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आदेश के बाद भी जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं
Updated Sun, 08 Oct 2017 11:27 PM IST
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बलिया। आदिवासी खरवार सेवा समिति की बैठक रविवार को माडल तहसील परिसर में आयोजित की गई। जिसमें खरवार जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई।
प्रदेश अध्यक्ष गोपाल खरवार कर्णपुरी ने कहा कि जिलाधिकारी व उप जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी लेखपाल जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे है। उनका कहना है कि हम लोगों को अभी कोई आदेश नहीं मिला है। यह बहाना ही नहीं, बल्कि खरवार जाति का उत्पीड़न है। कहा कि कमकर के नाम पर खरवार जाति का उत्पीड़न किया जाता था। लेकिन हम लोगों ने अपनी समस्या को सरकार से मिलकर अवगत कराया। उप्र सरकार द्वारा नौ जिलों में शोध करवाया। जिसमें सत्यता सामने आई कि कमकर कोई जाति नहीं है, न ही कमकर किसी जाति का उपजाति है, बल्कि कमकर पेशागत संबोधन है। सर्वेक्षण में खरवार जाति के सदस्यों द्वारा जिविकोपार्जन के लिए हलुवाई, मजदूरी, पानी भरना, डोली उठाना, लकड़ी से कत्था बनाना, घरेले नौकर आदि पेशा के आधार पर बोल-बाल में कमकर कहा गया है। इस मौके पर शिवशंकर खरवार, प्रभुनाथ, रामपाल, परशुराम, मनोज, बासुदेव, बिहारी, गनेश आदि मौजूद रहे।
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प्रदेश अध्यक्ष गोपाल खरवार कर्णपुरी ने कहा कि जिलाधिकारी व उप जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी लेखपाल जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे है। उनका कहना है कि हम लोगों को अभी कोई आदेश नहीं मिला है। यह बहाना ही नहीं, बल्कि खरवार जाति का उत्पीड़न है। कहा कि कमकर के नाम पर खरवार जाति का उत्पीड़न किया जाता था। लेकिन हम लोगों ने अपनी समस्या को सरकार से मिलकर अवगत कराया। उप्र सरकार द्वारा नौ जिलों में शोध करवाया। जिसमें सत्यता सामने आई कि कमकर कोई जाति नहीं है, न ही कमकर किसी जाति का उपजाति है, बल्कि कमकर पेशागत संबोधन है। सर्वेक्षण में खरवार जाति के सदस्यों द्वारा जिविकोपार्जन के लिए हलुवाई, मजदूरी, पानी भरना, डोली उठाना, लकड़ी से कत्था बनाना, घरेले नौकर आदि पेशा के आधार पर बोल-बाल में कमकर कहा गया है। इस मौके पर शिवशंकर खरवार, प्रभुनाथ, रामपाल, परशुराम, मनोज, बासुदेव, बिहारी, गनेश आदि मौजूद रहे।
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