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सत्साहित्य मशाल की तरह दिखाता है रास्ता
Ballia
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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बलिया। सर्व धर्म एवं संप्रदाय के संयुक्त तत्वावधान में युग निर्माण योजना मथुरा के निर्देशन में नव चेतना केंद्र द्वारा एक से 10 नवंबर तक अग्रवाल धर्मशाला में पुस्तक मेला का आयोजन किया गया था। जिसका समापन श्री श्री 1008 स्वामी रामभद्र कलपात्री उर्फ बालक बाबा के कर कमलों द्वारा किया गया।
संत श्री बालक बाबा ने कहा कि हमारे देश की युवा पीढ़ी का झुकाव अश्लील पुस्तकों के प्रति बढ़ता जा रहा है और संत, साहित्यों के अध्ययन के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। यह किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए घातक है। कहा कि विचार क्रांति अभियान को सफल बनावें तथा अपने सपनाें को साकार करने के लिए सतसाहित्यों को अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि सतसाहित्य मशाल का स्वरूप है। इसके प्रकाश से पग-पग पर हमें रास्ता दिखाई देता है। कहा कि अगर हम भूत तथा भविष्य कर चिंता छोड़कर केवल वर्तमान को सुधारें तो हमारा जीवन शांतिमय और सुखमय हो जाएगा। पुस्तक मेला समिति को इस आयोजन के लिए साधुवाद दिया और इस प्रकार के आयोजन को बार-बार करने की सलाह दी। पुस्तक मेला के संरक्षक श्रीराम तिवारी ने जनपदवासियों, साहित्य प्रेमियों, पत्रकार बंधुओं, सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर देवेंद्र नाथ उपाध्याय, पीयूष कुमार चतुर्वेदी, पद्मेश ओझा, श्याम नारायण तिवारी, दीना नाथ ओझा, रमेश चतुर्वेदी, ललिता त्रिपाठी, केके सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सत्य नारायण राय, विजस बिहारी दुबे, सर्वानंद मिश्रा, उमेश सिंह, विश्वनाथ, चंदन ओझा, रीना ओझा, गीता पांडेय, दुर्गावती प्रधान, मंजू शुक्ला, गायत्री तिवारी, उर्मिला सिंह, लालमुनि, चंद्रकला, जानकी सिंह, प्रभावती राय, विद्यावती सिंह, सुशीला देवी, सदानंद ओझा, केशव दुबे, मनमोहन पांडेय आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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संत श्री बालक बाबा ने कहा कि हमारे देश की युवा पीढ़ी का झुकाव अश्लील पुस्तकों के प्रति बढ़ता जा रहा है और संत, साहित्यों के अध्ययन के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। यह किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए घातक है। कहा कि विचार क्रांति अभियान को सफल बनावें तथा अपने सपनाें को साकार करने के लिए सतसाहित्यों को अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि सतसाहित्य मशाल का स्वरूप है। इसके प्रकाश से पग-पग पर हमें रास्ता दिखाई देता है। कहा कि अगर हम भूत तथा भविष्य कर चिंता छोड़कर केवल वर्तमान को सुधारें तो हमारा जीवन शांतिमय और सुखमय हो जाएगा। पुस्तक मेला समिति को इस आयोजन के लिए साधुवाद दिया और इस प्रकार के आयोजन को बार-बार करने की सलाह दी। पुस्तक मेला के संरक्षक श्रीराम तिवारी ने जनपदवासियों, साहित्य प्रेमियों, पत्रकार बंधुओं, सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर देवेंद्र नाथ उपाध्याय, पीयूष कुमार चतुर्वेदी, पद्मेश ओझा, श्याम नारायण तिवारी, दीना नाथ ओझा, रमेश चतुर्वेदी, ललिता त्रिपाठी, केके सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सत्य नारायण राय, विजस बिहारी दुबे, सर्वानंद मिश्रा, उमेश सिंह, विश्वनाथ, चंदन ओझा, रीना ओझा, गीता पांडेय, दुर्गावती प्रधान, मंजू शुक्ला, गायत्री तिवारी, उर्मिला सिंह, लालमुनि, चंद्रकला, जानकी सिंह, प्रभावती राय, विद्यावती सिंह, सुशीला देवी, सदानंद ओझा, केशव दुबे, मनमोहन पांडेय आदि का सहयोग सराहनीय रहा।
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