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चाय बनाते वक्त जलने से प्रधानाध्यापिका की मौत
Ballia
Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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सिकंदरपुर। वरिष्ठ बसपा नेता शेख अली अहमद उर्फ संजय भाई की बुआ और प्राथमिक विद्यालय लिलकर की प्रधानाध्यापिका फरीदा बेगम (55) की मौत गुरुवार को संदिग्ध हाल में जलने से हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेज दिया। उनकी मौत के बाद से क्षेत्र में चरचाओं का बाजार गर्म है। परिजनों के मुताबिक वह सुबह के पांच बजे चाय बना रही थी। उसी समय उनका दुपट्टा गैस की लौ ने पकड़ लिया। घर के सभी सदस्य सो रहे थे, जिससे इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी। सुबह में जब परिजन किचन में पहुंचे तो उनकी मौत हो चुकी थी।
कसबा के शेख अली अहमद उर्फ संजय भाई की बुआ फरीदा बेगम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका थीं। उनकी शादी वर्षों पूर्व सिकंदरपुर में ही हुई थी। शादी के कुछ साल बाद उनके पति अमीर हसन की मौत हो गई। इसके बाद से वह अक्सर भाई के ही घर रहती थी। बीते दिनों उनकी तैनाती कसबा के प्राथमिक विद्यालय पर थी। कुछ दिनों पूर्व उनका स्थानांतरण प्राथमिक विद्यालय लिलकर में बतौर प्रधानाध्यापिका के पद पर हुआ था। कसबा स्थित अपने भतीजे के जिस मकान में वह रहती थी वह काफी बड़ा है। उसमें संजय और उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे और फरीदा रहती थी। परिजनों की मानें तो गुरुवार की सुबह वह चाय बनाने के लिए किचन में गई थीं। उस समय घर का कोई सदस्य जगा नहीं था। चाय बनाते समय अचानक उनका दुपट्टा आग की जद में आ गया। वह जब तक कुछ समझ पाती आग ने उन्हें पूरी तरह अपनी आगोश में ले लिया, जिससे झुलसकर उनकी मौत हो गई। इसकी जानकारी जब घर वालों को हुई तो उनके होश उड़ गए। बुआ की मौत के बाद संजय भाई के साथ ही पूरा परिवार की रोते-रोते हालत खराब है। कसबेवासियों के मुताबिक फरीदा बहुत ईमानदार व सुशील महिला थी।
वह हर किसी के दु:ख-सुख में हमेशा खड़ी रहती थी। स्कूल कार्यों में भी वह पूरी पारदर्शिता रखती थी। उनकी मौत के बाद से शिक्षा विभाग भी काफी मर्माहत है। सूचना के बाद थानाध्यक्ष रविंद्रभूषण मौर्य सदलबल मौके पर पहुंचे और पंचनामा के बाद शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया।
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कसबा के शेख अली अहमद उर्फ संजय भाई की बुआ फरीदा बेगम बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका थीं। उनकी शादी वर्षों पूर्व सिकंदरपुर में ही हुई थी। शादी के कुछ साल बाद उनके पति अमीर हसन की मौत हो गई। इसके बाद से वह अक्सर भाई के ही घर रहती थी। बीते दिनों उनकी तैनाती कसबा के प्राथमिक विद्यालय पर थी। कुछ दिनों पूर्व उनका स्थानांतरण प्राथमिक विद्यालय लिलकर में बतौर प्रधानाध्यापिका के पद पर हुआ था। कसबा स्थित अपने भतीजे के जिस मकान में वह रहती थी वह काफी बड़ा है। उसमें संजय और उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे और फरीदा रहती थी। परिजनों की मानें तो गुरुवार की सुबह वह चाय बनाने के लिए किचन में गई थीं। उस समय घर का कोई सदस्य जगा नहीं था। चाय बनाते समय अचानक उनका दुपट्टा आग की जद में आ गया। वह जब तक कुछ समझ पाती आग ने उन्हें पूरी तरह अपनी आगोश में ले लिया, जिससे झुलसकर उनकी मौत हो गई। इसकी जानकारी जब घर वालों को हुई तो उनके होश उड़ गए। बुआ की मौत के बाद संजय भाई के साथ ही पूरा परिवार की रोते-रोते हालत खराब है। कसबेवासियों के मुताबिक फरीदा बहुत ईमानदार व सुशील महिला थी।
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वह हर किसी के दु:ख-सुख में हमेशा खड़ी रहती थी। स्कूल कार्यों में भी वह पूरी पारदर्शिता रखती थी। उनकी मौत के बाद से शिक्षा विभाग भी काफी मर्माहत है। सूचना के बाद थानाध्यक्ष रविंद्रभूषण मौर्य सदलबल मौके पर पहुंचे और पंचनामा के बाद शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया।
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