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डीएम की आईजीआरएस की समीक्षा, नपा पर खफा दिखे डीएम
Updated Mon, 05 Mar 2018 11:08 PM IST
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बलिया। जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को बैठक कर आईजीआरएस की शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। इस दौरान नगर पालिका परिषद बलिया की स्थिति ज्यादा खराब होने पर नाराजगी जताई। शिकायतों के निस्तारण में रुचि नहीं लेने पर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका व संबंधित लिपिक को प्रतिकूल प्रविष्टि देने की बात कही।
जिलाधिकारी ने कहा कि बैठक के बाद तत्काल शिकायतों के निस्तारण में लग जाएं। मंगलवार की शाम तक अगर ज्यादा समय से लंबित शिकायत डिफाल्टर पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय है। ऐसी स्थिति में शासन स्तर से भी बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार के संदर्भ लंबित है तो उसको डिफाल्टर होने का इंतजार नहीं करें। शिकायत मिलते ही उसके समाधान में लग जाए। तभी जिले की रैकिंग बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत दो विभागों से जुड़ी है तो दोनों अधिकारी आपस में बैठकर निपटा लें। डिफाल्टर होने पर जो जिम्मेदार होंगे उन पर कार्रवाई होगी। डिफाल्टर हो चुकी शिकायतों वाले आधा दर्जन अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। तहसील स्तर पर भी शिकायतों के निस्तारण की स्थिति खराब होने पर सभी उपजिलाधिकारी व तहसीलदार को कड़े निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, डीडीओ, बीएसए समेत सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं को स्वयं रूचि लेकर निस्तारण कराएं।
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जिलाधिकारी ने कहा कि बैठक के बाद तत्काल शिकायतों के निस्तारण में लग जाएं। मंगलवार की शाम तक अगर ज्यादा समय से लंबित शिकायत डिफाल्टर पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय है। ऐसी स्थिति में शासन स्तर से भी बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार के संदर्भ लंबित है तो उसको डिफाल्टर होने का इंतजार नहीं करें। शिकायत मिलते ही उसके समाधान में लग जाए। तभी जिले की रैकिंग बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत दो विभागों से जुड़ी है तो दोनों अधिकारी आपस में बैठकर निपटा लें। डिफाल्टर होने पर जो जिम्मेदार होंगे उन पर कार्रवाई होगी। डिफाल्टर हो चुकी शिकायतों वाले आधा दर्जन अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। तहसील स्तर पर भी शिकायतों के निस्तारण की स्थिति खराब होने पर सभी उपजिलाधिकारी व तहसीलदार को कड़े निर्देश दिए। मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, डीडीओ, बीएसए समेत सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं को स्वयं रूचि लेकर निस्तारण कराएं।
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