियों व कर्मचारियों को आरोपी बनाया। वर्ष 2005 में आरोपियों की शिकायत पर शासन ने मामले की जांच ईओडब्लू को दे दी। अभी जांच चल ही रही थी कि हाईकोर्ट ने आठ मामलों की जांच सीबीआई को दे दिया।
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