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Ballia News: जमीन के इंतजार में ढाई साल से अटकी है 250 करोड़ की पेयजल परियोजना, 10 बार लिखा पत्र

Tue, 02 Jun 2026 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 11:12 PM IST
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A 250-crore drinking water project has been stalled for two and a half years due to land acquisition, and letters have been written 10 times.
कलेक्ट्रेट परिसर​ ​स्थित पानी टंकी।संवाद - फोटो : युवक की मौत के बाद हंगामा करते परिजन व परिचित। संवाद
बलिया। शहर की करीब 1.35 लाख आबादी को गंगा का शुद्ध जल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी सरफेस वाटर सप्लाई परियोजना प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ गई है। लगभग 250 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना का काम पिछले ढाई वर्षों से सिर्फ इसलिए शुरू नहीं हो सका है क्योंकि ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड टैंक निर्माण के लिए अब तक भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। जबकि इसके लिए 10 से ज्यादा बार पत्र लिखा जा चुका है।
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शहर क्षेत्र को आर्सेनिक प्रभावित घोषित किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने दो वर्ष पूर्व गंगा नदी के जल को ट्रीटमेंट कर घर-घर पहुंचाने के लिए इस परियोजना को मंजूरी दी थी। योजना के तहत गंगा का पानी शुद्ध कर पाइपलाइन और ओवरहेड टैंकों के माध्यम से शहरवासियों तक पहुंचाया जाना था, लेकिन भूमि आवंटन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। जल निगम शहरी के अधिकारियों के अनुसार भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को 10 बार पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। बीच में प्रशासन ने जमुआ गांव में भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन राजस्व विभाग द्वारा नापी और अंतिम स्वीकृति न मिलने से मामला अधर में लटका हुआ है। वहीं, गंगा नदी के किनारे इंटेक वेल और अन्य संरचनाओं के लिए भी भूमि की तलाश जारी है। परियोजना के लिए लगभग 1.5 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि न मिलने के कारण न तो ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू हो सका है और न ही ओवरहेड टैंक व पाइपलाइन बिछाने का कार्य आगे बढ़ पाया है।
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आयु पूरी कर चुकी टंकियों से पानी की सप्लाई
शहर में वर्तमान समय में जगदीशपुर, पूर्वांचल टाकीज, कलेक्ट्रेट और बहादुरपुर स्थित चार पानी टंकियों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जल निगम की रिपोर्ट के अनुसार ये सभी टंकियां अपनी निर्धारित 30 वर्ष की आयु दो वर्ष पहले ही पूरी कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन्हीं के माध्यम से शहर में पानी की सप्लाई जारी है। ऐसे में शहरवासियों को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर पुरानी व्यवस्था के सहारे जलापूर्ति हो रही है, वहीं दूसरी ओर शुद्ध गंगा जल उपलब्ध कराने वाली परियोजना फाइलों में कैद होकर रह गई है।
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जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
शहर की बड़ी आबादी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाली इस परियोजना के ठप पड़े रहने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो जनप्रतिनिधि इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं और न ही प्रशासन भूमि उपलब्ध कराने में तत्परता दिखा रहा है। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की योजना शुरू होने से पहले ही ठहराव का शिकार हो गई है।

सरफेस वाटर सप्लाई योजना के तहत गंगा नदी का जल ट्रीटमेंट कर प्रत्येक घर तक पहुंचाया जाना है। इसके लिए ओवरहेड टैंक, ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता है। भूमि आवंटन के लिए कई बार पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। भूमि मिलते ही परियोजना पर तेजी से काम शुरू कराया जाएगा। - इं. पीयूष कुमार मौर्य, अधिशासी अभियंता, जल निगम (शहरी)
परियोजना एक नजर में
परियोजना : सरफेस वाटर सप्लाई योजना
लागत : लगभग 250 करोड़ रुपये
लाभार्थी : 1.35 लाख से अधिक शहरी आबादी
स्रोत : गंगा नदी का शुद्धीकृत जल
आवश्यक भूमि : 1.5 हेक्टेयर
स्थिति : भूमि आवंटन के अभाव में ढाई साल से लंबित
उद्देश्य : आर्सेनिक युक्त भूजल पर निर्भरता समाप्त कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना।
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