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वेतन निर्धारण मामले में 90 लाख का गोलमाल
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बलिया। जिला विकास कार्यालय में वेतन निर्धारण मामले में करीब 90 लाख के गोलमाल का मामला सामने आया है। पटल प्रभारी, तत्कालीन डीडीओ, कोषागार के कर्मियों व अधिकारी की मिलीभगत से 27 कर्मियों को गलत तरीके से छह हजार अधिक वेतन निर्धारण कर लाभ पहुंचाया गया। हालांकि इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन डीडीओ ने संशोधन कर वसूली शुरू कर दी, लेकिन आज तक पूरी वसूली नहीं हो सकी है। इसका खुलासा भी तब हुआ जब प्रोन्नत होकर कर्मचारी गैर जनपद गए।
जनपद के अधिकांश विभागों में भ्रष्टाचार की बात आए दिन सामने आती है, लेकिन शासन की ओर से कर्मचारियों के वेतनमान निर्धारण में धनराशि का गोलमाल होने का मामला जिले में पहली बार सामने आया है। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में जिला विकास विभाग में कार्यरत सहायक विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों के वेतन निर्धारण की घोषणा सरकार ने की। धनराशि करीब दो वर्ष बाद 2018 में जारी हुई। इसके चलते वर्ष 2018 में तत्कालीन डीडीओ के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी कार्यालय के पटल सहायक ने कुल 27 सहायक विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों का वेतन निर्धारण किया। नियमानुसार इन कर्मियों का वेतन निर्धारण 4800 ग्रेड में होना चाहिए, लेकिन उसे 5400 ग्रेड में करते हुए देयता वर्ष 2016 से निर्धारित की गई। वेतन निर्धारण के बाद तत्कालीन डीडीओ के हस्ताक्षर से वेतन बिल कोषागार को भेजा गया। यहां भी मानकों को ताक पर रखकर कर्मियों व अधिकारी ने बिल को पास कर दिया और कर्मचारी ज्यादा वेतन प्राप्त करने लगे।
वर्ष 2018 में कुछ सहायक विकास अधिकारियों का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया। बताया जाता है कई जनपदों के सीनियर कर्मचारियों का वेतन कम व जूनियर कर्मचारियों का वेतन अधिक होने का मामला सामने आया। इसके बाद यह मामला मंडलायुक्त के यहां भी पहुंच गया। इसके बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर तत्कालीन डीडीओ ने मामले पर पर्दा डालते हुए सभी वेतन निर्धारण का संशोधन कर कोषागार को भेज दिया और वसूली की कार्रवाई शुरु की। अधिकारियों की मानें तो तब तक करीब 90 लाख रुपये का आहरण कर्मियों ने कर लिया था। इसके बाद तत्कालीन डीडीओ की ओर से 2019 में वसूली की कार्रवाई शुरू की गई। वर्तमान अधिकांश कर्मचारी जहां गैर जनपद में हैं वहीं 12 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सेवानिवृत्त कर्मियों से वसूली की जिम्मेदारी कोषागार की है वहीं सेवारत कर्मियों से वसूली की जा रही है। अब तक पांच सेवारत कर्मियों से वसूली हो चुकी है।
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मेरे कार्यकाल के पूर्व का पूरा प्रकरण है। वर्तमान में वसूली की कार्रवाई चल रही है। गलत तरीके से आहरित धनराशि हर हाल में वसूल होगी।
- राजित राम मिश्र, जिला विकास अधिकारी, बलिया।
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मेरे पूर्व के अधिकारी के कार्यकाल का यह प्रकरण है। जिला विकास अधिकारी कार्यालय से 10 पेंशनरों की सूची मिली है, उनसे वसूली की जा रही है।
- ममता सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी, बलिया।
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जनपद के अधिकांश विभागों में भ्रष्टाचार की बात आए दिन सामने आती है, लेकिन शासन की ओर से कर्मचारियों के वेतनमान निर्धारण में धनराशि का गोलमाल होने का मामला जिले में पहली बार सामने आया है। बताया जाता है कि वर्ष 2016 में जिला विकास विभाग में कार्यरत सहायक विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों के वेतन निर्धारण की घोषणा सरकार ने की। धनराशि करीब दो वर्ष बाद 2018 में जारी हुई। इसके चलते वर्ष 2018 में तत्कालीन डीडीओ के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी कार्यालय के पटल सहायक ने कुल 27 सहायक विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों का वेतन निर्धारण किया। नियमानुसार इन कर्मियों का वेतन निर्धारण 4800 ग्रेड में होना चाहिए, लेकिन उसे 5400 ग्रेड में करते हुए देयता वर्ष 2016 से निर्धारित की गई। वेतन निर्धारण के बाद तत्कालीन डीडीओ के हस्ताक्षर से वेतन बिल कोषागार को भेजा गया। यहां भी मानकों को ताक पर रखकर कर्मियों व अधिकारी ने बिल को पास कर दिया और कर्मचारी ज्यादा वेतन प्राप्त करने लगे।
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वर्ष 2018 में कुछ सहायक विकास अधिकारियों का स्थानांतरण गैर जनपद हो गया। बताया जाता है कई जनपदों के सीनियर कर्मचारियों का वेतन कम व जूनियर कर्मचारियों का वेतन अधिक होने का मामला सामने आया। इसके बाद यह मामला मंडलायुक्त के यहां भी पहुंच गया। इसके बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर तत्कालीन डीडीओ ने मामले पर पर्दा डालते हुए सभी वेतन निर्धारण का संशोधन कर कोषागार को भेज दिया और वसूली की कार्रवाई शुरु की। अधिकारियों की मानें तो तब तक करीब 90 लाख रुपये का आहरण कर्मियों ने कर लिया था। इसके बाद तत्कालीन डीडीओ की ओर से 2019 में वसूली की कार्रवाई शुरू की गई। वर्तमान अधिकांश कर्मचारी जहां गैर जनपद में हैं वहीं 12 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सेवानिवृत्त कर्मियों से वसूली की जिम्मेदारी कोषागार की है वहीं सेवारत कर्मियों से वसूली की जा रही है। अब तक पांच सेवारत कर्मियों से वसूली हो चुकी है।
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मेरे कार्यकाल के पूर्व का पूरा प्रकरण है। वर्तमान में वसूली की कार्रवाई चल रही है। गलत तरीके से आहरित धनराशि हर हाल में वसूल होगी।
- राजित राम मिश्र, जिला विकास अधिकारी, बलिया।
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मेरे पूर्व के अधिकारी के कार्यकाल का यह प्रकरण है। जिला विकास अधिकारी कार्यालय से 10 पेंशनरों की सूची मिली है, उनसे वसूली की जा रही है।
- ममता सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी, बलिया।