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महायज्ञ में जयकारे से वातावतरण हो रहा भक्तिमय
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बैरिया। नारायणगढ़ में नवनिर्मित दुर्गा मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के क्रम में चल रहे प्रतिष्ठात्मक श्री शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन गुरुवार को दर्जनों पंडितों का मंत्रोच्चार पूरे दिन गूंजता रहा। परिक्रमा के दौरान भी श्रद्धालु खूब जयकारे लगाते हैं।
उधर, शाम को प्रतिदिन आयोजित श्रीमद्भागवत के दौरान भी सैकड़ों की भीड़ हो रही है। बुधवार की रात मिथिला से पधारे रामेश्वर दास महाराज ने कहा कि उत्तम और मध्यम पुरुषों में समान भाव रखकर सुख-दुख को भी एक समझना चाहिए तथा मन और इंद्रियों को जीत कर संपूर्ण लोक की रक्षा करना चाहिए। कहा कि राजा का कल्याण प्रजा पालन में ही है। इससे उसे परलोक में प्रजा के पुण्य का छठा भाग मिलता है। इसके विपरीत जो राजा प्रजा की रक्षा नहीं करता उसका सारा पुण्य प्रजा छीन लेती है और बदले में उसे प्रजा के पाप का भागी होना पड़ता है। श्रेष्ठ ब्राह्मणों की संपत्ति और पूर्व परंपरा से प्राप्त हुए धर्म को ही मुख्यत: अपनाना चाहिए। अच्छे मनुष्य के गुण स्वभाव प्रभु को वश में कर लेता है। इसलिए स्वच्छ आचरण करते हुए मनुष्य जब प्रभु से जो कुछ भी मांग लेता है उसे प्रभु तुरंत दे देते हैं। उस मनुष्य को गुरु से रहित यज्ञ तथा योग का आश्रय नहीं लेना पड़ता। प्रभु सच्चे मनुष्य के हृदय में वास करते हैं। कथा देर रात तक चलती रही। इस मौके पर पूर्व प्रधान मुन्ना प्रसाद, भगवती सिंह, धर्मनाथ सिंह, दूधनाथ तिवारी, जसवंत सिंह, विमल पटेल, रवि आदि रहे।
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उधर, शाम को प्रतिदिन आयोजित श्रीमद्भागवत के दौरान भी सैकड़ों की भीड़ हो रही है। बुधवार की रात मिथिला से पधारे रामेश्वर दास महाराज ने कहा कि उत्तम और मध्यम पुरुषों में समान भाव रखकर सुख-दुख को भी एक समझना चाहिए तथा मन और इंद्रियों को जीत कर संपूर्ण लोक की रक्षा करना चाहिए। कहा कि राजा का कल्याण प्रजा पालन में ही है। इससे उसे परलोक में प्रजा के पुण्य का छठा भाग मिलता है। इसके विपरीत जो राजा प्रजा की रक्षा नहीं करता उसका सारा पुण्य प्रजा छीन लेती है और बदले में उसे प्रजा के पाप का भागी होना पड़ता है। श्रेष्ठ ब्राह्मणों की संपत्ति और पूर्व परंपरा से प्राप्त हुए धर्म को ही मुख्यत: अपनाना चाहिए। अच्छे मनुष्य के गुण स्वभाव प्रभु को वश में कर लेता है। इसलिए स्वच्छ आचरण करते हुए मनुष्य जब प्रभु से जो कुछ भी मांग लेता है उसे प्रभु तुरंत दे देते हैं। उस मनुष्य को गुरु से रहित यज्ञ तथा योग का आश्रय नहीं लेना पड़ता। प्रभु सच्चे मनुष्य के हृदय में वास करते हैं। कथा देर रात तक चलती रही। इस मौके पर पूर्व प्रधान मुन्ना प्रसाद, भगवती सिंह, धर्मनाथ सिंह, दूधनाथ तिवारी, जसवंत सिंह, विमल पटेल, रवि आदि रहे।
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