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घूंघट में उलझी चार नपं अध्यक्ष की दावेदारी
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:58 PM IST
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बलिया। घूंघट में अपने घर के चौखट की दलहीज न लांघने वाली महिलाएं नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का ख्वाब आरक्षण की सूची जारी होने के बाद आने लगा है। उनके पति एवं बेटे प्रतिनिधि बनकर नगर निकायों में प्रतिनिधत्व कर मलाई काटने का ख्वाब अभी से देखना शुरू कर दिए है। इसके लिए नेताओं में अपने परिवार की महिलाओं को आगे कर अपनी नैया पार लगाने की जुगत में है।
नगर निकाय चुनाव को लेकर आरक्षण की स्थिति इस बार बदली है, ऐसे में आधी आबादी को तरजीह मिलने लगी है। कई दावेदार आधी आबादी को सामने लाकर चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने में जुट गए हैं। महिलाएं भी दहलीज से बाहर घूंघट में दावेदारी कर रही है। लेकिन इसका फायदा तो उनके पति और बेटे ही कमोबेश हर क्षेत्रों में उठाएंगे। इसकी जुगत हर कोई दावेदारी करने वाला लगा रहा है। वैसे तो सभासद पद के लिए कई बार महिलाएं घरों में ही रहकर अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर चुकी है। लेकिन अबकी बार जनपद के चार नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए आधी आबादी के लिए आरक्षित कर दी गई है। इससे तैयारी कर रहे कुछ नेता हतोत्साहित हैं वहीं कुछ नेता अपने घर दहलीज के भीतर घूंघट में रहने वाली महिलाओं को आगे लाकर उनके सहारे राजनीतिक जोड़-तोड़ की विसात बिछाने लगे हैं। यदि देखा जाय तो ज्यादातर इन महिलाओं का राजनीति से कोई नाता रहा है और न है। लेकिन नगर पंचायतों में लगे होर्डिंग्स में उनके पति ही अब जनता को विभिन्न पर्वो की बधाई देते नजर आ रहे है। लेकिन अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद इन राजनीतिकों का सुर बदल सा गया है। उनका मानना है कि राजनीति में बने रहने के लिए सबकुछ जायज है।
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नगर निकाय चुनाव को लेकर आरक्षण की स्थिति इस बार बदली है, ऐसे में आधी आबादी को तरजीह मिलने लगी है। कई दावेदार आधी आबादी को सामने लाकर चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने में जुट गए हैं। महिलाएं भी दहलीज से बाहर घूंघट में दावेदारी कर रही है। लेकिन इसका फायदा तो उनके पति और बेटे ही कमोबेश हर क्षेत्रों में उठाएंगे। इसकी जुगत हर कोई दावेदारी करने वाला लगा रहा है। वैसे तो सभासद पद के लिए कई बार महिलाएं घरों में ही रहकर अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर चुकी है। लेकिन अबकी बार जनपद के चार नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए आधी आबादी के लिए आरक्षित कर दी गई है। इससे तैयारी कर रहे कुछ नेता हतोत्साहित हैं वहीं कुछ नेता अपने घर दहलीज के भीतर घूंघट में रहने वाली महिलाओं को आगे लाकर उनके सहारे राजनीतिक जोड़-तोड़ की विसात बिछाने लगे हैं। यदि देखा जाय तो ज्यादातर इन महिलाओं का राजनीति से कोई नाता रहा है और न है। लेकिन नगर पंचायतों में लगे होर्डिंग्स में उनके पति ही अब जनता को विभिन्न पर्वो की बधाई देते नजर आ रहे है। लेकिन अध्यक्ष पद आरक्षित होने के बाद इन राजनीतिकों का सुर बदल सा गया है। उनका मानना है कि राजनीति में बने रहने के लिए सबकुछ जायज है।
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