{"_id":"5a84723a4f1c1b9f268ba00a","slug":"91518629434-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विस में उठाएं शिक्षामित्रों की आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विस में उठाएं शिक्षामित्रों की आवाज
Updated Wed, 14 Feb 2018 11:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। उत्तर प्रदेश आदर्श समायोजित शिक्षक / शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने जनपद के सातों विधायकों को पत्र लिखकर विधानसभा में शिक्षामित्रों की आवाज बुलंद करने की मांग की है । कहा कि जनप्रतिनिधों के हस्तक्षेप से शिक्षामित्रों के हक का रास्ता खुलेगा।
अखिलेश सिंह ने कहा कि समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्रों के सामने घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति में निराश होकर प्रदेश के शिक्षामित्र आत्महत्या जैसे भयानक कदम भी उठा रहे हैं, जबकि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में शिक्षामित्रों की संख्या कम नहीं है, ऐसे में क्षेत्र के प्रतिनिधि होने के नाते विधायक उनकी आवाज विधानसभा में उठाकर उनको नया जीवनदान देने में महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं।
कहा कि कई वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्र के बच्चे शादी के लायक हो चुके हैं तथा बहुत शिक्षामित्रों के बच्चे बाहर पढ़ने के लिए ही गए हैं। ऐसे में वह काफी उलझन में अपने को महसूस करते हुए आर्थिक संकट की स्थिति से गुजर रहे हैं। अगर समय रहते शिक्षामित्रों के साथ न्याय करने में सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाती है तो शिक्षामित्रों के आत्मघाती कदम की जिम्मेदार भी सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग ही होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अखिलेश सिंह ने कहा कि समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्रों के सामने घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति में निराश होकर प्रदेश के शिक्षामित्र आत्महत्या जैसे भयानक कदम भी उठा रहे हैं, जबकि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में शिक्षामित्रों की संख्या कम नहीं है, ऐसे में क्षेत्र के प्रतिनिधि होने के नाते विधायक उनकी आवाज विधानसभा में उठाकर उनको नया जीवनदान देने में महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं।
विज्ञापन
कहा कि कई वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्र के बच्चे शादी के लायक हो चुके हैं तथा बहुत शिक्षामित्रों के बच्चे बाहर पढ़ने के लिए ही गए हैं। ऐसे में वह काफी उलझन में अपने को महसूस करते हुए आर्थिक संकट की स्थिति से गुजर रहे हैं। अगर समय रहते शिक्षामित्रों के साथ न्याय करने में सरकार आवश्यक कदम नहीं उठाती है तो शिक्षामित्रों के आत्मघाती कदम की जिम्मेदार भी सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग ही होंगे।
विज्ञापन